युद्ध की विभीषिका और तीखी धमकियों के बीच एक बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ मुलाकात की है। यह बैठक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के दौरान आयोजित की गई। इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई उस चेतावनी के ठीक बाद हुई है जिसमें उन्होंने देश को पूरी तरह बर्बाद करने की बात कही थी। हालांकि, इस बैठक के बाद ट्रंप ने इसे उपयोगी करार दिया और कहा कि दोनों पक्षों के बीच सार्थक बातचीत हुई है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में एक और बैठक आयोजित की जाएगी।
होर्मुज को खोलने के लिए ईरान की शर्तें
ईरानी सरकारी मीडिया IRIB की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक स्टीव विटकॉफ के विशेष अनुरोध पर बुलाई गई थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस बैठक में शामिल होकर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए ईरान की शर्तों को मजबूती से दोहराया और ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक होर्मुज को नहीं खोला जाएगा। तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाना शामिल है। इसके अलावा, ईरान ने अपनी उन सभी संपत्तियों के तत्काल भुगतान और उन्हें रिलीज करने की मांग की है जिन्हें अमेरिका द्वारा फ्रीज कर दिया गया है।
अराघची ने बैठक के दौरान यह भी साफ कर दिया कि सभी मोर्चों पर युद्ध को पूरी तरह खत्म करना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन शर्तों के पूरा हुए बिना होर्मुज के रास्ते को दोबारा नहीं खोला जाएगा और यह बातचीत उस समय हो रही है जब क्षेत्र में पिछले 7 महीनों से युद्ध की स्थिति बनी हुई है। ईरानी पक्ष ने अपनी शर्तों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और स्पष्ट किया है कि वे किसी भी दबाव में अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।
ट्रंप की धमकी और बैठक का परिणाम
यह 3 घंटे लंबी बैठक ट्रंप के उस भाषण के कुछ ही देर बाद हुई जिसमें उन्होंने ईरान को विनाश की चेतावनी दी थी। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा था कि अगर 7 महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए कोई समझौता नहीं होता है, तो वे ईरान को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उन्हें एक बड़ा फैसला लेना है कि क्या ईरान के साथ समझौता कर उसे एक बेहतर देश बनने का मौका दिया जाए या फिर उसे हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए ताकि वह भविष्य में किसी को नुकसान न पहुंचा सके।
ट्रंप के इस भाषण के दौरान ईरानी डेलिगेशन के एक सदस्य को छोड़कर बाकी सभी सदस्य विरोध स्वरूप बाहर चले गए थे। हालांकि, बाद में हुई बैठक को ट्रंप ने सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत सार्थक रही है, लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी कि किन बिंदुओं पर सहमति बनी है।
मिड टर्म चुनाव और भविष्य की संभावनाएं
ईरान में युद्ध खत्म करने की कोशिशें अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रही हैं। अमेरिका लगातार तेहरान पर समझौते के लिए दबाव बना रहा है। ट्रंप ने विश्वास जताया है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिड टर्म चुनावों के बाद इस दिशा में कोई ठोस समझौता हो सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला है, लेकिन होर्मुज को खोलने और युद्ध विराम को लेकर ईरान की कड़ी शर्तों ने गेंद अब अमेरिका के पाले में डाल दी है। आने वाली बैठकों में यह स्पष्ट होगा कि क्या अमेरिका ईरान की इन मांगों को स्वीकार करता है या तनाव और गहराता है।