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पश्चिम एशिया संकट: सर्वदलीय बैठक में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा का भरोसा दिया

पश्चिम एशिया संकट: सर्वदलीय बैठक में सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा का भरोसा दिया
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विपक्षी दलों को क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भारत पर इसके संभावित प्रभावों से अवगत कराना था। लगभग पौने दो घंटे तक चली इस बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों और ऊर्जा संसाधनों की कोई कमी नहीं है। बैठक की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संबोधन से हुई, जिसके बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। इस प्रेजेंटेशन में भारत के रणनीतिक हितों, नागरिकों की सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी गई।

पेट्रोलियम और ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का रुख

बैठक के दौरान सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर विस्तार से जानकारी साझा की। सूत्रों के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विपक्षी नेताओं को आश्वस्त किया कि भारत ने कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) की अग्रिम बुकिंग कर ली है और सरकार ने बताया कि ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न देशों के साथ बातचीत का दायरा बढ़ाया गया है और अग्रिम ऑर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक संकट के बावजूद देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर पैनिक या चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है और सरकार ने यह भी बताया कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और आपूर्ति की स्थिति पर निरंतर निगरानी रख रही है ताकि घरेलू स्तर पर किसी भी प्रकार के व्यवधान को रोका जा सके।

समुद्री मार्ग और जहाजों की सुरक्षा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है, वहां की सुरक्षा स्थिति पर भी बैठक में चर्चा हुई। सरकार ने जानकारी दी कि अब तक भारत के 4 जहाज इस क्षेत्र से सुरक्षित रूप से निकल चुके हैं और कुछ अन्य जहाज भी जल्द ही वहां से गुजरने वाले हैं। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि वर्तमान तनाव के कारण कई अन्य देशों के जहाज वहां फंसे हुए हैं। विदेश सचिव ने बताया कि भारतीय नौसेना और संबंधित एजेंसियां समुद्री मार्गों पर भारतीय कार्गो की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हैं और सरकार ने यह भी साझा किया कि अब तक संकटग्रस्त क्षेत्रों से लगभग 4,25,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जो सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।

कूटनीतिक प्रयास और प्रधानमंत्री का संदेश

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक प्रयासों का भी उल्लेख किया गया और सरकार की ओर से बताया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इस विषय पर चर्चा की है। इस बातचीत में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत युद्ध के पक्ष में नहीं है और शांति की बहाली चाहता है। सरकार ने विपक्ष को बताया कि भारत का मुख्य ध्यान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देने पर है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत द्वारा की जा रही कूटनीतिक पहलों के बारे में जानकारी दी, जिससे संकट के प्रभाव को कम किया जा सके।

घरेलू आपूर्ति और कीमतों पर नियंत्रण

आम जनता को राहत देते हुए सरकार ने घरेलू एलपीजी और गैस की कीमतों पर भी स्थिति स्पष्ट की। बैठक में बताया गया कि दो एलपीजी जहाज, जिनमें कुल 92,000 टन एलपीजी लोड है, जल्द ही भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाले हैं। शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आंकड़ों के अनुसार, बीते दिन लगभग 58,00,000 बुकिंग दर्ज की गई हैं। सरकार ने स्पष्ट किया कि घरेलू गैस के दामों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई है और मंत्रालय के अधिकारी तेल एवं गैस कंपनियों के साथ दैनिक आधार पर समन्वय कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा गठित 7 अधिकार संपन्न समूह नियमित रूप से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का आकलन कर रहे हैं।

बैठक में शामिल दल और विपक्ष की भूमिका

इस सर्वदलीय बैठक में सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी उपस्थित थे। विपक्षी दलों की ओर से कांग्रेस के तारिक अनवर और मुकुल वासनिक, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और जावेद अली, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, और जेडीयू के लल्लन सिंह व संजय झा शामिल हुए। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कोई भी प्रतिनिधि इस बैठक में मौजूद नहीं रहा। सरकार ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि वे किसी भी समय इस मुद्दे पर अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र हैं और सरकार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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