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: ईरान को अमेरिका-इजराइल का आखिरी अल्टीमेटम: 450 किलो यूरेनियम सौंपे या विनाश झेलें

- ईरान को अमेरिका-इजराइल का आखिरी अल्टीमेटम: 450 किलो यूरेनियम सौंपे या विनाश झेलें
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मिडिल ईस्ट में बारूदी सुनामी की आहट तेज हो गई है और ट्रंप का ‘ऑपरेशन फ्रीडम प्लस’ ईरान के मुहाने पर खड़ा है और पेंटागन के 29 युद्धपोत और हाइटेक बॉम्बर्स ने टारगेट लॉक कर दिए हैं। ईरान के पास मोहलत के अब कुछ ही घंटे बचे हैं। अमेरिका ने स्पष्ट शर्त रखी है कि या तो ईरान 450 किलो यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट की चाबी उसे सौंप दे, या फिर पूर्ण विनाश के लिए तैयार रहे। इजराइल और मोसाद की हिट लिस्ट तैयार है, जिसमें ईरान का पूरा एनर्जी सेक्टर शामिल किया गया है। अगर कूटनीति विफल होती है, तो आज रात ईरान के लिए कयामत की रात साबित हो सकती है। अब फैसला तेहरान को करना है कि उसे वार्ता चाहिए या विध्वंस।

परमाणु ठिकानों की स्थिति और यूरेनियम शिफ्टिंग का अंदेशा

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि मुज्तबा यूरेनियम को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करा सकते हैं। वर्तमान में ईरान के तीन परमाणु ठिकाने सक्रिय हैं। पिकएक्स की पहाड़ियों में बुशहर परमाणु ठिकाना स्थित है, जहां यूरेनियम संवर्धन किए जाने की प्रबल आशंका है। बुशहर से 598 किलोमीटर दूर इस्फहान परमाणु ठिकाना है, जहां से भी यूरेनियम शिफ्ट कराया जा सकता है। इस्फहान से 132 किलोमीटर की दूरी पर नतांज परमाणु ठिकाना स्थित है, जिसे अमेरिका के पिछले हमले के बाद ईरान ने दोबारा निर्मित कर लिया था। इन तीनों ठिकानों से यूरेनियम को कैस्पियन सागर रूट के जरिए रूस ले जाया जा सकता है। इसके लिए नतांज से 480 किलोमीटर सड़क मार्ग से अंजाली पोर्ट और वहां से 1200 किलोमीटर के समुद्री मार्ग से रूस के ओल्या पोर्ट तक यूरेनियम पहुंचाया जा सकता है।

'ऑपरेशन फ्रीडम प्लस' और ईरान के 5 प्रमुख टारगेट

यदि अमेरिका का ‘ऑपरेशन फ्रीडम प्लस’ शुरू होता है, तो ईरान के पांच ठिकाने सबसे पहले निशाने पर होंगे। पहला हमला खर्ग आइलैंड पर हो सकता है, जो ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है और जहां से 90 फीसदी तेल की सप्लाई होती है। दूसरा टारगेट असालुयेह पेट्रोकेमिकल हब हो सकता है, जिसे साउथ पार्स का गेटवे कहा जाता है और यहां से 48 फीसदी पेट्रोकेमिकल सप्लाई होती है। तीसरा टारगेट आबादान खुजेस्तान रिफाइनरी है, जो ईरान की सबसे बड़ी रिफाइनरी है और यहां प्रतिदिन 4 लाख बैरल तेल रिफाइन किया जाता है। चौथा टारगेट बंदर माहशहर है, जहां 28 फीसदी पेट्रोकेमिकल उत्पादन होता है। पांचवें नंबर पर बुशहर का गनावेह और गोरेह पाइपलाइन जंक्शन है, जो खर्ग तक तेल सप्लाई करता है।

इजराइल की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय समीकरण

इजराइल के चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने वाशिंगटन को संदेश भेजा है कि सैन्य ऑपरेशन शुरू होने पर ईरान के एनर्जी ठिकानों को हिट लिस्ट में रखा जाए। मोसाद इसके लिए खुफिया जानकारी मुहैया कराएगा ताकि 24 घंटे के भीतर ईरान के ऊर्जा ढांचे को ध्वस्त किया जा सके। ईरान के पास दूसरा विकल्प चीन भी है, जो तेल सप्लाई के बदले यूरेनियम को सुरक्षा देने का भरोसा दे सकता है। ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि यदि डील नहीं हुई तो वे 'प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस' के जरिए पहले से कहीं बड़ा एक्शन लेंगे। पेंटागन का ब्लूप्रिंट ईरान की इकॉनमी को पूरी तरह बर्बाद करने और उसे अंधेरे में डुबोने पर केंद्रित है।

ईरान में तबाही का अंदेशा लगातार बढ़ता जा रहा है और टारगेट लॉक हो चुके हैं। अब फैसला ईरान को लेना है कि वह युद्ध के रास्ते पर आगे बढ़ेगा या वार्ता के प्रस्ताव को स्वीकार करेगा। अमेरिका और इजराइल ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब ईरान को और अधिक समय नहीं देंगे। युद्ध का अगला चरण कुछ ही घंटे दूर है और इसे रोकने के लिए ईरान को होर्मुज खोलना होगा और 450 किलो यूरेनियम पर अमेरिका का कब्जा स्वीकार करना होगा, अन्यथा विनाश निश्चित है क्योंकि अमेरिकी बॉम्बर्स अलर्ट पर हैं और अरब सागर में हथियारों की बड़ी खेप पहुंच चुकी है।

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