संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। दोनों देश आपसी सैन्य हमलों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए सहमत हो गए हैं। एक्सियोस की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने जानकारी दी है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रहे गंभीर मतभेदों को दूर करना और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहाल करना है।
दोहा में उच्च स्तरीय वार्ता और सैन्य विराम
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों ने फिलहाल सभी प्रकार की सैन्य कार्रवाई को रोकने का निर्णय लिया है। एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, तकनीकी बातचीत जारी रहने तक दोनों पक्ष अपने कदम पीछे खींचेंगे, जिससे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सकेगी और मंगलवार को होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक की पुष्टि अमेरिकी अधिकारियों के साथ-साथ मामले की जानकारी रखने वाले एक तीसरे सूत्र ने भी की है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस समुद्री मार्ग पर सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई थीं।
होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर ईरान का रुख
हालांकि दोनों देश बातचीत की मेज पर आने को तैयार हैं, लेकिन नियंत्रण के मुद्दे पर उनके बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं और ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के उन तर्कों को स्वीकार नहीं करता जिनमें कहा गया है कि मौजूदा समझौतों से ईरान को होर्मुज पर नियंत्रण का अधिकार नहीं मिलता। अमेरिका का तर्क है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और यहां जहाजों की आवाजाही पूरी तरह निर्बाध होनी चाहिए। इसके विपरीत, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को स्थानीय समयानुसार कहा कि शुरुआती शांति समझौते के प्रावधानों के तहत होर्मुज स्ट्रेट में ट्रैफिक को प्रबंधित करने का पूरा अधिकार ईरान के पास सुरक्षित है। उन्होंने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए अपनी संप्रभुता पर जोर दिया है।
11 दिन पुराना नाजुक संघर्ष-विराम और ट्रंप की चेतावनी
क्षेत्र में शांति की यह कोशिश एक बेहद नाजुक मोड़ पर है। महज 11 दिन पहले हुए इस संघर्ष-विराम पर अब खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान ने शर्तों का पालन नहीं किया, तो वे युद्ध को फिर से शुरू कर सकते हैं और "काम पूरा" कर देंगे। ट्रंप की इस धमकी ने कूटनीतिक प्रयासों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। विवाद की जड़ें हाल ही में हुए जहाजों पर हमलों से जुड़ी हैं। यह विवाद तब और गहरा गया जब ईरान ने ओमान के तट के पास से गुजर रहे एक जहाज पर हमला किया था। तेहरान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय जहाज उसके तट के साथ वाले एक विशेष रास्ते का उपयोग करें और उसने दूसरे रास्तों का उपयोग करने वाले जहाजों को पहले ही चेतावनी दी थी।
जून का समझौता और भविष्य की जिम्मेदारी
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे विवाद के केंद्र में जून की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित एक समझौता है। इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की जिम्मेदारी ईरान को सौंपी गई है। दस्तावेज में उल्लेख किया गया है कि ईरान वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेगा। इसके अलावा, यह भी तय किया गया है कि ईरान क्षेत्र के अन्य देशों के साथ विचार-विमर्श करके होर्मुज के प्रशासन और समुद्री सेवाओं के भविष्य के नियम निर्धारित करेगा। दोहा में होने वाली आगामी बैठक में इन्हीं नियमों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।