विज्ञापन

ईरान-अमेरिकी डील से नेतन्याहू नाराज, बोले- संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है

ईरान-अमेरिकी डील से नेतन्याहू नाराज, बोले- संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है
विज्ञापन

ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक गलियारों में एक बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। दोनों देश 19 जून को जिनेवा में अपने मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग यानी समझौता ज्ञापन पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं। इस समझौते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेरी गालीबाफ़ के शामिल होने की खबर है। यह समझौता मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम को बढ़ाने और दुनिया के लिए तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए किया जा रहा है। हालांकि इस समझौते पर शुक्रवार को जिनेवा में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है, लेकिन अभी भी कई तकनीकी और रणनीतिक बातें पूरी तरह साफ़ नहीं हैं। इसी बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस डील पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है और देशवासियों को आगाह किया है कि संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है।

डोनाल्ड ट्रंप और डील पर नेतन्याहू का रुख

अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली इस संभावित डील ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को असहज कर दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनके और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच मतभेद हो सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मैं हर बात पर हमेशा एक जैसी राय नहीं रखते। वह अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं। " उनका यह बयान साफ तौर पर दर्शाता है कि इजरायल अपनी सुरक्षा के मामले में किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते के भरोसे नहीं बैठने वाला है और वह अपनी स्वतंत्र नीति पर कायम रहेगा।

परमाणु हथियारों के खिलाफ नेतन्याहू का मिशन

नेतन्याहू ने इजरायल के नागरिकों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है जिसमें उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और उन्होंने कहा कि दशकों से वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए लड़ रहे हैं और इसे वह अपने जीवन का सबसे बड़ा मिशन मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "समझौते के साथ या बिना समझौते के, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। न आज, और न ही कल। " नेतन्याहू का यह कड़ा रुख ईरान के प्रति उनकी पुरानी और सख्त नीति को एक बार फिर से पुख्ता करता है।

इजरायली सैन्य अभियानों की उपलब्धियां

प्रधानमंत्री ने उन लोगों को भी जवाब दिया जो इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की सफलता पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने बताया कि इजरायल ने पूरी तरह खत्म हो जाने के तत्काल खतरे को टाल दिया है। उन्होंने ऑपरेशन राइजिंग लायन और ऑपरेशन रोरिंग लायन का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी दोस्तों के साथ मिलकर इजरायल के इतिहास का सबसे बड़ा आक्रामक हवाई अभियान चलाया गया। इस दौरान इजरायल ने ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को खत्म किया, आतंकी शासन के शीर्ष नेताओं को हटाया और उनकी परमाणु सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। इसके अलावा मिसाइलों और उन्हें बनाने वाली अधिकांश फैक्ट्रियों को भी तबाह कर दिया गया है।

ईरान को हुआ भारी आर्थिक नुकसान

नेतन्याहू ने ईरान को हुए नुकसान का ब्योरा देते हुए बताया कि इजरायली हमलों ने ईरान के सैन्य उद्योगों और बुनियादी ढांचों को तहस-नहस कर दिया है। उनकी नौसेना और वायु सेना को नष्ट कर दिया गया है और ईरानी लोगों पर अत्याचार करने वाले बासिज कमांडरों का भी खात्मा किया गया है और नेतन्याहू के अनुसार, ईरान को हुआ यह नुकसान सैकड़ों अरब डॉलर का है और कुछ अनुमानों के मुताबिक यह 1 ट्रिलियन डॉलर के करीब भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान की अर्थव्यवस्था को वह नुकसान पहुँचाया गया है जिसे बनाने में उन्हें दशकों लगे थे और उन्होंने दावा किया कि अगर सही समय पर कार्रवाई न की गई होती, तो ईरान अब तक परमाणु बम बना चुका होता और लाखों इजरायली नागरिकों की जान खतरे में होती।

युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है: नेतन्याहू की चेतावनी

अपने संबोधन के अंत में नेतन्याहू ने देशवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है और इजरायल को अपनी सतर्कता बनाए रखनी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बात सिर्फ ईरान के लिए ही नहीं, बल्कि उसके आतंकी सहयोगियों के लिए भी सच है। इजरायल ने गाज़ा, लेबनान, सीरिया, यमन और जूडिया और सामरिया के शरणार्थी कैंपों में अभूतपूर्व हमले किए हैं। उन्होंने हमास के नेताओं देइफ़, हनियाह और सिनवार के खात्मे का भी जिक्र किया। नेतन्याहू ने गर्व से कहा कि उन्होंने गाज़ा से अपने बंधकों को वापस लाने का काम किया है, जिसे कई लोग असंभव मान रहे थे। उन्होंने अंत में दोहराया कि सुरक्षा के लिए दृढ़ रहना ही एकमात्र रास्ता है।

विज्ञापन