संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राजनीतिक गलियारों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाते हुए अपने सबसे बड़े बेटे और क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान को 260 अरब डॉलर की विशाल संपत्ति हस्तांतरित कर दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और शाही परिवार के भीतर भविष्य के नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इस भारी-भरकम संपत्ति के हस्तांतरण को सत्ता के सुचारू हस्तांतरण की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। नाहयान परिवार, जो दुनिया के सबसे धनी परिवारों में से एक है, की कुल संपत्ति लगभग 335 अरब डॉलर आंकी गई है। इसमें से 260 अरब डॉलर का नियंत्रण अब सीधे तौर पर क्राउन प्रिंस खालिद के पास आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय न केवल वित्तीय है, बल्कि इसके गहरे राजनीतिक निहितार्थ भी हैं।
शेख खालिद बिन मोहम्मद का राजनीतिक उदय और पृष्ठभूमि
शेख खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान का जन्म 1982 में हुआ था और वे राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के सबसे बड़े पुत्र हैं। उनकी शिक्षा अबू धाबी में हुई, जिसके बाद उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के वाल्श स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस से मास्टर डिग्री प्राप्त की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि राजनीति विज्ञान में है, जो उन्हें शासन व्यवस्था की बारीकियों को समझने में मदद करती है।
खालिद का राजनीतिक सफर 2016 में शुरू हुआ जब उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद, मार्च 2023 में उन्हें आधिकारिक तौर पर अबू धाबी का क्राउन प्रिंस घोषित किया गया। सुरक्षा और प्रशासन में उनके अनुभव को देखते हुए, उन्हें भविष्य के सर्वोच्च नेता के रूप में तैयार किया जा रहा है। संपत्ति का यह नया हस्तांतरण उनकी स्थिति को और अधिक मजबूत बनाता है।
नाहयान परिवार की संपत्ति और तेल अर्थव्यवस्था का प्रभाव
ब्लूमबर्ग की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, नाहयान परिवार दुनिया के सबसे अमीर परिवारों की सूची में दूसरे स्थान पर काबिज है। इस परिवार की 335 अरब डॉलर की संपत्ति का मुख्य स्रोत तेल का विशाल भंडार और वैश्विक निवेश है। अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) और मुबाडाला जैसे संप्रभु धन कोषों के माध्यम से यह परिवार वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ रखता है।
260 अरब डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन अब शेख खालिद के हाथों में होने का मतलब है कि यूएई की आर्थिक नीतियों और भविष्य के निवेशों पर उनका सीधा प्रभाव होगा। यह कदम यूएई की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर अन्य क्षेत्रों में विविधता लाने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें क्राउन प्रिंस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
आंतरिक सत्ता संघर्ष और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक चुनौतियां
रिपोर्ट्स के अनुसार, यूएई के भीतर सत्ता के समीकरणों में कुछ जटिलताएं भी देखी जा रही हैं। राष्ट्रपति के छोटे भाई और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शेख तहनून बिन जायद, जिन्हें 'स्पाई शेख' के नाम से जाना जाता है, एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं। तहनून के संबंध सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राजनीतिक हलकों में काफी गहरे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद द्वारा अपने बेटे को इतनी बड़ी संपत्ति सौंपने का एक उद्देश्य भविष्य में किसी भी संभावित आंतरिक चुनौती को कम करना हो सकता है। सऊदी अरब के साथ यूएई के प्रतिस्पर्धात्मक संबंधों और क्षेत्रीय नेतृत्व की होड़ के बीच, यह कदम नाहयान परिवार के भीतर उत्तराधिकार की रेखा को स्पष्ट और निर्विवाद बनाने का प्रयास है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह वित्तीय सशक्तिकरण शेख खालिद को प्रशासनिक और कूटनीतिक स्तर पर अधिक स्वायत्तता प्रदान करेगा। आने वाले समय में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संपत्ति हस्तांतरण यूएई की आंतरिक स्थिरता और उसके पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को किस प्रकार प्रभावित करता है। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि अबू धाबी में नेतृत्व की अगली पीढ़ी को पूरी तरह से स्थापित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।