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अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी करेगा पाकिस्तान, डोनाल्ड ट्रंप ने दिए संकेत

अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी करेगा पाकिस्तान, डोनाल्ड ट्रंप ने दिए संकेत
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान एक संभावित मध्यस्थ और वार्ता का केंद्र बन सकता है और यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' अकाउंट पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा दिए गए निमंत्रण का स्क्रीनशॉट साझा किया। इस कदम को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

इस कूटनीतिक पहल की शुरुआत मंगलवार शाम को हुई जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर घोषणा की कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक बातचीत की मेजबानी करने के लिए तैयार है और अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप द्वारा इस निमंत्रण को तत्काल साझा करना यह दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन अब सैन्य विकल्पों के बजाय बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता दे रहा है। इस्लामाबाद में होने वाली इस संभावित बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर निमंत्रण और ट्रंप की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच निर्णायक बातचीत की सुविधा प्रदान करने को अपना सम्मान मानता है। ट्रंप ने इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर उसे एक घंटे के भीतर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर दिया। इससे पहले ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे थे कि अमेरिका इस संघर्ष में बढ़त बना चुका है, लेकिन अब उनका रुख कूटनीतिक समाधान की ओर झुकता दिख रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने शुरुआत में इन दावों को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन बाद में सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से स्वीकार किया कि उन्हें मित्र देशों से बातचीत के संदेश प्राप्त हुए हैं।

वार्ता के संभावित प्रतिनिधि और स्थान

अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर इस सप्ताह ईरानी प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस दल का हिस्सा हो सकते हैं और ईरान की ओर से प्रतिनिधित्व को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ तेहरान का पक्ष रखने के लिए इस्लामाबाद आ सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने की संभावना है।

ईरान के साथ पाकिस्तान का कूटनीतिक संपर्क

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से इस विषय पर चर्चा की है। इसके साथ ही पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ निरंतर संपर्क में हैं। कूटनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने इस प्रक्रिया की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ओमान में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत के अनुसार, जनरल मुनीर ने लगभग दो सप्ताह पहले विटकॉफ और कुशनर के साथ प्रारंभिक बातचीत की थी। हालांकि, पाकिस्तानी सेना की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

वैश्विक मध्यस्थता प्रयास और अन्य देशों की भूमिका

पाकिस्तान के अलावा सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे देश भी इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए सक्रिय रूप से मध्यस्थता कर रहे हैं। कतर ने भी मंगलवार को स्पष्ट किया कि वह युद्ध को समाप्त करने के लिए किए जा रहे सभी कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता है। इसी बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो फ्रांस में जी7 देशों के अपने समकक्षों के साथ बैठक करने वाले हैं, जहां ईरान का मुद्दा चर्चा का मुख्य केंद्र होगा। यह दौरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान के साथ संबंधों को लेकर एक साझा रणनीति बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

भारत का रुख और प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत

इस वैश्विक घटनाक्रम के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उन्होंने ट्रंप के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और शांति बहाली के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने हमेशा तनाव कम करने और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने का समर्थन किया है। हालांकि, भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिली हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान का मध्यस्थ के रूप में उभरना क्षेत्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

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