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: रूस की 'सरमत' मिसाइल का सफल परीक्षण: 35,000 किमी रेंज का पुतिन का बड़ा दावा

- रूस की 'सरमत' मिसाइल का सफल परीक्षण: 35,000 किमी रेंज का पुतिन का बड़ा दावा
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में एक अत्यंत महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसने वैश्विक मिसाइल शक्ति के संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रूस ने अपनी नई और शक्तिशाली परमाणु क्षमता वाली ‘सरमत’ मिसाइल का सफल परीक्षण संपन्न कर लिया है। इस मिसाइल को लेकर रूसी प्रशासन की योजना काफी स्पष्ट है और इसे इस साल के अंत तक आधिकारिक तौर पर युद्धक ड्यूटी (Combat Duty) पर तैनात करने की तैयारी की जा रही है। राष्ट्रपति पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सामरिक सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है। पुतिन ने दावा किया है कि इस मिसाइल की मारक क्षमता को भविष्य में 35,000 किलोमीटर से भी अधिक तक बढ़ाया जा सकता है। यदि यह दावा हकीकत में बदलता है, तो यह मिसाइल दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली प्रणाली बन जाएगी, जो किसी भी महाद्वीप के किसी भी कोने को निशाना बनाने में सक्षम होगी। वर्तमान में इस मिसाइल की आधिकारिक रेंज 18,000 किलोमीटर बताई गई है, जो कि पहले से ही दुनिया में सबसे अधिक है।

मिसाइल तकनीक और मारक क्षमता का विस्तार

व्लादिमीर पुतिन ने इस परीक्षण की सफलता के बाद अन्य महत्वपूर्ण सैन्य परियोजनाओं की प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने जानकारी दी कि सरमत मिसाइल सिस्टम के सफल परीक्षण के बाद अब पोसाइडन (Poseidon) और बुरवेस्टनिक (Burevestnik) सिस्टम पर काम अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ने ओरेश्निक (Oreshnik) मिसाइल प्रणाली को परमाणु हथियारों यानी न्यूक्लियर वॉरहेड्स से लैस करने की संभावनाओं का भी विशेष रूप से ज़िक्र किया। रूस का यह कदम उसकी सैन्य आधुनिकीकरण की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसे पुतिन ने पहली बार 2018 में दुनिया के सामने रखा था। रूस का तर्क है कि अमेरिका के एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM) संधि से हटने के बाद, उसे अपनी रणनीतिक सुरक्षा और संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कठोर और प्रभावी कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह मिसाइल परीक्षण उसी सुरक्षा रणनीति की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है और यह वैश्विक मिसाइल संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

रणनीतिक मिसाइल बलों की तैनाती और तैयारी

रूस के स्ट्रेटेजिक मिसाइल फोर्सेज के कमांडर काराकायेव (Karakayev) ने इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। कमांडर काराकायेव की रिपोर्ट के अनुसार, सरमत के सफल लॉन्च के बाद अब इस साल के आखिर तक इसकी पहली रेजिमेंट को तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है। सरमत सिस्टम को रूस की पिछली मिसाइल प्रणाली, जिसे 'वोयेवोडा' (Voyevoda) मिसाइल सिस्टम के नाम से जाना जाता है, के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है और तकनीकी रूप से सरमत कई मायनों में वोयेवोडा से कहीं अधिक उन्नत और घातक है। इसमें मारक क्षमता (Range), थ्रो-वेट (Payload capacity) और सबसे महत्वपूर्ण रूप से दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदने की क्षमता में भारी सुधार किया गया है। यह मिसाइल आधुनिक रक्षा प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम बताई जा रही है, जो इसे रूस के परमाणु त्रिकोण का एक अनिवार्य हिस्सा बनाती है।

पश्चिमी विश्लेषकों का दृष्टिकोण और चुनौतियां

हालांकि, रूस के इन दावों को लेकर पश्चिमी सुरक्षा विश्लेषकों और विशेषज्ञों के बीच संदेह की स्थिति बनी हुई है। कई पश्चिमी विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति पुतिन रूस की नई पीढ़ी के परमाणु हथियारों की क्षमताओं के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर दावे कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सब उस आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है जिसकी घोषणा 2018 में की गई थी और इसका उद्देश्य मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करना हो सकता है। इसके अलावा, सरमत मिसाइल के विकास का सफर पूरी तरह बाधा रहित नहीं रहा है। पश्चिमी विशेषज्ञों ने अतीत में हुई असफलताओं की ओर इशारा करते हुए बताया कि सितंबर 2024 में हुए एक परीक्षण के दौरान लॉन्च साइलो (Launch Silo) में एक बहुत गहरा गड्ढा बन गया था, जो परीक्षण की विफलता का संकेत था। इन चुनौतियों के बावजूद, रूस अपनी इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समय पर पूरा करने और इसे अपनी रक्षा पंक्ति में शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहा है।

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