Agnivesh Agarwal: वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का 49 साल की उम्र में निधन
Agnivesh Agarwal - वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का 49 साल की उम्र में निधन
वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के इकलौते बेटे अग्निवेश अग्रवाल का 49 साल की अल्पायु में निधन हो गया है। यह दुखद घटना अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हुई एक दुर्घटना के बाद हुई, जिसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बुधवार को उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनका निधन हो गया। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए इसे अपने जीवन का सबसे अंधकारमय दिन बताया है। इस दुखद घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनिल अग्रवाल और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
अग्रवाल परिवार के लिए एक दुखद क्षति
अग्निवेश अग्रवाल का निधन अग्रवाल परिवार के लिए एक असहनीय क्षति है। अनिल अग्रवाल ने अपने पोस्ट में बताया कि अग्निवेश अमेरिका में स्कीइंग करते समय घायल हो गए थे। उन्हें तुरंत माउंट सिनाई अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, जहाँ वे अच्छी तरह से ठीक हो रहे थे। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द ही ठीक हो जाएंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने उन्हें परिवार से छीन लिया। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के निधन को प्रकृति के खिलाफ बताया और कहा कि किसी भी माता-पिता के लिए अपने बच्चे को अलविदा कहना सबसे असहनीय पीड़ा होती है। उन्होंने लिखा कि यह नुकसान उन्हें इस कदर तोड़ गया है, जिसे समझने की कोशिश वे अब भी कर रहे हैं।अग्निवेश अग्रवाल: उपलब्धियों से भरा एक जीवन
अग्निवेश अग्रवाल का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उन्होंने अजमेर के मेयो कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की और कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। अपने पिता के अनुसार, अग्निवेश एक खिलाड़ी, संगीत प्रेमी और एक कुशल। लीडर थे, जो अपनी गर्मजोशी, विनम्रता और दयालुता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने वेदांता समूह की कई कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं और वे तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (TSPL) के बोर्ड में शामिल थे और 2019 तक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन भी रहे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 2009 में स्थापित फुजैराह गोल्ड के प्रेसिडेंट और एमडी के रूप में कार्य किया और तब से अलुवर्क्स लिमिटेड के बोर्ड में भी शामिल थे और वे 1995 से 2013 तक मद्रास एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड के निदेशक और 2009 से स्टरलाइट एनर्जी लिमिटेड के गैर-कार्यकारी निदेशक भी रहे। उनकी अन्य निदेशक भूमिकाओं में तेंगपानी टी कंपनी लिमिटेड, ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड, स्टरलाइट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, स्टरलाइट इन्फ्रास्ट्रक्चर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, स्टरलाइट आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड और प्राइमेक्स हेल्थकेयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड शामिल थीं।भारतीय उद्योग में दूरदर्शी योगदान
अग्निवेश अग्रवाल ने भारतीय खनन उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के चेयरमैन के रूप में, उन्होंने भारत में खनन में प्रचलित तकनीकों का आधुनिकीकरण किया, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय बेंचमार्क माना गया। उनके नेतृत्व में, हिंदुस्तान जिंक विश्व की शीर्ष कंपनियों में से एक बनने में सफल रहा और उन्होंने फुजैराह गोल्ड की स्थापना में भी अहम भूमिका निभाई, जो उनकी उद्यमशीलता और दूरदर्शिता का प्रमाण है। अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे को एक मजबूत, संवेदनशील और उद्देश्यपूर्ण इंसान बताया, जो अपनी मां की जिंदगी की रोशनी था, एक जिम्मेदार भाई, एक सच्चा दोस्त और एक ऐसा सौम्य व्यक्तित्व, जिसने भी उससे मुलाकात की, उसे छू लिया।अनिल अग्रवाल की भावुक श्रद्धांजलि और प्रतिज्ञा
अनिल अग्रवाल ने अपने बेटे के निधन की जानकारी देते हुए एक अत्यंत भावुक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “मेरा प्यारा बेटा अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया। वह सिर्फ 49 साल का था- स्वस्थ, जीवन से भरा हुआ और सपनों से लबालब और ” उन्होंने अग्निवेश को सिर्फ अपना बेटा नहीं, बल्कि अपना दोस्त और अपनी पूरी दुनिया बताया। इस दुखद घड़ी में, उन्होंने समाज को अपनी कमाई का 75% से अधिक लौटाने के अपने वादे को दोहराया, जो उन्होंने अग्निवेश से किया था। यह वादा उनके साझा सपने का हिस्सा था, जिसमें कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी बच्चे को शिक्षा से वंचित न रहना पड़े, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और हर युवा भारतीय को सम्मानजनक काम मिले। उन्होंने अपने बेटे की रोशनी को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और उन। सभी दोस्तों, साथियों और शुभचिंतकों का धन्यवाद किया जो हमेशा उनके साथ खड़े रहे।प्रधानमंत्री मोदी ने व्यक्त की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनिल अग्रवाल के X पोस्ट का जवाब देते हुए अग्निवेश अग्रवाल के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, “अग्निवेश अग्रवाल का असामयिक निधन अत्यंत चौंकाने वाला और दुखदायी है। इस हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलि में आपके गहन शोक की गहराई स्पष्ट झलक रही है। प्रार्थना है कि आप और आपका परिवार निरंतर शक्ति एवं साहस प्राप्त करें और ओम शांति। ” प्रधानमंत्री के ये शब्द परिवार के प्रति राष्ट्र की संवेदनाओं को दर्शाते हैं।अग्रवाल साम्राज्य की जड़ें
मेटल किंग के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल के परिवार की जड़ें राजस्थान में रही हैं। उनके पिता मारवाड़ी समाज से थे, जो कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना में हुआ और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी वहीं हुई और उनके पिता, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, पटना में एल्युमिनियम कंडक्टर की एक छोटी सी दुकान चलाते थे, जिसकी आमदनी सीमित थी। अनिल अग्रवाल चार भाई-बहन थे और उन्होंने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। आगे की पढ़ाई के लिए पटना से बाहर जाने के बजाय,। उन्होंने अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बंटाने का फैसला किया।संघर्ष से वेदांता की स्थापना तक
पटना में अपने पिता के साथ कुछ साल काम करने के बाद, अनिल अग्रवाल का मन बाहर जाने का हुआ। 19 साल की उम्र में, वे एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर के साथ पटना से मुंबई आ गए। उन्हें नौकरी की दुनिया पसंद नहीं आई, क्योंकि उन्होंने अपने पिता को व्यवसाय करते देखा था। मुंबई में उन्होंने 9 व्यवसाय शुरू किए, लेकिन सभी असफल रहे। उन्होंने एक बार कैंब्रिज में बताया था कि उनके शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते और वे सालों तक डिप्रेशन में रहे। उन्होंने शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी, लेकिन कर्मचारियों को वेतन देने और कच्चा माल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। इसके बाद, 1976 में उन्होंने एक नई कंपनी, वेदांता रिसोर्सेज। की स्थापना की, जिसमें उन्हें शुरुआत में ही फायदा होने लगा। इस लाभ का उपयोग उन्होंने दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करने में किया। 1993 में, उन्होंने औरंगाबाद में एल्युमिनियम शीट्स और फॉइल्स बनाने का प्लांट लगाया, और वेदांता भारत की पहली कॉपर रिफाइनरी प्राइवेट कंपनी बन गई।वेदांता का वैश्विक विस्तार
आज, वेदांता जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। अनिल अग्रवाल को भारत के मेटल मैन के नाम से। जाना जाता है, और उनका सफर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने छोटे-छोटे धंधों में हाथ आजमाया, जिसमें कबाड़ी का व्यवसाय भी शामिल था, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली और हालांकि, उनकी दृढ़ता और दूरदर्शिता ने वेदांता को एक वैश्विक दिग्गज बना दिया है। अग्निवेश अग्रवाल ने भी इस विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, और उनका निधन कंपनी और परिवार दोनों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अनिल अग्रवाल ने कहा कि अग्निवेश आत्मनिर्भर भारत के सपने में गहरी आस्था रखते थे और अक्सर कहते थे, “पापा, हमारे देश में किसी चीज की कमी नहीं है, फिर हम पीछे क्यों रहें? ” यह उनके बेटे की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है, जिसे अनिल अग्रवाल अब आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं।