US Tariffs on Iran: ट्रम्प का नया दांव: ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ, भारत पर कुल 75% का खतरा

US Tariffs on Iran - ट्रम्प का नया दांव: ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ, भारत पर कुल 75% का खतरा
| Updated on: 13-Jan-2026 09:09 AM IST
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों में संलग्न देशों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक नीति की घोषणा की है। ट्रम्प ने सोमवार रात ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी साझा की कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा, उस पर अमेरिका के साथ व्यापार करने पर 25% का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा, हालांकि व्हाइट हाउस की ओर से इस टैरिफ को लेकर कोई आधिकारिक दस्तावेज अभी तक जारी नहीं किया गया है और इस कदम का उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है, खासकर ऐसे समय में जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन उग्र रूप ले चुके हैं।

ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन और अमेरिकी प्रतिक्रिया

यह फैसला ऐसे नाजुक समय में आया है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार जारी हैं और हिंसक हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में 600 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबरें हैं, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। अमेरिका पहले ही ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है, और यह नया टैरिफ उन प्रतिबंधों को और मजबूत करने का एक प्रयास प्रतीत होता है। ट्रम्प ने रविवार देर रात यह भी कहा था कि ईरान सरकार प्रदर्शनों को रोकने के लिए 'रेड लाइन' पार कर रही है और अमेरिका 'कड़े विकल्पों' पर विचार कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर बातचीत का प्रस्ताव रखा। है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए अमेरिका को पहले कार्रवाई करनी पड़ सकती है।

प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर प्रभाव

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ व्यापार करने वाले। प्रमुख देशों में चीन, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत शामिल हैं। इन देशों के लिए नए टैरिफ का सीधा मतलब है। कि अमेरिका के साथ उनके व्यापारिक संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। यदि ये देश ईरान के साथ व्यापार जारी रखते हैं, तो उन्हें अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों को बेचने के लिए 25% अतिरिक्त लागत वहन करनी होगी, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी और यह एक ऐसा कदम है जो वैश्विक व्यापारिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है और इन देशों को अपनी व्यापारिक रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है।

भारत पर संभावित अतिरिक्त बोझ

भारत के लिए यह घोषणा विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि अमेरिका पहले ही भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा चुका है। इसमें 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और रूस से तेल आयात को लेकर 25% अतिरिक्त टैरिफ शामिल हैं। यदि ईरान से व्यापार को लेकर भारत पर यह नया 25% टैरिफ भी लागू होता है, तो भारत पर कुल टैरिफ 75% तक पहुंच जाएगा और इस उच्च टैरिफ के कारण भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका सीधा असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद को निपटाने के लिए आज ट्रेड डील पर बातचीत होनी है, जिसमें भारत यह उम्मीद कर रहा है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगाई गई अतिरिक्त 25% पेनल्टी को पूरी तरह खत्म किया जाए।

ईरान का वैश्विक व्यापार परिदृश्य

वर्ल्ड बैंक 2022 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ईरान ने सबसे अधिक व्यापार चीन, संयुक्त अरब अमीरात और भारत के साथ किया। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान एशिया और खाड़ी देशों के माध्यम से अपना व्यापार जारी रखे हुए है और 2022 में ईरान का कुल व्यापार लगभग 140 अरब डॉलर रहा, जिसमें ईरान का निर्यात 80. 9 अरब डॉलर और आयात लगभग 58. 7 अरब डॉलर था। ईरान के निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैस हैं। इसके अलावा, पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, तांबा, कृषि उत्पाद और खनिज भी निर्यात किए जाते हैं। ईरान मुख्य रूप से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, औद्योगिक कच्चा माल और दवाएं आयात करता है। यह व्यापारिक नेटवर्क अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

ईरान में सुप्रीम लीडर खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन

ईरान में सरकार और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन आज 17वें दिन भी जारी हैं और ये प्रदर्शन शुरू में आर्थिक संकट से उपजे थे, लेकिन अब वे सीधे सत्ता के खिलाफ एक बड़े आंदोलन में बदल गए हैं। नॉर्वे स्थित गैर-सरकारी संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने पुष्टि की है कि इन प्रदर्शनों के खिलाफ हुई हिंसक कार्रवाई में कम से कम 648 लोग मारे गए हैं, जिनमें नौ नाबालिग भी शामिल हैं। इसके अलावा, हजारों लोग घायल हुए हैं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इन प्रदर्शनों ने ईरान के भीतर और बाहर दोनों जगह चिंताएं बढ़ा दी हैं, और अमेरिकी टैरिफ की घोषणा इन आंतरिक उथल-पुथल के बीच ईरान पर बाहरी दबाव को और बढ़ाएगी।

अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंधों का लंबा इतिहास

अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाना 1979 से शुरू किया था और यह वही साल था जब ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के बाद 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया गया था। तब से लेकर अब तक, लगभग 45 वर्षों में, अमेरिका ने ईरान पर विभिन्न प्रकार के कई प्रतिबंध लगाए हैं और इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मानवाधिकार रिकॉर्ड और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों पर लगाम लगाना रहा है। ट्रम्प प्रशासन का यह नया टैरिफ ईरान पर दबाव बनाने की इसी लंबी श्रृंखला का एक और अध्याय है, जिसका वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। यह देखना होगा कि ईरान और उसके व्यापारिक साझेदार इस नई चुनौती का सामना कैसे करते हैं।

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