पुतिन से मिले ट्रंप के दूत: रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बड़ी पहल, क्या थमेगी जंग?

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पुतिन से मिले ट्रंप के दूत: रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बड़ी पहल, क्या थमेगी जंग?
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रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से अधिक समय से जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। यह युद्ध अब अपने पांचवें साल में प्रवेश करने की कगार पर है, और ऐसे समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दो अत्यंत करीबी दूत, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर, एक विशेष मिशन पर मॉस्को पहुंचे हैं और इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को रोकना और शांति का मार्ग प्रशस्त करना है। मॉस्को पहुंचते ही इन दूतों ने रूसी अधिकारियों के साथ गहन चर्चा की और इसके बाद उनकी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई। ट्रंप ने इस यात्रा से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनके दूत अपने साथ युद्ध विराम का एक नया और ठोस प्रस्ताव लेकर जा रहे हैं।

शांति की दिशा में पहला बड़ा कदम

वॉशिंगटन के ये दूत केवल संदेशवाहक के रूप में काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। योजना के अनुसार, ये दूत पहले राष्ट्रपति पुतिन के सामने अपना शांति प्रस्ताव रखेंगे और उसके बाद सीधे कीव जाकर राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से संवाद करेंगे। इस कूटनीतिक प्रयास का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सीधे तौर पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व को एक मेज पर लाने की कोशिश है। अगर मॉस्को और कीव के बीच कोई समझौता होता है, तो इसे ट्रंप की विदेश नीति की एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जाएगा। हालांकि, यदि बातचीत क्षेत्रीय संप्रभुता जैसे जटिल मुद्दों पर अटक जाती है, तो यह शांति पहल के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।

तीन दिनों का युद्धविराम और उसके संकेत

क्रेमलिन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी दूतों की यात्रा के सम्मान में यूक्रेन की राजधानी कीव पर तीन दिनों तक हमले रोकने का आदेश दिया है। यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है क्योंकि पिछले चार सालों से दोनों देशों के बीच लगातार हमले जारी थे। दूसरी ओर, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि यूक्रेन इस अवधि के दौरान मॉस्को पर कोई हवाई हमला नहीं करेगा। हालांकि यह एक स्थायी युद्धविराम नहीं है, लेकिन दोनों राजधानियों के खिलाफ हमलों को कुछ समय के लिए रोकना एक बड़ा राजनीतिक संकेत है। इससे पहले कीव और अन्य यूक्रेनी शहर लगातार रूसी मिसाइलों और ड्रोनों का सामना कर रहे थे।

कीव यात्रा और भविष्य की चुनौतियां

विटकॉफ और कुशनर के मिशन का अगला सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव कीव है, जहां वे 6 सितंबर को पहुंचने वाले हैं। यह इन दोनों दूतों की यूक्रेन की पहली आधिकारिक यात्रा होगी और वहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से होगी, जहां वे यूक्रेन की शर्तों और उनकी सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा करेंगे। सबसे बड़ी चुनौती उन शर्तों को लेकर है जिन पर दोनों पक्ष सहमत हो सकें। रूस जहां नाटो के विस्तार को रोकने की मांग पर अड़ा है, वहीं यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से समझौता करने को तैयार नहीं है। इसके अलावा, युद्ध रुकने के बाद यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी कौन और कैसे देगा, यह एक ऐसा सवाल है जिस पर पिछली कई वार्ताएं विफल रही हैं।

ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा

यह कूटनीतिक प्रयास ट्रंप प्रशासन के लिए केवल एक वार्ता नहीं बल्कि उनकी विदेश नीति की एक बड़ी परीक्षा है और इससे पहले भी अमेरिकी मध्यस्थता से रूस-यूक्रेन के बीच बातचीत आगे बढ़ी थी, लेकिन ईरान में शुरू हुए संघर्ष के कारण उन कोशिशों को झटका लगा था। वर्तमान में ईरान के मामले में भी शांति स्थापित करना एक कठिन चुनौती बना हुआ है। ऐसे में रूस-यूक्रेन युद्ध में कोई भी सफलता ट्रंप के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी जीत होगी। यूरोप का रुख भी इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका के बदलते रुख के बीच यूरोपीय देश यूक्रेन की सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें 6 सितंबर की कीव यात्रा पर टिकी हैं।

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