अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के प्रमुख बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन सहित कुल 15 युद्धपोत शामिल हैं। यह कार्रवाई अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के घोषित सीजफायर के दौरान हुई है, जिससे क्षेत्र में सैन्य हलचल बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन जहाजों की तैनाती का मुख्य उद्देश्य ईरान के समुद्री व्यापार और सैन्य आपूर्ति लाइनों को नियंत्रित करना है।
इस्लामाबाद वार्ता की विफलता और नाकेबंदी का आदेश
यह सैन्य कदम पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता के विफल होने के बाद उठाया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच 21 घंटे से अधिक समय तक गहन चर्चा हुई, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर कोई सहमति नहीं बन सकी। बातचीत के बेनतीजा रहने के तुरंत बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना को ईरान के सभी बंदरगाहों को घेरने का निर्देश दिया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिका परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अकेले भी दबाव बनाने में सक्षम है।
अमेरिकी नौसेना के बेड़े में शामिल युद्धपोत
ईरान की घेराबंदी के लिए तैनात किए गए बेड़े में 11 विध्वंसक (Destroyers) शामिल हैं। इनमें USS बैनब्रिज, USS थॉमस हडनर, USS फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, USS डेलबर्ट डी. ब्लैक, USS जॉन फिन, USS माइकल मर्फी, USS मिट्शर, USS पिंकनी, USS राफेल पेराल्टा, USS स्प्रुएन्स और USS मिलियस जैसे शक्तिशाली जहाज तैनात हैं। इसके अतिरिक्त, त्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी क्षेत्र में मौजूद है, जिसमें USS त्रिपोली, USS न्यू ऑरलियन्स और USS रशमोर शामिल हैं। कुछ सहायक जहाज स्वेज नहर और अफ्रीका के रास्ते क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।
परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम पर विवाद
अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने दिए जाएंगे और विवाद का एक मुख्य बिंदु ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान को यह यूरेनियम वापस करना होगा, अन्यथा अमेरिका इसे हासिल करने के लिए कड़े कदम उठाएगा। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पुष्टि की है कि ईरान ने परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ने का कोई ठोस वादा नहीं किया है, जिसके कारण कूटनीतिक रास्ते बंद होते दिख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि कुछ अन्य देश भी ईरान की नाकेबंदी में अमेरिका का सहयोग करने के लिए तैयार हैं, हालांकि उन्होंने उन देशों के नामों का खुलासा नहीं किया है। ट्रंप ने कहा कि हालांकि अमेरिका को किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं है, लेकिन कई देशों ने अपनी सेवाएं पेश की हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सीजफायर की अवधि समाप्त होने तक कोई समझौता नहीं होता है, तो ईरान के लिए स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। वर्तमान में अमेरिकी जहाज एक बड़े समुद्री क्षेत्र में फैले हुए हैं और रणनीतिक नाकेबंदी को प्रभावी बनाने के लिए तैनात हैं।