बांग्लादेश में आगामी संसदीय चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, एक प्रमुख हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया है और यह घटना बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनावों से ठीक पहले हुई है, जिससे देश के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में हलचल मच गई है। प्रमाणिक ने गोपालगंज-3 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल किया था, जो पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट रही है। इस सीट पर 50% से अधिक हिंदू मतदाता हैं, जो इसे अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र बनाते हैं।
विवादित नामांकन और आरोप
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक, जो पेशे से वकील हैं और बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) नामक एक हिंदुत्ववादी। गठबंधन के महासचिव भी हैं, ने अपने नामांकन को रद्द किए जाने पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रमाणिक ने बताया कि बांग्लादेशी कानून के तहत, एक निर्दलीय उम्मीदवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र के 1% मतदाताओं के हस्ताक्षर प्रस्तुत करने होते हैं। उन्होंने इस नियम का पालन करते हुए आवश्यक हस्ताक्षर जमा किए थे। हालांकि, बाद में उन मतदाताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आकर यह दावा किया कि उनके हस्ताक्षर नहीं लिए गए थे। प्रमाणिक का आरोप है कि पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं ने इन मतदाताओं पर दबाव डाला, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने अपने बयानों से पलटा। इस घटना के बाद, रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित कर दिया और गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द कर दिया। प्रमाणिक ने इस कार्रवाई को एक राजनीतिक साजिश करार दिया है, जिसका उद्देश्य उन्हें चुनाव लड़ने से रोकना है।
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक और BJHM का परिचय
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) के महासचिव हैं, जो कुल 23 संगठनों का एक हिंदुत्ववादी गठबंधन है और यह संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा हुआ है और बांग्लादेश में हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ावा देने का काम करता है। BJHM बांग्लादेश के विभिन्न इलाकों में 350 से अधिक वैदिक स्कूल चलाता है, जहाँ बच्चों को भगवद गीता सहित कई हिंदू ग्रंथों की शिक्षा दी जाती है। 2023 में, प्रमाणिक ने इन वैदिक विद्यालयों के बारे में कहा था कि उनका लक्ष्य बचपन से ही बच्चों में हिंदू गौरव की भावना पैदा करना है, ताकि हिंदू धर्म को बढ़ावा मिल सके और उसकी रक्षा की जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि हिंदू धर्म। बांग्लादेश में इस समय अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। प्रमाणिक का दावा है कि उन्हें अपनी जीत पर पूरा भरोसा था, खासकर गोपालगंज-3 सीट पर जहां 3 लाख मतदाताओं में से 51% हिंदू हैं। उनका मानना है कि BNP ने उन्हें रास्ते से हटाया क्योंकि। इस सीट पर उसके जीतने की संभावना बिल्कुल भी नहीं थी। उन्होंने चुनाव आयोग से शिकायत करने और न्याय न मिलने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
एक और हिंदू उम्मीदवार का नामांकन रद्द
गोबिंद चंद्र प्रमाणिक की तरह, एक और हिंदू उम्मीदवार, दुलाल बिस्वास का भी नामांकन वापस कर दिया गया है। दुलाल बिस्वास को एक पंजीकृत राजनीतिक पार्टी गोनो फोरम ने टिकट दिया था। चूंकि वह एक पार्टी के उम्मीदवार थे, उन पर 1% मतदाताओं के हस्ताक्षर का नियम लागू नहीं हुआ। हालांकि, उनके नामांकन को दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर रद्द कर दिया गया और दुलाल बिस्वास ने नए सिरे से दस्तावेज जमा करने की बात कही है। इसके अतिरिक्त, गोपालगंज-2 सीट से एक और निर्दलीय हिंदू उम्मीदवार उत्पल बिस्वास चुनाव लड़ रहे हैं और यह सीट कभी शेख हसीना के चचेरे भाई शेख सलीम की पारंपरिक सीट थी। उत्पल बिस्वास ने कहा है कि वह किसानों और वंचितों के बीच काम करते हैं और उन्हें उम्मीद है कि वे उन्हें वोट देंगे। इन घटनाओं से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों के लिए चुनावी प्रक्रिया की चुनौतियों पर प्रकाश पड़ता है।
व्यापक राजनीतिक परिदृश्य और चुनाव की पृष्ठभूमि
बांग्लादेश में यह चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब देश एक बड़े राजनीतिक उथल-पुथल से गुजरा है। शेख हसीना की सरकार 5 अगस्त 2024 को छात्रों के आंदोलन के बाद गिर गई थी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और भारत चली गईं। 8 अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन किया गया था। अंतरिम सरकार ने 6 महीने के भीतर चुनाव कराने का वादा किया था, लेकिन बाद में समय सीमा बढ़ा दी गई, और अब आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने वाले हैं। हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP को बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी माना जा रहा था। हालांकि, 30 दिसंबर को खालिदा जिया की लंबी बीमारी के चलते मृत्यु हो गई। अब BNP की कमान खालिदा के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है, जो 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे हैं और ढाका एयरपोर्ट पर उनका स्वागत BNP के लगभग 1 लाख कार्यकर्ताओं ने किया। रहमान ने 29 दिसंबर को ढाका-17 और बोगुरा-6 सीट से नामांकन दाखिल किया है। बोगुरा-6 रहमान की मां खालिदा जिया की पारंपरिक सीट रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तारिक रहमान BNP के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं।
हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा
चुनावी माहौल के बीच, बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। भारत विरोधी नेता उस्मान हादी की 18 दिसंबर को हुई मौत के बाद से इस्लामिक संगठनों ने हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बांग्लादेश में पिछले 15 दिनों के भीतर 4 हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है। 18 दिसंबर को ईशनिंदा के झूठे आरोप में दीपू चंद्र की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद, 24 दिसंबर को भीड़ ने 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की पीट-पीटकर हत्या कर दी और 29 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में 42 वर्षीय कपड़ा फैक्ट्री कर्मचारी बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन घटनाओं के दौरान भीड़ ने कई हिंदू घरों में आगजनी भी की और यह बढ़ती हिंसा अल्पसंख्यक समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गई है और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक और अन्य हिंदू उम्मीदवारों के नामांकन रद्द होने की घटनाएं इस पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं, क्योंकि यह अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व और उनके अधिकारों के संरक्षण पर गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं।