संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रशासन में इस समय बड़े बदलावों और कड़े फैसलों का दौर जारी है। ट्रंप प्रशासन ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम को नए सिरे से संगठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (डिप्टी एनएसए) को उनके पद से हटा दिया गया है और यह कदम प्रशासन के भीतर चल रहे उस बड़े फेरबदल का हिस्सा है, जिसमें पिछले एक महीने के दौरान कई शीर्ष अधिकारियों की विदाई हुई है। माइक निडहम को अमेरिका का नया डिप्टी एनएसए नियुक्त किया गया है, जो अब देश की सुरक्षा नीतियों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
रणनीतिक बदलाव और माइक निडहम की भूमिका
माइक निडहम की नियुक्ति को अमेरिकी विदेश नीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। निडहम को विदेश मंत्री मार्को रुबियो का अत्यंत करीबी सहयोगी माना जाता है। गौरतलब है कि पिछले साल जब माइक वाल्ट्ज को सुरक्षा सलाहकार के पद से हटाया गया था, तब मार्को रुबियो को ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, निडहम की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका वेनेजुएला, क्यूबा और ईरान जैसे देशों के साथ जटिल संघर्षों में उलझा हुआ है। निडहम इन संवेदनशील सुरक्षा मामलों पर सीधे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सलाह देंगे, जिससे व्हाइट हाउस और विदेश मंत्रालय के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद की जा रही है।
रॉबर्ट गेबियल जूनियर का इस्तीफा और विफलता के सवाल
इस प्रशासनिक बदलाव की शुरुआत रॉबर्ट गेबियल जूनियर के इस्तीफे से हुई और गेबियल ने 21 मई को आधिकारिक तौर पर व्हाइट हाउस के उप सुरक्षा सलाहकार के पद से इस्तीफा दे दिया था। एक समय में उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप के सबसे भरोसेमंद और प्रभावी अधिकारियों में गिना जाता था। हालांकि, हाल के महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी सुरक्षा नीतियों को मिली चुनौतियों और रणनीतिक विफलताओं के कारण उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे और विशेष रूप से ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिकी हितों की रक्षा करने में विफलता ने उनके नेतृत्व पर दबाव बढ़ा दिया था। इसी पृष्ठभूमि में गेबियल ने पद छोड़ने का फैसला किया, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत निडहम को इस जिम्मेदारी के लिए चुना।
एक महीने में 4 शीर्ष अधिकारियों की विदाई
अमेरिका के सुरक्षा और सैन्य ढांचे में पिछले एक महीने के दौरान अभूतपूर्व बदलाव देखे गए हैं। 26 अप्रैल से लेकर 26 मई तक की अवधि में कुल 4 बड़े अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है। इस सूची में गेबियल के अलावा खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड का नाम भी शामिल है, जिनसे प्रशासन ने इस्तीफा ले लिया था। गबार्ड ने ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप प्रशासन की रणनीतियों की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के सचिव जॉन फेलन और अमेरिकी सेना के मुख्य स्टाफ रेंडी जॉर्ज को भी उनके पदों से मुक्त कर दिया गया है। ये सभी अधिकारी किसी न किसी स्तर पर ईरान के साथ चल रहे युद्ध की योजना और उसके क्रियान्वयन से जुड़े हुए थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन ईरान नीति में पूरी तरह से नई टीम के साथ आगे बढ़ना चाहता है।
ईरान युद्ध का घटनाक्रम और समझौते की ओर कदम
इन सभी प्रशासनिक बदलावों के केंद्र में ईरान के साथ चल रहा युद्ध है, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के साथ हुई थी। उस समय अमेरिकी नेतृत्व को यह उम्मीद थी कि सैन्य कार्रवाई के माध्यम से ईरान में सत्ता परिवर्तन या तख्तापलट संभव होगा और हालांकि, जमीनी हकीकत इसके विपरीत रही और अमेरिकी मिशन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल नहीं हो सका। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है और अमेरिका ने इस जलमार्ग को फिर से खुलवाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। अंततः, रणनीतिक गतिरोध को देखते हुए अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समझौते का रास्ता चुना है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच एक समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, जो इस संघर्ष के समाधान की दिशा में एक नया मोड़ है।