मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई है। अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने मिलकर इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर भीषण बमबारी की है और यह संयुक्त सैन्य अभियान उन ड्रोन हमलों के जवाब में चलाया गया है जिन्होंने हाल के दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा और तेल सुविधाओं को खतरे में डाल दिया था। दोनों देशों के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में मिलिशिया के कई महत्वपूर्ण हथियारों के जखीरे और लॉजिस्टिक्स ठिकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड का आधिकारिक बयान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस पूरी कार्रवाई पर एक विस्तृत बयान जारी किया है और बयान में कहा गया है कि पिछले 3 दिनों के भीतर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के इशारे पर 30 से ज्यादा ड्रोन हमले किए गए। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना और महत्वपूर्ण आर्थिक ठिकानों को नुकसान पहुंचाना था। इसी के जवाब में अमेरिका और सऊदी अरब के लड़ाकू विमानों ने पूर्वी इराक में मिलिशिया के उन ठिकानों को निशाना बनाया जहां भारी मात्रा में हथियार और युद्ध सामग्री रखी गई थी। अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आईआरजीसी और उसके सहयोगी इन हमलों को तुरंत बंद नहीं करते हैं, तो अमेरिका और भी कड़ी कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर मंडराता खतरा
सऊदी अरब ने मंगलवार को जानकारी दी कि उसने लगातार दूसरे दिन इराक की ओर से भेजे गए ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोनों को मार गिराया है। ये ड्रोन सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण तेल सुविधाओं को निशाना बनाने की फिराक में थे और सोमवार को भी इसी तरह के हमले की कोशिश की गई थी, जिसके बाद इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने अपनी सुरक्षा एजेंसियों को इस मामले की गहन जांच करने के आदेश दिए हैं। तेल ठिकानों पर बढ़ते इन हमलों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी चिंता पैदा कर दी है।
इराकी मिलिशिया का इनकार और हूतियों का दावा
दूसरी ओर, इराक के मिलिशिया समूहों ने इन ड्रोन हमलों में अपनी किसी भी तरह की भूमिका होने से साफ इनकार किया है। ईरान समर्थित समूहों के संगठन 'इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक' ने सऊदी अरब द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से निराधार और झूठा करार दिया है। उनका कहना है कि सोमवार को हुए हमले वास्तव में हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए थे और हूतियों ने खुद भी सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर हमले की जिम्मेदारी स्वीकार की है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर तेहरान यानी ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
युद्ध विराम के बावजूद बना हुआ है तनाव
हालांकि इस हफ्ते के अंत में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी लड़ाई रुक गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर तनाव अभी भी चरम पर है। राजनयिक सूत्रों और अधिकारियों का कहना है कि मध्यस्थों ने दोनों देशों को फिर से बातचीत की मेज पर लाने में कुछ सफलता जरूर पाई है, लेकिन हालिया हमले शांति की कोशिशों को झटका दे सकते हैं। ईरान ने मंगलवार को दावा किया कि अमेरिका द्वारा किए गए पिछले हमलों में उनका एक एयरपोर्ट और एक समुद्री नियंत्रण टावर पूरी तरह से तबाह हो गया है। इसके अलावा ईरान ने यह भी बताया कि इन हमलों में उनके 12 पुल और 2 सुरंगें भी नष्ट हो गई हैं।
संघर्ष का पुराना इतिहास और वर्तमान स्थिति
यह संघर्ष तब और गहरा गया था जब युद्ध शुरू होने से पहले ही ईरान ने अपने समुद्री रास्तों को बंद कर दिया था और मालवाहक जहाजों व तेल टैंकरों को निशाना बनाना शुरू किया था। जून के महीने में दोनों पक्षों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम हुआ था, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर फिर से विवाद और लड़ाई शुरू हो गई। गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की शुरुआत की थी, हालांकि इस पूरी लड़ाई में उनकी भूमिका समय-समय पर बदलती रही है। वर्तमान में सऊदी अरब और अमेरिका की यह संयुक्त कार्रवाई क्षेत्र में एक नए सैन्य समीकरण की ओर इशारा कर रही है।