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ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें! बागी विधायकों का असली टीएमसी होने का दावा

ममता बनर्जी की बढ़ी मुश्किलें! बागी विधायकों का असली टीएमसी होने का दावा
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पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाली तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब पार्टी के भीतर असली टीएमसी होने की जंग आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है और पार्टी के कई बागी विधायक पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे हैं। ये विधायक विधानसभा अध्यक्ष रथिन घोष को नेता प्रतिपक्ष के चुनाव के संबंध में एक औपचारिक पत्र सौंपेंगे और यह दावा करेंगे कि वे ही असली टीएमसी हैं और इस कदम से राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

प्रमुख बागी चेहरे और उनके दावे

विधानसभा पहुंचने वाले प्रमुख बागी विधायकों में ऋतब्रत बंद्योपाध्याय, संदीपान साहा, सबीना यास्मीन, अखरुज्जमां और कई अन्य विधायक शामिल हैं और इन विधायकों की मौजूदगी ने पार्टी के भीतर मचे घमासान को सार्वजनिक कर दिया है। संदीपान साहा ने मीडिया के सामने बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनके पास दो तिहाई विधायकों से ज्यादा का समर्थन हासिल है। इससे पहले पश्चिम बंगाल के मंत्री तपस रॉय ने कल मंगलवार को यह दावा किया था कि टीएमसी में फूट पड़ने वाली है। रॉय की ओर से यह दावा ऐसे समय में किया गया जब राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि टीएमसी विधायकों का एक बड़ा धड़ा निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी से अलग हो सकता है।

तपस रॉय का तीखा हमला

विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए तपस रॉय ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस ने अपनी पार्टी में ऐसे लोगों को जगह दी है, जिन्हें राजनीति का बहुत कम अनुभव है। उन्होंने कहा कि अब पार्टी के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। उनका दावा है कि टीएमसी अब टूटने की एक ऐसी प्रक्रिया से गुजर रही है, जिसे टाला नहीं जा सकता। मानिकतला के विधायक तपस रॉय ने कड़े शब्दों में कहा कि टीएमसी, जिसने राज्य में पिछले 15 सालों तक राज किया है, आखिरकार राज्य के राजनीतिक नक्शे से मिट जाएगी। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर मची खलबली को और बढ़ा दिया है।

ममता खेमे की जवाबी कार्रवाई

दूसरी ओर, ममता बनर्जी के वफादार गुट ने जोर देकर कहा कि पार्टी के अधिकतर विधायक अपनी मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े हैं। टीएमसी के वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय, जिन्हें पार्टी की ओर से विपक्ष का नेता नामित किया गया है, ने किसी भी बड़े विद्रोह की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल विधायकों को तोड़ने और विपक्षी पार्टी को अस्थिर करने की कोशिश में लगा है। उन्होंने कहा, "हमें इस बात का कोई डर नहीं है कि पार्टी में बड़ा विद्रोह होने जा रहा है। ज्यादातर विधायक ममता बनर्जी के साथ ही बने रहेंगे, और पार्टी के पुराने नेता तृणमूल कांग्रेस पर अपना मजबूत नियंत्रण बनाए रखेंगे।

विपक्ष के नेता पर विवाद और ऋतब्रत की भूमिका

टीएमसी से निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने कल विधानसभा परिसर से बाहर निकलने के बाद स्वीकार किया कि वह विधायक हॉस्टल में कुछ विधायकों से मिले थे और उनके साथ मुड़ी खाई थी। हालांकि, उन्होंने उन अटकलों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया कि 50 से अधिक विधायक उनके खेमे में आ सकते हैं। उन्होंने केवल इतना कहा कि वह हर दिन को उसी दिन के हिसाब से जीने में यकीन रखते हैं और ऋतब्रत ने यह भी दावा किया कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दस्तावेज पर विधायकों ने हस्ताक्षर किए थे, वह केवल उपस्थिति दर्ज करने वाली एक शीट थी।

स्पीकर कार्यालय पर लगे आरोप

इस बीच, टीएमसी विधायक और प्रवक्ता कुणाल घोष ने गंभीर आरोप लगाया कि विधानसभा स्पीकर के ऑफिस ने उस पत्र को स्वीकार करने से मना कर दिया, जिसमें पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाए जाने के प्रस्ताव का समर्थन किया गया था। घोष कल यही पत्र जमा करने गए थे। घोष ने दावा किया कि वह और उनके साथी टीएमसी विधायक आशिमा पात्रा पत्र जमा करने के लिए स्पीकर के ऑफिस गए थे, लेकिन उन्हें यह बताया गया कि उनकी तरफ से कोई भी पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। टीएमसी ने 294 सदस्यों वाली विधानसभा के चुनावों में 80 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि, सोमवार को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 2 विधायकों को पार्टी से निकाल दिया गया है, जिससे पार्टी की संख्यात्मक स्थिति और आंतरिक समीकरण बदल गए हैं।

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