बांग्लादेश में तख्तापलट की साजिश नाकाम, जनरल जमां ने ऐसे पलटा खेल

बांग्लादेश में एक 'सॉफ्ट तख्तापलट' की कोशिश को सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां ने नाकाम कर दिया है। एनएसए खलीलुर रहमान के गुप्त प्लान और सेना के भीतर नियुक्तियों के खेल का पर्दाफाश हुआ है।

बांग्लादेश की राजनीति और सुरक्षा गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक 'सॉफ्ट तख्तापलट' की साजिश का खुलासा हुआ। ढाका के पावर गलियारों में रची गई इस साजिश की भनक सरकार को भी काफी देर से लगी और इसे 'सॉफ्ट कूप' का नाम दिया गया है, जिसका अर्थ है बिना किसी खून-खराबे या गोलीबारी के सत्ता पर कब्जा करना। इस पूरी साजिश का मुख्य निशाना कोई और नहीं, बल्कि बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इस साजिश के पीछे किसी दुश्मन देश का हाथ नहीं, बल्कि यूनुस सरकार के ही एक बेहद ताकतवर व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है।

NSA खलीलुर रहमान का 'सीक्रेट प्लान' क्या था?

इस पूरी कहानी के केंद्र में बांग्लादेश के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) खलीलुर रहमान हैं। 'नॉर्थईस्ट न्यूज' की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, खलीलुर रहमान ने सेना के भीतर अपनी पकड़ मजबूत करने और आर्मी चीफ को दरकिनार करने के लिए एक बेहद शातिर चाल चली थी। उनका मुख्य उद्देश्य सेना के दो सबसे महत्वपूर्ण पदों - चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) और प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO) पर अपने वफादार अधिकारियों को तैनात करना था।

मकसद बिल्कुल साफ था: जनरल वकार-उज-जमां को चारों तरफ से घेरना और उन्हें प्रशासनिक रूप से इतना कमजोर कर देना कि वे खुद ही पद छोड़ने पर मजबूर हो जाएं। जनरल जमां का कार्यकाल जून 2027 तक है, लेकिन इस साजिश के जरिए उन्हें समय से पहले रिटायरमेंट की ओर धकेलने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। हालांकि, जनरल जमां ने वक्त रहते इस खतरे को भांप लिया। और जवाबी कार्रवाई करते हुए इन नियुक्तियों पर रोक लगा दी।

जमात-ए-इस्लामी का कनेक्शन और सेना पर कब्जा

इस साजिश की गहराई को समझने के लिए सेना के भीतर होने वाली नियुक्तियों को देखना जरूरी है। जनवरी में दो बड़े सैन्य अधिकारी रिटायर होने वाले थे। एनएसए खलीलुर रहमान चाहते थे कि लेफ्टिनेंट जनरल एस. एम. कमरुल हसन को नया CGS बनाया जाए। यह पद सेना के बजट और ऑपरेशंस को नियंत्रित करता है। वहीं, दूसरी ओर वे लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैजुर रहमान को PSO के पद पर। देखना चाहते थे, जो सीधे चीफ एडवाइजर के कार्यालय के अधीन काम करता है।

रक्षा सूत्रों का दावा है कि लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान के संबंध जमात-ए-इस्लामी से काफी गहरे हैं। यदि ये नियुक्तियां सफल हो जातीं, तो सेना पर जमात का प्रभाव काफी बढ़ जाता। भविष्य में जनरल जमां के रिटायर होने के बाद फैजुर रहमान के अगले सेना प्रमुख बनने का रास्ता साफ हो जाता और यह एक ऐसा रणनीतिक बदलाव होता जो बांग्लादेश की पूरी सत्ता संरचना को जमात-ए-इस्लामी की विचारधारा की ओर मोड़ देता।

'खूनी गलियारा' विवाद और पुरानी दुश्मनी

एनएसए खलीलुर रहमान और आर्मी चीफ जनरल जमां के बीच यह टकराव नया नहीं है। इसकी जड़ें अप्रैल 2025 के एक विवाद में छिपी हैं। एनएसए बनने के तुरंत बाद रहमान ने म्यांमार सीमा पर एक 'ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर' (मानवीय गलियारा) खोलने का प्रस्ताव रखा था। उनका तर्क था कि इसके जरिए अराकान आर्मी को मदद पहुंचाई जानी चाहिए।

लेकिन जनरल वकार-उज-जमां ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने इसे 'ह्यूमैनिटेरियन कॉरिडोर' के बजाय 'ब्लडी कॉरिडोर' (खूनी रास्ता) करार दिया था। जनरल को अंदेशा था कि इस रास्ते का इस्तेमाल हथियारों की तस्करी के लिए किया जा सकता है, जिससे बांग्लादेश की सुरक्षा को खतरा पैदा होगा। यह तनातनी इतनी बढ़ गई थी कि जनरल जमां ने एनएसए खलीलुर। रहमान के ढाका कैंटोनमेंट में प्रवेश पर ही पाबंदी लगा दी थी।

राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं और फरवरी के चुनाव

इस पूरे सत्ता संघर्ष के पीछे राजनीतिक समीकरण भी काम कर रहे हैं और बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने की संभावना है। ऐसी खबरें हैं कि खलीलुर रहमान अपनी कुर्सी बचाने के लिए खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी (BNP) के साथ भी संपर्क में हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने जून 2025 में ही बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान के साथ बातचीत का रास्ता खोल लिया था। वे एक साथ दो नावों पर सवार होना चाहते थे - एक तरफ यूनुस सरकार में बने रहना और दूसरी तरफ विपक्ष को यह भरोसा दिलाना कि वे उनके वफादार हैं।

म्यांमार बॉर्डर पर मंडराता युद्ध का खतरा

जब ढाका में यह पावर गेम चल रहा है, तब बांग्लादेश की सीमाएं सुलग रही हैं और चटगांव हिल ट्रैक्ट्स और म्यांमार बॉर्डर पर स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। म्यांमार की जुंटा सरकार ने सीमा पर चीनी CASC CH3A कॉम्बैट ड्रोन्स तैनात कर दिए हैं और वे अराकान आर्मी पर बड़े हमले की तैयारी में हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल अराकान आर्मी और रोहिंग्या गुट (ARSA) द्वारा म्यांमार सेना पर हमले के लिए किया जा रहा है और यदि वहां संघर्ष बढ़ता है, तो बांग्लादेश की सेना को बाहरी और आंतरिक दोनों मोर्चों पर एक साथ लड़ना होगा। जनरल जमां ने फिलहाल तख्तापलट तो टाल दिया है, लेकिन सिस्टम। के भीतर छिपे गद्दारों से निपटना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।