अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के एक हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और धार्मिक बहस छेड़ दी है। रिपोर्टों के अनुसार, हेगसेथ ने ईरान के साथ चल रहे तनाव को धर्म की रक्षा के प्रयासों से जोड़ते हुए इसे 'यीशु के लिए लड़ा जाने वाला युद्ध' करार दिया है और यह बयान उन्होंने अमेरिकी धार्मिक नेताओं के साथ आयोजित एक बैठक के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि दुष्ट तत्वों के खिलाफ की जा रही हिंसा में दया दिखाने की आवश्यकता नहीं है।
मीडिया आउटलेट 'द हिल' की रिपोर्ट के अनुसार, हेगसेथ ने अब तक ऐसी कम से कम 10 बैठकें की हैं, जिन्हें आधिकारिक तौर पर प्रार्थना सभाओं का नाम दिया गया है। इनमें से कुछ बैठकें सार्वजनिक थीं, जबकि कुछ को गोपनीय तरीके से आयोजित किया गया था। वाशिंगटन पोस्ट ने इन सभाओं में उपस्थित धार्मिक नेताओं के हवाले से बताया है कि रक्षा मंत्री ईरान के साथ संघर्ष को एक धार्मिक युद्ध के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं।
पेंटागन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और स्पष्टीकरण
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इन आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पेंटागन के प्रवक्ता के अनुसार, मंत्रालय के भीतर आयोजित होने वाली प्रार्थना सेवाएं पूरी तरह से स्वैच्छिक और वैकल्पिक हैं। अधिकारियों का कहना है कि ये सभाएं किसी भी मौजूदा कानून या सैन्य प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं करती हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत धार्मिक विश्वासों को आधिकारिक सैन्य नीति के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए, और ये सभाएं केवल आध्यात्मिक समर्थन के उद्देश्य से आयोजित की गई थीं।
विशेषज्ञों और पूर्व सैनिकों द्वारा तीखी आलोचना
जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के बर्कले सेंटर फॉर रिलीजन, पीस एंड वर्ल्ड अफेयर्स के विजिटिंग स्कॉलर मैथ्यू टेलर ने इस घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। टेलर के अनुसार, पेंटागन के इतिहास में यह पहली बार देखा जा रहा है कि किसी युद्ध को 'धर्मयुद्ध' की दिशा में धकेलने का प्रयास किया गया हो। इसके अतिरिक्त, अमेरिका के कई पूर्व सैनिकों ने भी इस रुख का विरोध किया है। पूर्व सैनिकों का तर्क है कि इस तरह की बयानबाजी अमेरिकी सैनिकों को एक विशिष्ट धार्मिक पहचान (ईसाई सैनिक) में सीमित करने की कोशिश है, जो सेना की समावेशी प्रकृति के विपरीत है।
अमेरिकी सेना की धार्मिक जनसांख्यिकी के आंकड़े
अमेरिकी सेना के भीतर धार्मिक विविधता को लेकर वर्ष 2019 में एसोसिएटेड प्रेस ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना के लगभग 70% सैनिक स्वयं को ईसाई के रूप में वर्गीकृत करते हैं। वहीं, लगभग एक चौथाई सैनिकों को 'अन्य', 'अवर्गीकृत' या 'अज्ञात' धार्मिक श्रेणियों में सूचीबद्ध किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा नेतृत्व द्वारा धार्मिक बयानबाजी करने से सेना के भीतर मौजूद विभिन्न समुदायों के बीच सामंजस्य प्रभावित हो सकता है।
राजनीतिक दबाव और हेगसेथ की वर्तमान स्थिति
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका की भूमिका को लेकर घरेलू स्तर पर दबाव बढ़ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इस युद्ध की शुरुआत के लिए हेगसेथ की रणनीतियों को जिम्मेदार ठहराया था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हेगसेथ पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का भारी दबाव है, क्योंकि उनके बयानों ने न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी असहज स्थिति पैदा कर दी है। वर्तमान में उनकी कार्यशैली और बयानों की गहन समीक्षा की जा रही है।