भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए पूर्व जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत रद्द किए जाने के ठीक अगले दिन हुई है। सीबीआई की टीम भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके निवास पर पहुंची और लगभग 5 घंटे की सघन पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया। यह मामला पिछले 15 दिनों से कानूनी दांव-पेच और रसूख की लड़ाई के कारण चर्चा में बना हुआ था।
मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
पूर्व मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा, जिनकी उम्र 33 वर्ष थी, की शादी समर्थ सिंह के साथ महज 5 महीने पहले हुई थी। 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनके ससुराल में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी के रूप में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह का नाम सामने आया और गिरिबाला सिंह, जो एक सेवानिवृत्त जज हैं, को घटना के अगले ही दिन यानी 13 मई 2026 को जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी। हालांकि, सीबीआई की जांच और हाई कोर्ट के कड़े रुख के कारण महज 15 दिनों के भीतर कानूनी स्थिति पूरी तरह बदल गई और 28 मई 2026 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
सीबीआई जांच और पोस्टमार्टम की नई रिपोर्ट
ट्विशा की मौत के बाद स्थानीय पुलिस की एसआईटी जांच पर लगातार सवाल उठ रहे थे। मृतका के परिजनों का आरोप था कि आरोपियों के रसूखदार होने के कारण जांच को प्रभावित किया जा रहा है। इसके बाद जबलपुर हाई कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया और दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की एक विशेष टीम से ट्विशा का दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया और इस रिपोर्ट ने मामले की दिशा ही बदल दी। सीबीआई ने अदालत में खुलासा किया कि ट्विशा के गले पर फांसी के फंदे के अलावा 6 अलग-अलग संदिग्ध निशान पाए गए थे। इसके साथ ही उनकी कलाई और कोहनी पर भी चोट के गहरे निशान मिले थे। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, ये चोटें शव को फंदे से उतारते समय नहीं लग सकती थीं। इन चोटों के बारे में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ के पास कोई ठोस जवाब नहीं था।
वॉट्सऐप चैट से हुआ बड़ा खुलासा
जांच के दौरान सीबीआई ने ट्विशा के मोबाइल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया, जिसमें चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं। सीबीआई को मिले वॉट्सऐप चैट से यह पता चला कि जब ट्विशा गर्भवती हुई, तो उनकी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ ने उनके चरित्र पर सवाल उठाए। आरोपियों ने बच्चे को किसी और का बताते हुए ट्विशा पर जबरन गर्भपात कराने का दबाव बनाया। सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने अपनी बहू को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उसे बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
सबूतों से छेड़छाड़ और रसूख का इस्तेमाल
कानून की गहरी समझ रखने के बावजूद गिरिबाला सिंह पर जांच को भटकाने और सबूतों को प्रभावित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया कि मौत के अगले ही दिन अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए 46 अलग-अलग लोगों को फोन किए गए थे। इसके अलावा, गिरिबाला सिंह पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर घटना से जुड़ी एक चुनिंदा सीसीटीवी वीडियो क्लिप लीक की ताकि जनता और जांच एजेंसी को गुमराह किया जा सके और सीबीआई ने यह भी पाया कि उन्होंने एक ब्यूटी पार्लर को फोन करके वहां के सीसीटीवी फुटेज मंगवाए थे, जिसे सबूतों के साथ छेड़छाड़ का प्रयास माना गया है।
हाई कोर्ट का सख्त आदेश और गिरफ्तारी
25 मई 2026 को जब सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद सीबीआई ने इस केस की कमान पूरी तरह संभाली, तो जांच में तेजी आई। 27 मई 2026 को जबलपुर हाई कोर्ट के वेकेशन जज देवनारायण मिश्रा ने सीबीआई द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों और दलीलों को स्वीकार करते हुए गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने अपने 17 पन्नों के विस्तृत आदेश में स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने लाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ करना अनिवार्य है। इसी आदेश के पालन में 28 मई 2026 को सीबीआई ने कटारा हिल्स स्थित आवास से उन्हें गिरफ्तार किया।
दर्ज की गई धाराएं और कानूनी प्रावधान
भोपाल के कटारा हिल्स थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, गिरिबाला सिंह पर शादी के दौरान और विदाई के वक्त अड़कर 2 लाख रुपये नकद मांगने का भी आरोप है। गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2) के तहत दहेज मृत्यु का मामला दर्ज है, जिसमें दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 वर्ष की कैद और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। इसके अलावा, धारा 85 के तहत विवाहित महिला के साथ क्रूरता और धारा 3(5) के तहत समान आशय के साथ अपराध करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में दहेज प्रतिषेध अधिनियम की प्रासंगिक धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
बचाव पक्ष की दलीलें
गिरिबाला सिंह के बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि 12 मई 2026 को ट्विशा ने आत्महत्या की थी। उन्होंने कहा कि घटना के तुरंत बाद गिरिबाला सिंह स्वयं ट्विशा को लेकर एम्स अस्पताल गई थीं और उनके परिवार को सूचित किया था। बचाव पक्ष का कहना है कि पुलिस ने पहले ही दिन फंदा, मोबाइल, डीवीआर और अन्य सामग्री जब्त कर ली थी, इसलिए सबूत छिपाने का आरोप निराधार है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वॉट्सऐप चैट में मुख्य आरोप पति समर्थ पर हैं और गिरिबाला सिंह के खिलाफ सीधे तौर पर प्रताड़ना के सबूत नहीं हैं। बचाव पक्ष ने कुछ फोटो और पत्र पेश कर यह साबित करने की कोशिश की कि सास-बहू के संबंध सामान्य थे।