Border 2 Review: सनी देओल की दहाड़ और वरुण का जलवा, रोंगटे खड़े कर देगी ये फिल्म

सनी देओल और वरुण धवन की 'बॉर्डर 2' रिलीज हो गई है। 29 साल बाद लौटी इस विरासत ने सिनेमाघरों में तहलका मचा दिया है। जानें कैसी है फिल्म।

29 साल का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ। जिस 'बॉर्डर' ने 1997 में पूरे देश को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया था, आज उसी विरासत को आगे बढ़ाने सनी देओल अपनी नई पलटन के साथ मैदान-ए-जंग में उतर चुके हैं। 'बॉर्डर 2' सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि यह हर हिंदुस्तानी की रगों में दौड़ने वाला वो जज्बा है, जिसे डायरेक्टर अनुराग सिंह ने बड़े पर्दे पर बेहद भव्यता के साथ उतारा है। फिल्म की शुरुआत से ही जब सनी देओल की एंट्री। होती है, तो थिएटर तालियों और सीटियों से गूंज उठता है।

कहानी: 1971 के युद्ध की अनकही वीरता

फिल्म की कहानी हमें सीधे 1971 के उस ऐतिहासिक युद्ध में ले जाती है, जब पाकिस्तान के 'ऑपरेशन चंगेज खान' का भारतीय जांबाजों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था। 'बॉर्डर 2' सिर्फ जमीन की लड़ाई नहीं दिखाती, बल्कि यह बैटल ऑफ पुंछ, बैटल ऑफ बसंतर और समंदर में INS खुकरी के डिफेंस की उस अनकही वीरता को पर्दे पर जीवंत करती है। लेफ्टिनेंट कर्नल फतेह सिंह कलेर (सनी देओल) अपनी 6 सिख रेजिमेंट के साथ दुश्मन के लिए काल बन जाते हैं। उनका साथ दे रहे हैं मेजर होशियार सिंह (वरुण धवन) और आसमान से आग बरसाते फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों (दिलजीत दोसांझ)। वहीं, समंदर की लहरों पर मोर्चा संभाले हैं लेफ्टिनेंट कमांडर एम. एस और रावत (अहान शेट्टी)।

निर्देशन: अनुराग सिंह का कमाल

जे पी दत्ता की विरासत को संभालना आसान नहीं था, लेकिन अनुराग सिंह ने इसे बखूबी निभाया है। उन्होंने 1971 के युद्ध की रूह को आज के आधुनिक सिनेमाई तकनीक के साथ ऐसे जोड़ा है कि फिल्म देखते वक्त आप खुद को मोर्चे पर खड़ा महसूस करते हैं। फिल्म के वॉर सीक्वेंस किसी भी बड़े इंटरनेशनल सिनेमा को टक्कर देते हैं। चाहे वो जमीन पर होने वाली आमने-सामने की भिड़ंत हो या हवा में लड़ाकू विमानों की गरज, एक-एक फ्रेम को बड़ी बारीकी से बुना गया है। संवाद तीखे हैं और सीधे दिल पर चोट करते हैं, जो सिनेमाघरों को स्टेडियम में बदल देते हैं।

एक्टिंग: सनी पाजी की दहाड़ और वरुण का सरप्राइज

सनी देओल इस फिल्म की आत्मा हैं। उनकी दहाड़ आज भी उतनी ही प्रभावशाली है जितनी तीन दशक पहले थी। मेकर्स ने उन्हें सिर्फ कैमियो तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि पूरी फिल्म उनके इर्द-गिर्द घूमती है। वहीं, वरुण धवन ने अपनी एक्टिंग से सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया है। उन्होंने अपने किरदार में जो गंभीरता और आग दिखाई है, वह काबिले तारीफ है। दिलजीत दोसांझ फिल्म के चमकते सितारे हैं, उनकी कॉमिक टाइमिंग और इमोशनल सीन फिल्म को संतुलित करते हैं। अहान शेट्टी ने भी एक मैच्योर परफॉर्मेंस दी है।

संगीत और तकनीकी पक्ष

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर रोंगटे खड़े कर देने वाला है। 'संदेशे आते हैं' का नया वर्जन और 'घर कब आओगे' का एहसास आंखों में आंसू ला देता है। सिनेमैटोग्राफी लाजवाब है, जो युद्ध के मैदान की धूल और बारूद को महसूस कराती है। वीएफएक्स का काम भी काफी बेहतर है, जो हवाई और समुद्री युद्ध के दृश्यों को वास्तविक बनाता है।

निष्कर्ष: क्यों देखें ये फिल्म?

'बॉर्डर 2' देशभक्ति का वो डोज है जो हर हिंदुस्तानी के लिए जरूरी है। यह फिल्म हमें उन बलिदानों की याद दिलाती है जो हमारे जवान सरहद पर देते हैं। अगर आप सनी देओल के फैन हैं और एक बेहतरीन वॉर ड्रामा देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए ही है। हमारी तरफ से इस फिल्म को 4 और 5 स्टार्स।