भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे वैभव सूर्यवंशी इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए इस 15 साल के खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। वैभव की बल्लेबाजी का जादू न केवल भारत में बल्कि सरहद पार पाकिस्तान में भी सिर चढ़कर बोल रहा है और हालांकि, पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ द्वारा वैभव की तुलना शाहिद अफरीदी से किए जाने के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। यूसुफ ने वैभव की तारीफ तो की, लेकिन उन्हें अफरीदी जैसा बताना कई क्रिकेट प्रेमियों को रास नहीं आ रहा है। पाकिस्तान में इस बात का खौफ भी है कि जब वैभव उनके खिलाफ खेलेंगे तो उनके गेंदबाजों का क्या होगा।
मोहम्मद यूसुफ का बयान और अफरीदी से तुलना
मोहम्मद यूसुफ ने सोशल मीडिया पर वैभव सूर्यवंशी की जमकर सराहना की है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि 15 साल के वैभव सूर्यवंशी क्रिकेट के एक नए सेंसेशन हैं। यूसुफ ने आगे कहा कि वैभव को खेलते देख उन्हें पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी की याद आती है और उनके अनुसार, वैभव युवा हैं, निडर हैं, विस्फोटक हैं और ऊर्जा से पूरी तरह भरे हुए हैं। यूसुफ का मानना है कि क्रिकेट का भविष्य इन्हीं जैसे खिलाड़ियों में है। हालांकि वैभव की प्रतिभा पर किसी को शक नहीं है, लेकिन उनकी तुलना एक ऐसे खिलाड़ी से करना जिसकी तकनीक पर हमेशा सवाल उठे, चर्चा का विषय बन गया है।
शाहिद अफरीदी: ताकत का खेल और 'लप्पेबाजी'
जिस शाहिद अफरीदी से वैभव की तुलना की जा रही है, उनके खेल के तरीके से पूरी दुनिया वाकिफ है। शाहिद अफरीदी ने साल 2006 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी और वे साल 2015 तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहे। इसके बाद भी वे विभिन्न लीग क्रिकेट में खेलते नजर आए। अफरीदी को अक्सर एक 'लप्पेबाज' खिलाड़ी के रूप में देखा जाता था। वे छक्के लगाने की क्षमता तो रखते थे, लेकिन उनकी बल्लेबाजी में निरंतरता की भारी कमी थी। वे टाइमिंग के बजाय अपनी शारीरिक ताकत पर ज्यादा भरोसा करते थे। यही कारण था कि वे अपने करियर में अनगिनत बार शून्य पर आउट हुए। उनका खेल अक्सर तुक्के पर आधारित होता था, जहां गेंद या तो बाउंड्री के पार जाती थी या फिर वे कैच आउट हो जाते थे।
वैभव सूर्यवंशी की तकनीक और सचिन तेंदुलकर की राय
वैभव सूर्यवंशी का खेल शाहिद अफरीदी के बिल्कुल विपरीत माना जा रहा है। वैभव अपनी बल्लेबाजी में ताकत से ज्यादा टाइमिंग और बेहतरीन स्ट्रोक प्ले पर ध्यान देते हैं। उनकी इसी तकनीक की तारीफ खुद क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने भी की है। सचिन ने सोशल मीडिया पर वैभव की बल्लेबाजी तकनीक के बारे में विस्तार से बताया था कि वे किस तरह के स्ट्रोक्स खेलते हैं। जहां अफरीदी का खेल जोखिम भरा और अनिश्चित था, वहीं वैभव की बल्लेबाजी में एक ठहराव और तकनीकी मजबूती दिखाई देती है और ऐसे में एक तकनीकी रूप से सक्षम खिलाड़ी की तुलना 'लप्पेबाज' खिलाड़ी से करना तर्कसंगत नहीं लगता।
तुलना की पुरानी आदत: विराट कोहली बनाम बाबर आजम
पाकिस्तान की यह पुरानी आदत रही है कि वह भारत के दिग्गज खिलाड़ियों की तुलना अपने खिलाड़ियों से करता रहता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण विराट कोहली और बाबर आजम की तुलना है। जब विराट कोहली अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में थे, तब पाकिस्तान में उनकी तुलना बाबर आजम से की जाने लगी थी और जबकि हकीकत में दोनों के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। आज विराट कोहली दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शुमार हैं, भले ही वे अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हों। दूसरी ओर, बाबर आजम अभी भी युवा हैं और टीम में अपनी जगह पक्की करने और निरंतरता बनाए रखने के लिए संघर्ष करते नजर आते हैं। वैभव और अफरीदी की तुलना भी इसी कड़ी का हिस्सा नजर आती है।