अमेरिका ने ईरान पर लगातार 12वें दिन बरसाए बम, ट्रंप की चेतावनी के बाद बुनियादी ढांचे तबाह

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अमेरिका ने ईरान पर लगातार 12वें दिन बरसाए बम, ट्रंप की चेतावनी के बाद बुनियादी ढांचे तबाह
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अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार 12वें दिन ईरान के विभिन्न हिस्सों में बमबारी जारी रखी है। यह सैन्य कार्रवाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 22 जुलाई को दी गई उस चेतावनी के बाद शुरू हुई है, जिसमें उन्होंने ईरान के बुनियादी और नागरिक ढांचों को निशाना बनाने की बात कही थी। इस निरंतर हमले ने ईरान के कई शहरों में भारी तबाही मचाई है और तनाव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा दिया है।

इन शहरों में मची तबाही और हुई मौतें

ईरान की सरकारी मीडिया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पश्चिमी ईरान के कई महत्वपूर्ण इलाकों को अपनी मिसाइलों का निशाना बनाया है। इसमें अहवाज, रामशिर और एंडिमेस्क शहरों के नजदीकी इलाके शामिल हैं। इन हमलों के दौरान शालमचेह शहर में स्थिति काफी गंभीर हो गई, जहां अमेरिकी हमले में 2 लोगों की जान चली गई। इन शहरों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड का आधिकारिक बयान

तेहरान और अन्य इलाकों पर किए गए हमलों के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है और सेंट्रल कमांड की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस सैन्य क्षमता को कम करना है, जिसके जरिए वह क्षेत्र के समुद्र से गुजरने वाले आम नाविकों और वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करता है। अमेरिका का लक्ष्य होर्मुज स्ट्रेट पर फिर से अपना नियंत्रण स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों को सुरक्षित बनाकर व्यापार को बहाल करना है।

डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया चेतावनी

इस पूरे विवाद की जड़ में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह चेतावनी है जो उन्होंने बुधवार यानी 22 जुलाई को ट्रूथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दी थी। ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी जहाज पर हमला करता है, तो अमेरिका उसके बदले में ईरान के एक पुल या बिजली संयंत्र को पूरी तरह नष्ट कर देगा और ट्रंप ने लिखा कि अब से जब भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से गोलीबारी करेगा, तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे पर बम गिराकर करारा जवाब देगा।

ईरान की जैसे को तैसा वाली नीति

ट्रंप के कड़े रुख के जवाब में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने भी पलटवार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि उनका देश अब जैसे को तैसा वाली रक्षा नीति पर काम करेगा। अरागची ने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ की गई किसी भी प्रकार की आक्रामकता, विशेष रूप से उनके बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों का जवाब एक शक्तिशाली और निर्णायक कार्रवाई के साथ दिया जाएगा।

बुनियादी ढांचे पर हमलों का सिलसिला

अब दोनों देशों ने एक-दूसरे के नागरिक और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने ईरान के भीतर बिजली संयंत्रों, पुलों और डिसेलिनेशन प्लांटों को निशाना बनाया है। इसके जवाब में ईरान की ओर से भी कुवैत और कतर में स्थित डिसेलिनेशन प्लांटों पर हमले किए गए हैं और बुनियादी ढांचे पर हो रहे ये हमले दोनों देशों के बीच बढ़ते युद्ध के दायरे को दर्शाते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर असर

होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव और इसके बंद होने की आशंका ने विश्व अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दिया है। इसके साथ ही यमन में ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा रेड सी में सऊदी अरब के जहाजों को निशाना बनाने की नई धमकी ने व्यापारिक मार्गों के लिए खतरा और बढ़ा दिया है। इन परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा हो गई है। गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में यह कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल से कम थी, जो युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर के करीब थी। कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल के कारण दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

अमेरिका को हुआ भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान

इस युद्ध की कीमत केवल ईरान ही नहीं, बल्कि अमेरिका भी चुका रहा है। 22 जुलाई को डोवर एयर फोर्स बेस पर अमेरिकी सेना के 4 जवानों के पार्थिव शरीर लाए गए, जो इस संघर्ष की मानवीय त्रासदी को दर्शाते हैं। इसके अलावा, आर्थिक मोर्चे पर भी अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट की एक सुनवाई के दौरान अनुमान जताया कि ईरान के साथ जारी इस युद्ध में अब तक अमेरिका के 37 अरब 50 करोड़ डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह भारी भरकम खर्च अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बना रहा है।

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