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फेड के नए बॉस केविन वॉर्श ने ब्याज दरों पर लिया बड़ा फैसला, बाजार में मची हलचल

फेड के नए बॉस केविन वॉर्श ने ब्याज दरों पर लिया बड़ा फैसला, बाजार में मची हलचल
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए प्रमुख केविन वॉर्श ने अपनी पहली नीतिगत बैठक में दुनिया को चौंकाते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के बीच यह फैसला निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह लगातार चौथी बार है जब अमेरिकी सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों को जस का तस रखने का ऐलान किया है। हालांकि, इस फैसले के साथ ही फेड ने यह संकेत भी दिए हैं कि इस साल के अंत तक ब्याज दरों में एक बार इजाफा देखने को मिल सकता है, जबकि पहले मार्च के महीने में कटौती का अनुमान लगाया जा रहा था।

फेडरल ओपन मार्केट कमिटी का सर्वसम्मत फैसला

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने जून की पॉलिसी मीटिंग में अपनी बेंचमार्क फेडरल फंड्स रेट को 3 दशमलव 50 प्रतिशत से 3 दशमलव 75 प्रतिशत की टारगेट रेंज में ही बनाए रखने का फैसला किया है। केविन वॉर्श की अध्यक्षता में हुई इस पहली फेडरल ओपन मार्केट कमिटी (FOMC) की बैठक पर दुनिया भर के अर्थशास्त्रियों की नजर थी और कमिटी के सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि फिलहाल उधार लेने की लागत को स्थिर रखा जाए। यह स्थिति 2026 की शुरुआत से ही चली आ रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि फेडरल रिजर्व किसी भी बड़े बदलाव से पहले और अधिक आर्थिक आंकड़ों का इंतजार करना चाहता है। इससे पहले 2025 में लगातार तीन बार दरों में कटौती की गई थी, जिसके बाद अब सावधानी भरा रुख अपनाया गया है।

ब्याज दरों को स्थिर रखने के मुख्य कारण

फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे नीति में कोई भी बदलाव करने से पहले महंगाई के रुझान और आर्थिक विकास की गति को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहते हैं। हालांकि अमेरिका में कंज्यूमर खर्च और रोजगार की स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है, लेकिन महंगाई अभी भी सेंट्रल बैंक के 2 प्रतिशत के दीर्घकालिक लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। पॉलिसी बनाने वालों ने मौजूदा दरों को बनाए रखने के पीछे वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितता, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। फेड ने माना कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन महंगाई का दबाव अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी और भविष्य की राह

अपने ताजा पॉलिसी स्टेटमेंट में फेडरल रिजर्व ने 2026 के लिए महंगाई के अनुमानों को संशोधित किया है। अधिकारियों को अब उम्मीद है कि पीसीई (PCE) महंगाई 2026 के अंत तक 3 दशमलव 6 प्रतिशत रहेगी, जो मार्च में लगाए गए 2 दशमलव 7 प्रतिशत के अनुमान से काफी अधिक है। इसी तरह, कोर पीसीई महंगाई के 3 दशमलव 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले 2 दशमलव 7 प्रतिशत था। ये संशोधित आंकड़े बताते हैं कि ऊर्जा की बढ़ती लागत और कीमतों का दबाव महंगाई को उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंचा रख सकता है। फेड के ताजा अनुमानों के अनुसार, 9 अधिकारियों का मानना है कि 2026 में दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जबकि 8 अधिकारी इसे स्थिर रखने के पक्ष में हैं और केवल 1 अधिकारी ने कटौती की बात कही है।

शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट पर असर

ब्याज दरों में भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना ने अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट ला दी है और भारतीय समयानुसार देर रात नैस्डैक करीब 1 दशमलव 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था। वहीं, डाओ जोंस में करीब 1 प्रतिशत और एसएंडपी 500 में भी लगभग 1 दशमलव 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल एक बार और दरें बढ़ने के अनुमान ने निवेशकों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है। दूसरी ओर, विदेशी बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखी गई। सोने की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की कमी आई। कॉमेक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स 87 डॉलर की गिरावट के साथ 4267 डॉलर 60 सेंट प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। गोल्ड स्पॉट 72 डॉलर गिरकर 4259 डॉलर 11 सेंट प्रति औंस पर आ गया। चांदी की बात करें तो सिल्वर फ्यूचर्स 3 दशमलव 50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 68 डॉलर 10 सेंट प्रति औंस और सिल्वर स्पॉट 3 दशमलव 11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 67 डॉलर 84 सेंट प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

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