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पीएम मोदी ने मलेशिया में आजाद हिंद फौज के वयोवृद्ध जयराज राजा राव से की मुलाकात

पीएम मोदी ने मलेशिया में आजाद हिंद फौज के वयोवृद्ध जयराज राजा राव से की मुलाकात
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दो दिवसीय आधिकारिक मलेशिया यात्रा के दौरान कुआलालंपुर में एक अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक मुलाकात की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) यानी आजाद हिंद फौज के वयोवृद्ध सदस्य जयराज राजा राव से भेंट की। यह मुलाकात न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण थी, बल्कि इसने भारत और मलेशिया के बीच साझा क्रांतिकारी इतिहास को भी पुनर्जीवित कर दिया और प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए राव के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया।

जयराज राजा राव के साथ विशेष मुलाकात और सम्मान

प्रधानमंत्री मोदी ने जयराज राजा राव से मुलाकात को एक 'शानदार और विशेष' अनुभव बताया और उन्होंने कहा कि राव का जीवन अपार साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने राव के अनुभवों को सुना और उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक जीवित कड़ी के रूप में सराहा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री ने आईएनए के असाधारण साहस, विरासत और बलिदान के लिए सभी भारतीयों की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि भारत उन बहादुर पुरुषों और महिलाओं का हमेशा ऋणी रहेगा जिन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में देश के भाग्य को बदलने के लिए संघर्ष किया।

1943 का ऐतिहासिक संदर्भ और नेताजी का प्रभाव

इस मुलाकात का ऐतिहासिक महत्व सितंबर 1943 की उन घटनाओं से जुड़ा है, जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कुआलालंपुर के सेलांगोर पैडांग (अब दातारन मरदेका) में हजारों लोगों को संबोधित किया था। उस समय नेताजी के ओजस्वी भाषणों ने दक्षिण-पूर्व एशिया में रहने वाले हजारों भारतीय युवाओं को प्रेरित किया था। जयराज राजा राव उन्हीं युवाओं में से एक थे, जिन्होंने नेताजी के आह्वान पर अपनी सुख-सुविधाएं त्याग दीं और आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। प्रधानमंत्री ने इस बात का उल्लेख किया कि कैसे उस दौर के संघर्ष ने भारत की आजादी की नींव को मजबूत किया था।

मलेशिया यात्रा के कूटनीतिक और रणनीतिक आयाम

प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल ऐतिहासिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें भविष्य के रणनीतिक संबंधों पर भी जोर दिया गया। भारत और मलेशिया ने रक्षा, सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और द्विपक्षीय व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई नई पहलों की शुरुआत की है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए उच्च स्तरीय वार्ताएं आयोजित की गईं। विश्लेषकों के अनुसार, मलेशिया के साथ भारत के संबंध 'एक्ट ईस्ट' नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, और इस यात्रा ने इन संबंधों को एक नई गति प्रदान की है।

ऐतिहासिक कूटनीति और भारतीय प्रवासियों की भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आईएनए वेटरन से मिलना 'ऐतिहासिक कूटनीति' का एक हिस्सा है, जो विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है। मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी आबादी रहती है, जिनका इतिहास भारत के स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा है। इस तरह की मुलाकातें न केवल इतिहास का सम्मान करती हैं, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

निष्कर्ष के तौर पर, प्रधानमंत्री मोदी की जयराज राजा राव से यह मुलाकात भारत की स्वतंत्रता के गुमनाम नायकों को पहचानने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह यात्रा भारत और मलेशिया के बीच न केवल व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि साझा विरासत और ऐतिहासिक बलिदानों को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाती है।

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