अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी के बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई महत्वपूर्ण शहरों और ठिकानों पर नए सिरे से हवाई हमले किए हैं। इन हमलों के बाद दक्षिणी ईरान के विभिन्न हिस्सों, जिनमें सिरिक, मिनाब, बंदर अब्बास, केश्म द्वीप और गोरगान शामिल हैं, वहां से तेज धमाकों की खबरें सामने आई हैं और यह सैन्य कार्रवाई उन बयानों के कुछ ही घंटों बाद हुई जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिका ईरान पर और भी कड़े हमले करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और सैन्य कार्रवाई
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी सेना पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने अपने बयान में कहा, "हमने कल भी हमला किया था और आज भी करेंगे। " ट्रंप ने एक तरफ जहां कड़ा रुख अपनाया, वहीं दूसरी तरफ ईरान से समझौता करने की अपील भी की। हालांकि, जमीन पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इस बात की पुष्टि की कि अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) उस रात एक बड़े सैन्य ऑपरेशन में व्यस्त रहने वाली थी। बाद में CENTCOM ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि राष्ट्रपति के सीधे आदेश पर ईरान के कई ठिकानों पर और भी हमले किए गए हैं। अमेरिका का तर्क है कि यह कार्रवाई ईरान की लगातार जारी आक्रामक गतिविधियों का मुंहतोड़ जवाब है।
ईरान का पलटवार और होर्मुज स्ट्रेट की बंदी
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। IRGC ने दावा किया है कि उसने जवाबी कार्रवाई में 18 महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। इन ठिकानों में बहरीन का एक एयरबेस और कुवैत के दो एयरबेस भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो जहाजों पर भी हमला किया। सबसे बड़ा कदम उठाते हुए ईरान की जॉइंट मिलिट्री कमांड ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब इस रास्ते से कोई भी तेल टैंकर, मालवाहक जहाज या अन्य पोत नहीं गुजर सकेगा और ईरान का कहना है कि यदि कोई जहाज वहां से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे निशाना बनाया जाएगा।
ट्रंप के दावों पर ईरान का खंडन
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बयानों का दौर भी जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में दावा किया कि ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था और बमबारी रोकने की गुहार लगाई थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि ये हमले जल्द ही खत्म हो सकते हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका दोबारा कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि इन हमलों में इजराइल की कोई भूमिका नहीं थी। दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, किसी भी ईरानी अधिकारी ने ट्रंप से कोई संपर्क नहीं किया है और अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दावा पूरी तरह से झूठा है। ईरान ने अमेरिका के उस दावे को भी गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि समुद्री रास्ते से सुरक्षित आवाजाही हो रही है। ईरान का कहना है कि पूरे इलाके में हालात फिलहाल सुरक्षित नहीं हैं।