ईरान शांति समझौता: कतर के PM से मिले मार्को रुबियो और स्टीव विटकॉफ, मियामी में हुई बड़ी चर्चा

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ईरान शांति समझौता: कतर के PM से मिले मार्को रुबियो और स्टीव विटकॉफ, मियामी में हुई बड़ी चर्चा
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म करने की कोशिशें अब तेज हो गई हैं और इसी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और व्हाइट हाउस के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने शनिवार को मियामी में कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र ईरान के साथ एक संभावित शांति समझौते पर चर्चा करना था और कतर, पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये और सऊदी अरब जैसे देश मिलकर दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने और युद्ध को समाप्त कराने की दिशा में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

एक पन्ने का शांति प्रस्ताव और MOU

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान वर्तमान में एक पन्ने के शांति प्रस्ताव पर बातचीत कर रहे हैं। यह एक पन्ने का मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य सबसे पहले युद्ध को समाप्त करना है। इस प्रारंभिक समझौते के सफल होने के बाद, परमाणु कार्यक्रम जैसे अधिक जटिल और बड़े मुद्दों पर विस्तार से बातचीत शुरू करने की योजना बनाई गई है। इस रणनीतिक कदम को मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण माना जा रहा है।

शांति समझौते में कतर और अन्य देशों की भूमिका

इस पूरी बातचीत की प्रक्रिया में कतर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद से पाकिस्तान आधिकारिक मध्यस्थ के रूप में बना हुआ है, लेकिन कतर पर्दे के पीछे से लगातार दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करने में लगा हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों का यह मानना है कि ईरान के साथ चल रही इस जटिल बातचीत में कतर एक अत्यंत प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। कतर के साथ-साथ पाकिस्तान, मिस्र, तुर्किये और सऊदी अरब भी इस क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों में शामिल हैं।

कतर के प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सक्रियता

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से भी मुलाकात की थी। इस बैठक के बाद उन्हें सीधे दोहा वापस लौटना था, लेकिन कूटनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए उन्होंने अपना कार्यक्रम बदल दिया और मियामी पहुंच गए। मियामी में रहने के दौरान उन्होंने सऊदी अरब के विदेश मंत्री से भी फोन पर विस्तृत बातचीत की। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संभावित समझौते और शांति प्रयासों पर चर्चा की गई।

ईरान के जवाब का इंतजार और भविष्य की दिशा

मियामी में हुई इस बैठक का मुख्य फोकस युद्ध विराम के लिए एक ठोस समझौते का रास्ता तैयार करना था। मध्यस्थता कर रहे देशों का स्पष्ट मत है कि अमेरिका और ईरान दोनों को ही वर्तमान तनाव को कम करते हुए समझौते की दिशा में ध्यान केंद्रित करना चाहिए और शनिवार दोपहर तक अमेरिकी प्रशासन को ईरान की ओर से नए जवाब का इंतजार था। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस एक पन्ने के शांति प्रस्ताव पर क्या फैसला लेता है और क्या यह पहल मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव को कम करने में सफल हो पाएगी।

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