अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के विरुद्ध अपने रुख को और अधिक कड़ा करते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त चेतावनी जारी की है। मंगलवार को चीन की अपनी आधिकारिक यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले, पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान की वर्तमान सैन्य स्थिति पर कई गंभीर और बड़े दावे किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान की सैन्य शक्ति अब लगभग पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और वह अब अमेरिका के सामने किसी भी प्रकार की चुनौती पेश करने की स्थिति में नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अमेरिका इस संघर्ष को हर हाल में जीतकर रहेगा, चाहे वह रास्ता पूरी तरह से शांतिपूर्ण हो या फिर किसी अन्य प्रकार की सैन्य कार्रवाई का सहारा लेना पड़े। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है।
ईरान की सैन्य क्षमता और समुद्री नाकेबंदी पर ट्रंप का दावा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की सैन्य मशीनरी के विभिन्न अंगों का विवरण देते हुए दावा किया कि उनकी नौसेना और वायुसेना अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरान की 'वार मशीन' का हर एक हिस्सा अब पूरी तरह से तबाह हो चुका है और वे सैन्य रूप से हार चुके हैं। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिका द्वारा की गई समुद्री नाकेबंदी का उल्लेख किया। ट्रंप ने इस नाकेबंदी को एक बड़ी रणनीतिक सफलता करार देते हुए कहा कि यह 100 प्रतिशत सफल रही है और बेहद प्रभावी साबित हुई है। उनके मुताबिक, इस नाकेबंदी ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को पंगु बना दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब सीमित विकल्प हैं; वे या तो सही फैसला करेंगे या फिर अमेरिका अपना काम पूरा कर देगा।
चीन की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ट्रंप का रुख
जब पत्रकारों ने राष्ट्रपति ट्रंप से यह सवाल पूछा कि क्या वे ईरान के मुद्दे पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से किसी प्रकार की भूमिका या सहायता की उम्मीद कर रहे हैं, तो ट्रंप ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ईरान के मामले में अमेरिका को किसी की भी मदद की आवश्यकता है। ट्रंप ने आत्मविश्वास के साथ दोहराया कि अमेरिका अपने दम पर किसी न किसी तरीके से इस स्थिति में विजय प्राप्त करेगा और यह बयान दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के मुद्दे को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में रखना चाहता है और इसमें किसी तीसरे पक्ष, विशेषकर चीन के हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस नहीं करता है।
NATO के प्रति नाराजगी और मार्क रुट का बयान
ईरान के मुद्दे के साथ-साथ, राष्ट्रपति ट्रंप ने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के प्रति भी अपनी गहरी नाराजगी और निराशा व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अमेरिका को सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब NATO उसके साथ खड़ा नहीं हुआ। ट्रंप ने कहा कि NATO का व्यवहार उनके लिए बेहद निराशाजनक रहा है और उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि अमेरिका को वास्तव में NATO की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि भविष्य में कभी जरूरत पड़ती भी है, तो उन्हें संदेह है कि NATO वहां मौजूद होगा। दूसरी ओर, मार्क रुट ने इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच NATO के भविष्य को लेकर एक अलग और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। रुट ने स्वीकार किया कि ईरान से जुड़ा संकट वर्तमान में वैश्विक सुरक्षा के केंद्र में है, लेकिन उन्होंने संगठन की मजबूती और उसके भविष्य को लेकर अपनी आशावादिता बरकरार रखी।
ट्रंप के इन बयानों ने यह साफ कर दिया है कि वे ईरान के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की सैन्य शक्ति अब नगण्य है और अमेरिका अपनी रणनीति में पूरी तरह सफल रहा है। ट्रंप ने अपनी बात को समाप्त करते हुए फिर से दोहराया कि ईरान को अब सही निर्णय लेना होगा क्योंकि अमेरिका अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वह इस कार्य को पूरा करके ही दम लेगा।