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टीएमसी में बड़ी बगावत: काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में दिल्ली में जुटे बागी सांसद

टीएमसी में बड़ी बगावत: काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में दिल्ली में जुटे बागी सांसद
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की पराजय के बाद पार्टी के भीतर आंतरिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। बंगाल की सत्ता से बेदखल होने के मात्र एक महीने के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है और पार्टी में सबसे बड़ी दरार तब दिखी जब तृणमूल विधायक दल में फूट पड़ गई। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने एक अलग गुट बना लिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बागी गुट को विधानसभा अध्यक्ष यानी स्पीकर ने मान्यता भी दे दी है, जिससे पार्टी की आधिकारिक स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

लोकसभा सांसदों में भी बगावत की आहट

विधायकों के टूटने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस के सांसदों पर भी टूटने का खतरा मंडराने लगा है। लोकसभा में भी विधानसभा जैसी ही तस्वीर दिखने की प्रबल संभावना है। बारासात से पार्टी की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है और उन्होंने पार्टी के सभी महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों का दावा है कि जिस तरह विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी ने विधायकों को एकजुट किया था, ठीक उसी तरह काकोली घोष दस्तीदार अब लोकसभा सांसदों को एकजुट करने के अभियान में जुटी हुई हैं। इस पूरी राजनीतिक हलचल का केंद्र अब दिल्ली बन गया है और माना जा रहा है कि अगले दो से तीन दिनों में बंगाल की राजनीति के कई नए रंग दिल्ली में देखने को मिल सकते हैं।

अभिषेक बनर्जी का दिल्ली दौरा और डैमेज कंट्रोल

राजधानी दिल्ली में धीरे-धीरे तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है। आगामी 8 जून को इंडिया गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसमें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, सांसदों के बीच बढ़ती बगावत की खबरों के बीच अभिषेक बनर्जी शनिवार को ही कोलकाता से दिल्ली पहुंच गए हैं। ममता बनर्जी के रविवार को दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। अभिषेक बनर्जी का अपने निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले दिल्ली पहुंचना कई अटकलों को जन्म दे रहा है और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि वह बागी सांसदों को मनाने और पार्टी में मची इस भगदड़ को रोकने के लिए डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रहे हैं।

ऑपरेशन लुटियंस और सांसदों की नाराजगी

इस बीच यह खबर भी जोरों पर है कि 8 जून को तृणमूल सांसदों का एक बड़ा गुट लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकता है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या उसी दिन जब ममता बनर्जी दिल्ली में होंगी, बागी सांसद 'ऑपरेशन लुटियंस' की शुरुआत करेंगे? बागी सांसदों की सूची में कई बड़े नाम शामिल बताए जा रहे हैं और काकोली घोष दस्तीदार के अलावा अन्य सांसदों की नाराजगी भी सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, डेरेक ओ'ब्रायन ने सांसद जगदीश बसुनिया को फोन करके ममता बनर्जी की बैठक में न आने का कारण पूछा था। जगदीश बसुनिया ने अपने बेटे की बीमारी का हवाला दिया, लेकिन कथित तौर पर उनसे इसका सबूत मांगा गया। बसुनिया को अपने बेटे की अस्पताल के बेड पर लेटी हुई फोटो भेजनी पड़ी, जिससे वह काफी आहत और नाराज बताए जा रहे हैं।

यूसुफ पठान और अन्य सेलिब्रिटी सांसदों का रुख

पार्टी के भीतर सेलिब्रिटी सांसदों को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, सांसद देव, रचना, यूसुफ पठान और जून मालिया जैसे नाम पार्टी से दूरी बनाते दिख रहे हैं। हालांकि सायनी घोष के रुख को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। दूसरी तरफ, सुदीप बनर्जी की पत्नी नयन बनर्जी स्पष्ट रूप से ममता बनर्जी के साथ खड़ी नजर आ रही हैं, लेकिन सुदीप बनर्जी को लोकसभा में पार्टी नेता के पद से हटाकर अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदारी दिए जाने के बाद समीकरण बदल सकते हैं। पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान को लेकर भी बड़ी खबर है। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने उनसे सांसद पद छोड़ने को कहा था ताकि वह बहरामपुर से चुनाव लड़ सकें, लेकिन यूसुफ पठान ने इससे साफ इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि बहरामपुर की जनता ने उन्हें चुना है और उनके कार्यकाल को अभी मात्र 2 साल ही हुए हैं। बागी गुट फिलहाल दल-बदल विरोधी कानून से बचने के लिए रणनीति बना रहा है और उनका मुख्य लक्ष्य स्पीकर को पत्र लिखकर अभिषेक बनर्जी को संसदीय दल के नेता पद से हटाना है।

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