सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद Yes Bank शेयरों में भारी गिरावट, बैंक ने बताया- अब कैसे चुकाएगा 8415 करोड़ रुपये

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सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद Yes Bank शेयरों में भारी गिरावट, बैंक ने बताया- अब कैसे चुकाएगा 8415 करोड़ रुपये
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शेयर बाजार में यस बैंक के निवेशकों के लिए पिछले कुछ दिन काफी भारी रहे हैं और गुरुवार से लेकर अब तक बैंक के शेयरों में 17 फीसदी की बड़ी गिरावट आ चुकी है। सोमवार को भी बिकवाली का ये सिलसिला थमा नहीं और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर बैंक का शेयर 3 रुपये 5 पैसे और टूटकर 16 रुपये 88 पैसे के स्तर पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट के पीछे 15 अक्टूबर को आया सुप्रीम कोर्ट का एक बड़ा फैसला है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए मार्च 2020 के उस कदम को रद्द कर दिया है, जिसके तहत बैंक को संकट से उबारने यानी रीकंस्ट्रक्शन के समय एडिशनल टियर-1 यानी एटी-1 बॉन्ड्स को पूरी तरह से खत्म यानी राइट-डाउन कर दिया गया था।

बैंक की मुख्य पूंजी पर पड़ेगा असर

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद यस बैंक की घाटा सहने वाली मुख्य पूंजी यानी कॉमन इक्विटी टियर-1 यानी सीईटी-1 में कमी आने का अनुमान है। बैंक का मानना है कि सितंबर के आंकड़ों के हिसाब से उसकी ये मुख्य पूंजी दो प्रतिशत अंक यानी 240 बेसिस पॉइंट्स से ज्यादा घटकर 11 रुपये 40 पैसे नहीं बल्कि 11 दशमलव 4 प्रतिशत पर आ सकती है। हालांकि बैंक ने ये भी साफ किया है कि पूंजी में कमी का ये आकलन अभी शुरुआती है। पूरी समीक्षा के बाद ही अंतिम अकाउंटिंग और रेगुलेटरी नियमों का फैसला होगा। राहत की बात ये है कि इस असर के बावजूद बैंक का कुल टियर-1 कैपिटल रेश्यो 13 रुपये 70 पैसे के आसपास रहने की उम्मीद है। ये स्तर भारतीय बैंकिंग नियमों के तहत जरूरी न्यूनतम सीमा से ऊपर है।

इस फैसले से बैंक के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। जिस पैसे का इस्तेमाल बैंक अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए करता, अब उस पर इस भुगतान की वजह से दबाव बन सकता है। इसी वजह से बैंक अब पूंजी जुटाने के नए विकल्पों को टटोल रहा है। बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर व सीईओ विनय टोंस ने नतीजों के बाद एनालिस्ट्स से बातचीत में कहा कि बैंक अपनी ग्रोथ के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पूंजी से जुड़े कदमों का आकलन करता रहेगा, ताकि बैंक आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूंजी को लेकर कोई भी फैसला नियामक जरूरतों, पूंजी की लागत, उसकी उपलब्धता, शेयरधारकों के हित और लंबे समय के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

8415 करोड़ रुपये के भुगतान पर क्या है स्थिति

तिमाही नतीजों के बाद यस बैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी यानी सीएफओ निरंजन बनोदकर ने पूरे मामले पर स्थिति साफ की। उन्होंने एनालिस्ट्स को बताया कि बॉन्ड्स को किस तरह से और कब बहाल किया जाएगा, साथ ही उन पर मिलने वाले ब्याज यानी कूपन का भुगतान कैसे होगा, इसका अभी आकलन किया जा रहा है। यस बैंक में जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन यानी एसएमबीसी सबसे बड़ी निवेशक है, जिसकी बैंक में 24 रुपये 90 पैसे यानी 24 दशमलव 9 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बनोदकर के मुताबिक बॉन्डधारकों को पैसा लौटाने की प्रक्रिया बॉन्ड के मूल दस्तावेजों यानी इन्फॉर्मेशन मेमोरेंडम की शर्तों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विवरण पर निर्भर करेगी।

बैंक ने निवेशकों को ये भरोसा दिलाया है कि जब तक वो कानूनी विकल्पों की जांच कर रहा है, तब तक उसे बॉन्डधारकों को तुरंत पैसे देने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय, 8415 करोड़ रुपये के मूल बॉन्ड की बकाया रकम को बैंक अपनी बैलेंस शीट में रिजर्व से हटाकर उधारी या देनदारी यानी लायबिलिटीज वाले हिस्से में डाल देगा। बनोदकर ने साफ शब्दों में कहा कि अभी इस उधारी पर कोई भुगतान नहीं हो रहा है और न ही बैंक की तिजोरी से कोई नकद पैसा बाहर जा रहा है। ये सिर्फ एक अकाउंटिंग प्रक्रिया है जिसे बैंक को अपने खातों में दोबारा दर्ज करना होगा।

बकाया ब्याज की उलझन के साथ कानूनी रास्तों की तलाश

यस बैंक ने 8415 करोड़ रुपये की मूल रकम को वापस खातों में जोड़ने से पूंजी पर पड़ने वाले असर का हिसाब तो लगा लिया है, लेकिन एक पेंच अभी भी फंसा हुआ है। पिछले सालों के दौरान इन बॉन्ड्स पर जो ब्याज यानी कूपन इकट्ठा हुआ है और जिसका भुगतान नहीं हुआ, उसका क्या किया जाएगा, ये अभी तय नहीं हो पाया है। इस वजह से बैंक के ऊपर एक अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका बनी हुई है।

क्या बैंक इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा? इस सवाल पर सीईओ विनय टोंस ने कहा कि बैंक अगला कदम उठाने से पहले अदालत के फैसले का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम फैसले की हर बारीकी को समझ रहे हैं, जिसमें हमारे पास मौजूद कानूनी विकल्प और आगे उठाए जाने वाले सही कदम शामिल हैं।

बैंक के कारोबार में दिखी मजबूती

पूंजी पर पड़ने वाले इस संभावित असर के बावजूद यस बैंक ने साफ किया है कि उसके बिजनेस ग्रोथ की प्राथमिकताओं में कोई बदलाव नहीं आया है और सितंबर तिमाही के दौरान बैंक के कर्ज बांटने के आंकड़ों में अच्छी रफ्तार देखी गई है। सितंबर तिमाही के दौरान बैंक के एडवांस यानी दिए गए कुल कर्ज में सालाना आधार पर 23 रुपये 70 पैसे यानी 23 दशमलव 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं अगर एफसीएनआर बी जमा से जुड़े विदेशी मुद्रा के टर्म लोन को हटाकर देखा जाए, तो बैंक की सामान्य लोन ग्रोथ 17 रुपये 60 पैसे प्रतिशत रही है।

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