क्षेत्रीय तनाव के बीच एक बड़ी सैन्य कार्रवाई में अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर से हमला किया है। यह हमला उस समय हुआ है जब दोनों पक्षों के बीच युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत का दौर भी चल रहा है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से जानकारी दी है कि अमेरिकी सेना ने ईरान में नए हमले किए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य उन सैन्य ठिकानों को नष्ट करना था, जिनसे होर्मुज स्ट्रेट में तैनात अमेरिकी सेना और वहां से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के लिए गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका थी।
होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा के लिए कार्रवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना ने रात के समय ईरान में इन नए हमलों को अंजाम दिया। इन हमलों में विशेष रूप से एक ऐसी सैन्य साइट को निशाना बनाया गया, जिसके बारे में खुफिया जानकारी थी कि वह होर्मुज स्ट्रेट में मौजूद अमेरिकी सेनाओं और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक समुद्री आवाजाही के लिए खतरा बन रही थी। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है, और अमेरिका ने वहां अपनी उपस्थिति और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए इस कदम को अनिवार्य बताया है।
ईरानी ड्रोन्स को मार गिराया गया
सैन्य ठिकानों पर हमले के साथ-साथ अमेरिकी सेना ने हवाई सुरक्षात्मक कार्रवाई भी की। अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सेना ने कई ईरानी ड्रोन्स को बीच रास्ते में ही रोककर उन्हें मार गिराया। इन ड्रोन्स को भी अमेरिकी हितों के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा था और दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, सेना ने कुल 4 ईरानी ड्रोन्स को मार गिराया है। इसके अलावा, सेना ने एक ऐसे बेस को भी निशाना बनाया जो 5वें ड्रोन को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा था। यह कार्रवाई तब की गई जब अमेरिकी सेना ने ईरानी सेना की ओर से कुछ आक्रामक गतिविधियां होते हुए देखीं।
युद्ध का इतिहास और वैश्विक प्रभाव
अमेरिका की तरफ से किए गए ये हमले पिछले तीन महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के मकसद से चल रही बातचीत के बीच हुए हैं। इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के साथ हुई थी। इस युद्ध ने अब तक भीषण तबाही मचाई है और इसमें हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस निरंतर चल रहे संघर्ष का सीधा और गहरा असर दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों पर देखने को मिला है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। अमेरिका का कहना है कि ताजा हमले पूरी तरह से रक्षात्मक थे और इनका उद्देश्य अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
रक्षात्मक रणनीति और ताजा घटनाक्रम
अमेरिकी प्रशासन ने जोर देकर कहा है कि ईरान पर किए गए ये हमले अमेरिका की रक्षा के लिए उठाए गए कदम थे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बुधवार यानी 27 मई को किया गया यह हमला दूसरा रक्षात्मक हमला है। सेना ने यह कदम तब उठाया जब उन्हें यह स्पष्ट संकेत मिले कि ईरानी विमान और सैन्य ठिकाने होर्मुज स्ट्रेट के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। अमेरिका ने साफ किया है कि वह अपनी और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, भले ही शांति के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हों।