रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी जल्द ही जियो के बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) को लेकर एक बड़ा अपडेट दे सकते हैं। 19 जून को होने वाली कंपनी की सालाना आम बैठक (AGM) में जियो के आईपीओ पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा किए जाने की पूरी संभावना है। बाजार के विशेषज्ञ और निवेशक इस बैठक का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस आईपीओ के जरिए करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 33 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है।
एजीएम का कार्यक्रम और शेयरधारकों के लिए जानकारी
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में आधिकारिक तौर पर बताया है कि कंपनी की सालाना आम बैठक 19 जून को दोपहर 2 बजे आयोजित की जाएगी। सुरक्षा और व्यापक पहुंच को ध्यान में रखते हुए यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों के जरिए होगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एजीएम में वोटिंग के लिए पात्र शेयरधारकों की पहचान करने हेतु 12 जून की कट-ऑफ डेट तय की गई है। रिलायंस की एजीएम हमेशा से ही बड़े निवेश और नई योजनाओं की घोषणा का केंद्र रही है, इसलिए इस बार सबकी नजरें जियो प्लेटफॉर्म्स पर टिकी हैं।
आईपीओ स्ट्रक्चर में बदलाव और निवेशकों की सुरक्षा
जियो के आईपीओ को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी यह सामने आ रही है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज इसके लिस्टिंग स्ट्रक्चर में बदलाव पर विचार कर रही है। पहले ऐसी खबरें थीं कि कंपनी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए आईपीओ लाएगी, लेकिन अब इसे पूरी तरह से फ्रेश इश्यू बनाने की योजना है। इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करना बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश अंबानी की प्राथमिकता हमेशा से यह रही है कि आईपीओ की कीमत बहुत ऊंची न रखी जाए ताकि लिस्टिंग के दिन रिटेल निवेशकों को किसी भी तरह का नुकसान न हो। फ्रेश इश्यू होने की स्थिति में आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि सीधे कंपनी के पास जाएगी।
पूंजी का उपयोग और कर्ज भुगतान की योजना
आईपीओ के जरिए जुटाई जाने वाली भारी-भरकम राशि का उपयोग कंपनी अपने भविष्य के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए करेगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जुटाए गए फंड में से करीब 25 हजार करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी का कर्ज चुकाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, बाकी बची हुई रकम को कंपनी की अन्य परिचालन जरूरतों और विस्तार योजनाओं में निवेश किया जाएगा। यह कदम रिलायंस के कर्ज मुक्त होने और अपनी डिजिटल शाखा को और अधिक मजबूत बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
जियो का बढ़ता कारोबार और भविष्य की राह
रिलायंस इंडस्ट्रीज की वित्त वर्ष 2026 (FY26) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स ने भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत किया है। कंपनी अब केवल एक टेलीकॉम ऑपरेटर तक सीमित नहीं रही है, बल्कि एक वैश्विक टेक्नोलॉजी लीडर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। 5G सेवाओं के विस्तार, प्रति ग्राहक औसत कमाई (ARPU) में वृद्धि और ब्रॉडबैंड सेवाओं की बढ़ती मांग ने जियो के कारोबार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। कंपनी अब कनेक्टिविटी के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड और अन्य डिजिटल सेवाओं पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।
शानदार तिमाही नतीजे और परिचालन आंकड़े
वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। कंपनी की ऑपरेटिंग आय 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 44 हजार 928 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है। इसी तरह, कंपनी का मुनाफा भी 13 प्रतिशत बढ़कर 7 हजार 935 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है। जियो का एआरपीयू (ARPU) यानी प्रति ग्राहक औसत कमाई बढ़कर 214 रुपये हो गई है। डेटा खपत के मामले में भी जियो ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जहां प्रति व्यक्ति डेटा इस्तेमाल 42 पॉइंट 3 जीबी प्रति माह रहा है। कुल डेटा ट्रैफिक में सालाना आधार पर करीब 35 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जो कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति को दर्शाती है।