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India-US Tariff War: क्या टैरिफ पर सुलझ जाएगा विवाद? इंडिया और US के बीच होने वाली है बैठक

India-US Tariff War: क्या टैरिफ पर सुलझ जाएगा विवाद? इंडिया और US के बीच होने वाली है बैठक
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India-US Tariff War: भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच और उनकी टीम आज रात भारत पहुंचने वाली है, जहां कल से द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर पूरे दिन चर्चा होगी। यह वार्ता 25 अगस्त 2025 को हुई डील स्थगित होने के बाद हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित सभी वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगाने का ऐलान किया था। मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार मोर्चे पर आगे की रणनीति इसी महीने तय की जाएगी।

वार्ताकारों की भूमिका और एजेंडा

अमेरिकी टीम का नेतृत्व कर रहे ब्रेंडन लिंच दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि हैं। वे दक्षिण एशिया व्यापार नीति में विशेषज्ञता रखते हैं और पहले भारत के लिए डिप्टी असिस्टेंट यूएसटीआर के रूप में कार्यरत रहे हैं। उनकी टीम भारत के मुख्य वार्ताकार और वाणिज्य विभाग में विशेष सचिव राजेश अग्रवाल के साथ मंगलवार, 16 सितंबर 2025 को मिलेगी। राजेश अग्रवाल ने पुष्टि की है कि यह बैठक विशेष रूप से व्यापार मुद्दों पर केंद्रित होगी, और इसमें द्विपक्षीय संबंधों के अन्य पहलुओं पर चर्चा नहीं होगी।

वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने सोमवार को कहा कि दोनों देश व्यापार मुद्दों को लेकर 'सकारात्मक सोच' में हैं। उन्होंने कहा, "कुछ और मुद्दे हैं, जिनका व्यापार से सीधा संबंध नहीं है, जिन पर मैं बात नहीं करना चाहूंगा। उन्हें भी कूटनीतिक स्तर पर उठाया जाएगा।" यह बयान तब आया है जब हाल ही में ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सोशल मीडिया पर सकारात्मक आदान-प्रदान हुआ, जिसमें दोनों नेताओं ने व्यापार सौदे को जल्द अंतिम रूप देने की आशा जताई।

टैरिफों का बैकग्राउंड: ट्रंप का 'रेसिप्रोकल' नीति

भारत-अमेरिका के बीच बीटीए पर बातचीत मार्च 2025 से चल रही है, लेकिन 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप द्वारा 'रेसिप्रोकल' टैरिफ की घोषणा ने सब कुछ बदल दिया। ट्रंप ने भारत से आयातित सभी वस्तुओं पर कुल 50% टैरिफ लगाने का फैसला किया, जो मौजूदा 10% बेसलाइन आयात शुल्क के ऊपर था। यह दो चरणों में लागू हुआ:

  • पहला चरण: 1 अगस्त 2025 से सभी भारतीय वस्तुओं पर 25% आयात शुल्क प्रभावी।
  • दूसरा चरण: 6 अगस्त 2025 के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत अतिरिक्त 25% टैरिफ, जो 27 अगस्त 2025 से लागू हो गया।

ट्रंप का यह कदम मुख्य रूप से भारत के रूसी तेल आयात को लेकर था, जिसे वे यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद के रूप में देखते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि भारत को रूसी तेल खरीद बंद करने पर टैरिफ में छूट मिल सकती है। हालांकि, भारत ने इसे दोहरा मापदंड बताया है, क्योंकि चीन भी रूसी तेल खरीदता है लेकिन उसके खिलाफ ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया।

ये टैरिफ भारत के निर्यात को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां से 2024 में 86.5 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, फुटवियर और केमिकल्स जैसे क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां दो-तिहाई निर्यात 50% टैरिफ के दायरे में आते हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं, खासकर छोटे और मध्यम उद्यमों में। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी कहा कि ये टैरिफ पहले से ही नौकरियां छिन रहे हैं।

व्यापार समझौते की संभावनाएं और चुनौतियां

बीटीए की बातचीत का लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक दोगुना करना है। भारत अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध हटाने से इनकार कर रहा है, क्योंकि इससे देश के लाखों किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। दूसरी ओर, अमेरिका औद्योगिक वस्तुओं, ऑटोमोबाइल, वाइन और पेट्रोकेमिकल्स पर शुल्क में छूट की मांग कर रहा है।

पिछली पांच दौर की वार्ताओं के बाद, दोनों पक्षों ने सितंबर-अक्टूबर 2025 तक पहले चरण को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि नवंबर 2025 तक पहला ट्रैंच फाइनल हो सकता है, और चर्चाएं सकारात्मक वातावरण में चल रही हैं। अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने भी कहा कि रूसी तेल खरीद बंद होने पर सौदा आसान हो जाएगा।

इस बीच, रक्षा क्षेत्र में सकारात्मक संकेत हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग और बोइंग की टीम अगले सप्ताह भारत आएगी, जहां 4 अरब डॉलर के छह पी-8आई नौसेना पैट्रोल विमानों की डील पर चर्चा होगी। यह भारत के रूसी हथियारों पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम है।

आगे की राह: आशावादी लेकिन सतर्क

ट्रंप और मोदी के बीच हालिया संवाद से लगता है कि तनाव कम हो रहा है। ट्रंप ने कहा, "मुझे विश्वास है कि दोनों महान देशों के लिए सफल निष्कर्ष आसान होगा।" मोदी ने जवाब में कहा, "हमारी टीमें चर्चाओं को जल्द पूरा करने के लिए काम कर रही हैं।" हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि रूसी तेल मुद्दा और कृषि क्षेत्र की मांगें अभी भी बाधा बनी हुई हैं।

यदि बीटीए सफल होता है, तो यह न केवल टैरिफ कम करेगा बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करेगा। लेकिन विफलता के मामले में, वैश्विक व्यापार युद्ध और तेज हो सकता है। भारत को अपनी आर्थिक सुधारों को तेज करना होगा, ताकि वैकल्पिक बाजार ढूंढे जा सकें। कुल मिलाकर, कल की वार्ता दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है।

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