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उत्तराखंड: राज्य ने पार किया 1 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा

उत्तराखंड: राज्य ने पार किया 1 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का आंकड़ा
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उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए राज्य में स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता को 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) के महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंचा दिया है। 87 मेगावाट से अधिक हो चुकी है। यह विकास राज्य की स्वच्छ और हरित ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र सरकार की नीतियों और राज्य सरकार की सक्रिय पहलों के सफल समन्वय को दिया है।

सौर ऊर्जा उत्पादन के विभिन्न घटकों का विवरण

87 मेगावाट की स्थापित सौर क्षमता में विभिन्न प्रकार की परियोजनाएं शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, ग्राउंड माउंटेड सौर परियोजनाओं का योगदान सबसे अधिक 397 मेगावाट है। इसके बाद रूफटॉप सोलर पावर प्लांट (पीएम सूर्यघर योजना) के माध्यम से 241 मेगावाट की क्षमता हासिल की गई है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए 137 मेगावाट का योगदान दिया है। अन्य घटकों में कॉमर्शियल नेट मीटरिंग से 110 मेगावाट, कैप्टिव सोलर पावर प्लांट से 51 मेगावाट, कनाल टॉप एवं कनाल बैंक परियोजनाओं से 37 मेगावाट और सरकारी भवनों पर स्थापित संयंत्रों से 26 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।

निर्माणाधीन परियोजनाएं और विस्तार की योजना

1 गीगावाट का आंकड़ा पार करने के बाद भी राज्य में सौर ऊर्जा विस्तार का कार्य निरंतर जारी है। वर्तमान में मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 100 मेगावाट से अधिक क्षमता के नए संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। 5 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्रों पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्य की कुल ग्रिड क्षमता में और वृद्धि होगी। सरकार का लक्ष्य दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की पहुंच को और अधिक सुदृढ़ करना है ताकि ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

उरेडा (UREDA) की भूमिका और नीतिगत ढांचा

इस ऐतिहासिक उपलब्धि को प्राप्त करने में उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA) ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। उरेडा ने राज्य भर में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के क्रियान्वयन, तकनीकी मार्गदर्शन और जन-जागरूकता अभियानों का नेतृत्व किया है। राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सब्सिडी, सरल अनुमोदन प्रक्रिया और अनुकूल नीतिगत वातावरण ने निजी निवेशकों और स्थानीय उद्यमियों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया है। उरेडा के माध्यम से सरकारी योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया है, जिससे विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में सौर समाधानों का विस्तार हुआ है।

स्वरोजगार और पर्यावरणीय प्रभाव

सौर ऊर्जा क्षमता में वृद्धि का सीधा प्रभाव स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण पर पड़ा है। मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना जैसी पहलों ने हजारों स्थानीय युवाओं और उद्यमियों के लिए आय के नए स्रोत सृजित किए हैं। सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है, जो हिमालयी राज्य की पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए आवश्यक है। राज्य सरकार के अनुसार, यह उपलब्धि न केवल ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। भविष्य में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाओं को और अधिक सुलभ बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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