अमेरिका में आयात शुल्क यानी टैरिफ को लेकर उपजी भारी अनिश्चितता ने भारतीय निर्यातकों के बीच चिंता की स्थिति पैदा कर दी है और देश के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और सीफूड से जुड़े व्यापारियों ने अमेरिका जाने वाले अपने माल की शिपमेंट को फिलहाल रोक दिया है। यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 15 प्रतिशत नए वैश्विक टैरिफ के ऐलान के बाद लिया गया है। व्यापारिक नियमों और ड्यूटी स्ट्रक्चर पर स्थिति स्पष्ट न होने तक निर्यातक किसी भी प्रकार का जोखिम लेने से बच रहे हैं।
कानूनी बदलाव और नए टैरिफ का प्रभाव
अमेरिकी व्यापार नीति में यह उथल-पुथल तब शुरू हुई जब वहां की सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पॉवर्स एक्ट’ (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को कानूनी रूप से खारिज कर दिया। इस अदालती फैसले ने मौजूदा व्यापारिक समझौतों की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, इस फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रेड एक्ट 1974’ की धारा 122 का उपयोग करते हुए एक नया वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की। शुरुआत में इस शुल्क की दर 10 प्रतिशत प्रस्तावित की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। इस अचानक हुए बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स के लिए गणना और लागत का संकट पैदा कर दिया है।
सीफूड और झींगा निर्यात पर गहरा संकट
भारत के कृषि निर्यात में झींगा (Shrimp) एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और अमेरिका इसका सबसे बड़ा खरीदार है। सीफूड एक्सपोटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, अमेरिकी खरीदारों से मिले निर्देशों के बाद भारतीय निर्यातकों ने शिपमेंट पर रोक लगा दी है और 4 billion रहा था। वर्तमान में ड्यूटी को लेकर बनी भ्रम की स्थिति के कारण निर्यातक ‘कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन’ (CBP) की आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जब तक शुल्क की सटीक दरें और नियम स्पष्ट नहीं होते, तब तक माल भेजना आर्थिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है।
जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर में एक सप्ताह का ठहराव
जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर, जो सालाना लगभग $10 billion का निर्यात करता है, ने भी अपनी सप्लाई को कम से कम एक सप्ताह के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है। उद्योग के प्रतिनिधियों के अनुसार, हीरे के निर्यात में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी काफी मजबूत है, लेकिन नए टैरिफ की घोषणा ने व्यापारियों को सतर्क कर दिया है और निर्यातकों का मानना है कि यदि टैरिफ की दरें स्थिर रहती हैं, तो बाजार धीरे-धीरे इसे स्वीकार कर लेगा, लेकिन वर्तमान अनिश्चितता के माहौल में नए ऑर्डर और शिपमेंट को आगे बढ़ाना संभव नहीं है। व्यापारी अब अमेरिकी प्रशासन की अगली रणनीति और आधिकारिक अधिसूचनाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रभाव
वस्त्र उद्योग यानी टेक्सटाइल सेक्टर के लिए ये नए टैरिफ एक बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। क्लॉथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, इन नई दरों ने उस प्रतिस्पर्धात्मक लाभ को कम कर दिया है जो भारतीय निर्यातकों को हालिया व्यापार समझौतों से मिलने की उम्मीद थी। विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापारिक गतिविधियों के लिए स्थिरता अनिवार्य है, और वर्तमान अनिश्चितता ने निर्यातकों के मुनाफे के गणित को बिगाड़ दिया है और पहले जहां भारतीय उत्पादों को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बढ़त मिलने की संभावना थी, वहीं अब 15 प्रतिशत के समान टैरिफ ने सभी को एक ही स्तर पर ला खड़ा किया है।
सीमा शुल्क विभाग के स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा
भारतीय निर्यातकों की पूरी नजर अब अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग (CBP) के आगामी अपडेट पर टिकी है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि जब तक आधिकारिक पोर्टल पर नए शुल्क ढांचे की विस्तृत जानकारी अपलोड नहीं होती, तब तक शिपमेंट को बंदरगाहों पर ही रोकना सुरक्षित विकल्प है। निर्यातकों को डर है कि यदि माल रास्ते में है और उस दौरान नियमों में कोई बड़ा बदलाव होता है, तो उन्हें भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, भारतीय वाणिज्य मंत्रालय और संबंधित निर्यात संवर्धन परिषदें भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और अमेरिकी अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।