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ट्रंप की चेतावनी: ट्रेड डील में हेरफेर करने वाले देशों पर लगेगा अतिरिक्त टैरिफ

ट्रंप की चेतावनी: ट्रेड डील में हेरफेर करने वाले देशों पर लगेगा अतिरिक्त टैरिफ
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही व्यापारिक नीतियों को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पिछले टैरिफ आदेशों को अवैध ठहराए जाने के बावजूद, ट्रंप ने एक नई और अधिक व्यापक टैरिफ योजना की घोषणा की है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि जो देश मौजूदा व्यापार समझौतों के साथ 'गेम' खेलने या उनमें हेरफेर करने की कोशिश करेंगे, उन्हें अब और भी अधिक दंडात्मक टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार से 10% और 15% के नए वैश्विक टैरिफ लागू करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को पुनर्जीवित करना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और कानूनी पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस महत्वपूर्ण फैसले के बाद आया है जिसमें राष्ट्रपति की टैरिफ लगाने की शक्तियों पर अंकुश लगाया गया था। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि ट्रंप ने बड़े पैमाने पर टैरिफ लागू करते समय अपनी कार्यकारी शक्तियों का अतिक्रमण किया है। यह मामला मुख्य रूप से 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के इर्द-गिर्द घूमता है। कोर्ट के अनुसार, इस कानून का उपयोग जिस तरह से किया गया, वह विधायी सीमाओं का उल्लंघन था। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस न्यायिक बाधा को स्वीकार करने के बजाय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और नई दरों की घोषणा कर दी। उन्होंने लिखा कि जो देश दशकों से अमेरिका का अनुचित लाभ उठा रहे हैं, उन्हें अब इसकी कीमत चुकानी होगी।

नए टैरिफ की संरचना और कार्यान्वयन

ट्रंप प्रशासन द्वारा घोषित नई योजना के तहत, वैश्विक स्तर पर आयातित वस्तुओं पर 10% से 15% तक का टैरिफ लगाया जाएगा। यह शुल्क मंगलवार से प्रभावी होने जा रहे हैं। राष्ट्रपति का तर्क है कि ये टैरिफ न केवल राजस्व उत्पन्न करेंगे, बल्कि विदेशी कंपनियों को अमेरिका में कारखाने स्थापित करने के लिए भी मजबूर करेंगे और ट्रंप ने विशेष रूप से उन देशों को चेतावनी दी है जो व्यापार सौदों की शर्तों का उल्लंघन करते हैं या अपनी मुद्रा के मूल्य में हेरफेर करते हैं। उनके अनुसार, 'खरीदार सावधान रहें' (Buyer Beware) की नीति अब उन देशों पर लागू होगी जो अमेरिका के साथ व्यापारिक असंतुलन बनाए हुए हैं। प्रशासन का लक्ष्य इस कदम के माध्यम से व्यापार घाटे को ऐतिहासिक रूप से कम करना है।

प्रशासनिक रणनीति और कानूनी विकल्प

सुप्रीम कोर्ट के प्रतिकूल फैसले के बावजूद, ट्रंप प्रशासन पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमीसन ग्रीर ने संकेत दिया है कि प्रशासन नए कानूनी प्रावधानों और वैकल्पिक विनियामक ढांचे का उपयोग कर रहा है ताकि टैरिफ को दोबारा लागू किया जा सके और अधिकारियों के अनुसार, वे ऐसे कानूनी रास्तों की तलाश कर रहे हैं जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा उठाई गई आपत्तियों को दूर कर सकें और राष्ट्रपति को व्यापारिक सुरक्षा के लिए आवश्यक अधिकार प्रदान करें। ग्रीर ने कहा कि प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिकी श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है और इसके लिए वे हर संभव कानूनी और प्रशासनिक उपाय अपनाएंगे।

आर्थिक प्रभाव और फेडरल रिजर्व की रिपोर्ट

टैरिफ नीतियों के आर्थिक परिणामों को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है। फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ न्यूयॉर्क की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मेक्सिको, चीन, कनाडा और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख व्यापारिक भागीदारों पर लगाए गए पिछले टैरिफ की लगभग 90% लागत अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं द्वारा वहन की गई थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि आयात शुल्क बढ़ने से कच्चे माल की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर अंतिम उत्पादों की कीमतों पर पड़ता है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इन दावों को खारिज करता रहा है। उनका कहना है कि टैरिफ से होने वाली आय का उपयोग करों को कम करने और घरेलू बुनियादी ढांचे में निवेश करने के लिए किया जा सकता है।

वैश्विक व्यापार संबंधों पर प्रभाव

ट्रंप की इस नई घोषणा ने वैश्विक व्यापारिक समुदायों में हलचल पैदा कर दी है। चीन, कनाडा और मेक्सिको जैसे देशों ने पहले ही इन कदमों पर चिंता जताई है। व्यापारिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के एकतरफा टैरिफ से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है और जवाबी कार्रवाई के रूप में अन्य देश भी अमेरिकी निर्यात पर शुल्क लगा सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत व्यापारिक समझौतों की समीक्षा की जाएगी और किसी भी प्रकार की विसंगति पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन (WTO) इस नई टैरिफ व्यवस्था पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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