अमेरिका ने माना भारत का लोहा! दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बना भारत

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को रिफाइनिंग महाशक्ति बताया है और कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रसंस्करण के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ चर्चा करेगा।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और ऊर्जा बाजार में भारत के बढ़ते प्रभाव को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर बड़ी स्वीकृति मिली है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत की ऊर्जा क्षमताओं का खुला लोहा मानते हुए उसे एक वैश्विक रिफाइनिंग महाशक्ति करार दिया है। भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मंगलवार दोपहर को मुंबई पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान यह महत्वपूर्ण बयान दिया। उनके इस दौरे और बयानों से भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग, आर्थिक साझेदारी तथा द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों को एक नया आयाम मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

वेनेजुएला के कच्चे तेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ चर्चा पर बड़ा बयान

अपनी इस उच्च-स्तरीय यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन प्रशासन रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ वेनेजुएला के कच्चे तेल की और अधिक रिफाइनिंग करने के मामलों पर गंभीर चर्चा करेगा। जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि दुनिया की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने में भारत किस प्रकार की अहम भूमिका निभा सकता है, तो उन्होंने विस्तार से जवाब दिया। रुबियो ने कहा कि भारत एक प्रमाणित रिफाइनिंग महाशक्ति है जिसके पास भारी मात्रा में कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने की असाधारण तकनीकी क्षमता मौजूद है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत ने अतीत में भी ऐसा सफलतापूर्वक किया है और जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में वेनेजुएला का अधिक तेल उपलब्ध होगा, भारत इस भूमिका को फिर से पूरी क्षमता के साथ निभा सकता है।

वेनेजुएला की उत्पादन क्षमताओं के बारे में बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वहां पहले से ही तेल के पट्टे मौजूद हैं जिनका उपयोग करके वे खुद अपने स्तर पर अधिक उत्पादन कर सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे यह दावा नहीं कर रहे हैं कि दुनिया भर में हो रही विभिन्न घटनाओं के कारण वैश्विक स्तर पर पैदा होने वाली किसी भी प्रकार की ऊर्जा कमी को केवल वेनेजुएला रातों-रात अकेला पूरा कर सकता है। लेकिन उनका यह भी मानना था कि समय बीतने के साथ यह स्थिति निश्चित रूप से सुधरेगी और अल्पावधि में यह वैश्विक ऊर्जा बाजार को संभालने में निश्चित रूप से बड़ी मदद कर सकती है।

प्रतिबंधों की बाधाओं को दूर करने की तैयारी और तेल खरीद में विविधता

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह भी माना कि यह उन प्रमुख विषयों में से एक है जिस पर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल आपस में चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि हमने अतीत में भी भारत के साथ इस विषय पर बातचीत की है और भारतीय पक्ष इसके लिए पूरी तरह तैयार नजर आता है तथा वे ऐसा करने के लिए अत्यधिक इच्छुक भी हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रक्रिया में प्रतिबंधों आदि के रूप में कुछ प्रशासनिक और कूटनीतिक बाधाएं आ सकती हैं, जिन्हें दोनों देशों को मिलकर दूर करना होगा और रुबियो ने विशेष रूप से यह जानकारी दी कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वेनेजुएला में तेल उत्पादन और प्रसंस्करण के बारे में भारत की प्रमुख निजी कंपनी रिलायंस के साथ विशेष चर्चा करेगा। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की भी सराहना की कि भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपनी तेल खरीद के स्रोतों में विविधता लाने में पर्याप्त प्रगति की है, जिसे उन्होंने एक बेहद समझदारी भरा और व्यावहारिक कदम बताया है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा जल्द होने की उम्मीद

ऊर्जा सहयोग के अलावा दोनों देशों के बीच आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ी प्रगति देखने को मिल रही है और मार्को रुबियो ने इस बात पर गहरा भरोसा जताया है कि भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापार समझौता बहुत जल्द ही पूरा हो सकता है। उन्होंने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए बताया कि अब इस व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए केवल कुछ ही छोटे-छोटे मुद्दे सुलझने बाकी रह गए हैं। उन्होंने विश्वास के साथ कहा कि हम इस व्यापार समझौते को पूरी तरह अंतिम रूप देने के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं और चूंकि केवल कुछ ही चीजें अब सुलझानी बाकी हैं, इसलिए उन्हें पूरी उम्मीद है कि यह समझौता बहुत जल्द धरातल पर उतर जाएगा। उनके ये महत्वपूर्ण बयान ऐसे संवेदनशील समय में आए हैं जब नई दिल्ली और वाशिंगटन दोनों ही पक्ष अपनी व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही दोनों देश टैरिफ यानी आयात शुल्क, बाजार तक सीधी पहुंच और अन्य जटिल आर्थिक मुद्दों पर बचे हुए मतभेदों को पूरी तरह पाटने की कोशिश में जुटे हुए हैं।

मुंबई में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्च-स्तरीय बैठक

भारत की अपनी इस तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन मंगलवार को मुंबई में मार्को रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के साथ एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय बैठक की। इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर और भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी विशेष रूप से मौजूद रहे और मार्को रुबियो 20 अक्टूबर को अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मुंबई पहुंचे थे। इस व्यापक दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने, व्यापार वार्ता को निष्कर्ष तक पहुँचाने और दोनों देशों के बीच व्यापक व रणनीतिक द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने पर मुख्य रूप से चर्चा होने की पूरी उम्मीद है।

जामनगर में रिलायंस रिफाइनरियों का दौरा और मुकेश अंबानी से मुलाकात

अपने इस दौरे के अगले चरण के तहत बुधवार यानी 21 अक्टूबर को मार्को रुबियो के गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की विशाल रिफाइनरियों का दौरा करने का आधिकारिक कार्यक्रम तय किया गया है। उल्लेखनीय है कि ये रिफाइनरियां दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स हैं, जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक मील का पत्थर मानी जाती हैं। जामनगर के इस दौरे के दौरान उनके रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी से भी मुलाकात करने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जहां ऊर्जा क्षेत्र में आपसी निवेश और व्यापार को बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श होगा।

इस साल अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह दूसरा भारत दौरा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय संबंधों में लगातार कुछ रणनीतिक और आर्थिक तनाव बने हुए हैं, जिन्हें दूर करने के लिए इस प्रकार की उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बैठकें बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं और इससे पहले इसी साल मई के महीने में अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ उच्च-स्तरीय बातचीत की थी। इसके अलावा उन्होंने पिछले दौरे के दौरान ‘क्वाड’ (Quad) यानी चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद देशों के विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, जो भारत-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की साझी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।