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महिला आरक्षण बिल पर संसद में घमासान: आज शाम 4 बजे वोटिंग, क्या सरकार जुटा पाएगी बहुमत?

महिला आरक्षण बिल पर संसद में घमासान: आज शाम 4 बजे वोटिंग, क्या सरकार जुटा पाएगी बहुमत?
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संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण, परिसीमन और चुनावी ढांचे में सुधार के विधेयक पेश किए गए हैं और सरकार इसे जरूरी सुधार बता रही है, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक कदम करार दिया है। प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को महिलाओं का अधिकार बताया। आज शाम 4 बजे इस पर वोटिंग भी होनी है। संसद का विशेष सत्र तीन दिन तक चलना निश्चित हुआ है और आज इस लिहाज से दूसरा दिन है। यहां चर्चा देश की चुनावी व्यवस्था में बड़े बदलावों पर होगी और सरकार महिला आरक्षण, परिसीमन और चुनावी ढांचे में बदलाव की बात कर रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक कदम बता रहा है।

संसद में विधेयकों की प्रस्तुति और तीखी बहस

पहले दिन लोकसभा का सत्र शुरू होते ही माहौल गर्म हो गया और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 सदन में रखा। सरकार का कहना है कि ये बदलाव चुनावी व्यवस्था को मजबूत करेंगे, लेकिन विपक्ष ने शुरुआत में ही इसका विरोध किया और इसे राजनीतिक कदम बताया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रतिनिधित्व देना उनका अधिकार है, कोई एहसान नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की आधी आबादी को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है। विपक्ष ने भी सरकार के प्रस्तावों पर सवाल उठाए।

विपक्ष के सवाल और सरकार का जवाब

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने जनगणना और जाति गिनती का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि जनगणना में देरी क्यों हो रही है। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जाति के आधार पर भी गिनती की जाएगी और इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। करीब 18 घंटे की बहस के बाद अब इस पर आज शाम 4 बजे वोटिंग होनी है। सरकार के पास फिलहाल पूरे नंबर नहीं हैं, लेकिन उसने राज्यों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है।

संसदीय गणित और सीटों का समीकरण

संवैधानिक संशोधन के लिए उपस्थित और वोट देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (जो सदन की कुल 543 सदस्यों वाली क्षमता के आधे से कम न हो) होना जरूरी है। यानी विशेष बहुमत से इसे पारित किया जाएगा। मौजूदा समय में 541 सीटों वाले सदस्यों की संरचना है। किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए लोकसभा में 360 वोटों की जरूरत होगी, बशर्ते सभी उपस्थित सदस्य वोट दें।

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