बड़ा खुलासा: भारत अमेरिका ट्रेड डील पर आया मार्को रुबियो का बड़ा बयान, समझौते के बेहद करीब दोनों देश

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पुष्टि की है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। रुबियो ने रूसी तेल खरीद और प्रतिबंधों में छूट का भी जिक्र किया। वह मुंबई और जामनगर के दौरे पर आ रहे हैं।

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही रणनीतिक और आर्थिक वार्ताओं के बीच एक बेहद अहम और बड़ा अपडेट सामने आया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि कर दी है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। इस बहुप्रतीक्षित समझौते को लेकर जल्द ही कोई बड़ा फैसला सामने आ सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों को एक नया आयाम मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।

सोमवार, 19 अक्टूबर को मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस कूटनीतिक प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि हम अभी भारत के साथ एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं और हम इसके बहुत करीब हैं। रुबियो का यह महत्वपूर्ण बयान ऐसे समय पर आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी ईंधन की बिक्री पर लगाए जाने वाले कई प्रतिबंधों को फिलहाल टालने का एक रणनीतिक निर्णय लिया है। राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

रूस से तेल और गैस खरीद के प्रतिबंधों पर स्पष्टीकरण

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने रूस से तेल और गैस की खरीद पर लगाए गए प्रतिबंधों के संवेदनशील मुद्दे पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान अमेरिका को कई प्रतिबंधों में आवश्यक छूट देनी पड़ी है। इसके पीछे मुख्य वजह यह थी कि इन प्रतिबंधों का सीधा और नकारात्मक असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ रहा था। रुबियो ने यह भी स्वीकार किया कि कूटनीति और वैश्विक राजनीति में इन सभी जटिल पहलुओं को बहुत सावधानी से संभालना पड़ता है ताकि दुनिया भर के बाजारों में असंतुलन न पैदा हो।

मार्को रुबियो ने व्यापार समझौते की प्रक्रिया पर आगे प्रकाश डालते हुए कहा कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इस तरह के अन्य गंभीर मामलों पर कोई बड़ा फैसला लेते हैं, तो प्रशासन इन सभी व्यावहारिक बातों को पूरी तरह ध्यान में रखता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दुनिया के हर देश के सामने कई प्रकार के जटिल कारक और भू-राजनीतिक विवशताएं होती हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

भौगोलिक वास्तविकता और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत

भू-राजनीति और कूटनीति के कई अन्य पहलुओं पर चर्चा करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भौगोलिक स्थिति एक अकाट्य और बड़ी वास्तविकता है। दुनिया के कुछ खास देशों के लिए यह बहुत मुश्किल होता है कि वे रातों-रात ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत तलाश सकें। उन्होंने इसे किसी प्रकार का बहाना बताने से इनकार करते हुए कहा कि यह यथार्थवादी बातें हैं, और जब अमेरिका या कोई भी राष्ट्र अपनी विदेश नीति का निर्धारण करता है, तो उसे इन सभी बातों और वैश्विक हितों के बीच एक बहुत ही संवेदनशील संतुलन बनाना पड़ता है।

भारत का दौरा और कूटनीतिक कार्यक्रम

व्यापारिक समझौतों और ऊर्जा कूटनीति को और अधिक गति देने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अब आधिकारिक तौर पर भारत दौरे पर आने वाले हैं। वर्तमान में उज्बेकिस्तान में मौजूद रुबियो मंगलवार को अपनी यात्रा के तहत मुंबई पहुंचेंगे। मुंबई में उनका मुख्य कार्यक्रम भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करना है। इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार संबंधों पर प्रमुखता से चर्चा होने की पूरी संभावना है।

अपने इस बहुप्रतीक्षित दौरे के दौरान मार्को रुबियो मुंबई के बाद जामनगर की भी महत्वपूर्ण यात्रा करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना, क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का खुला आदान-प्रदान करना तथा दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की नई संभावनाओं पर गहन चर्चा करना है। इसके अलावा, रुबियो भारत के प्रमुख कारोबारी नेताओं से भी मुलाकात करेंगे ताकि दोनों देशों के बीच निवेश के नए अवसरों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा सके और निजी क्षेत्रों की भागीदारी को और सुदृढ़ किया जा सके।

जामनगर दौरे का रणनीतिक महत्व

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का जामनगर दौरा कूटनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम माना जा रहा है। गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित दुनिया की सबसे बड़ी और अत्याधुनिक रिफाइनरी स्थित है। जामनगर की यह विशाल रिफाइनरी रूसी यूराल कच्चे तेल को बड़े पैमाने पर रिफाइन करने वाली दुनिया की शीर्ष तीन कंपनियों की सूची में शुमार है। ऐसे में रुबियो की जामनगर यात्रा और जामनगर स्थित रिफाइनरी का यह संदर्भ रूस से ऊर्जा आयात और वैश्विक प्रतिबंधों के बीच अमेरिका के दृष्टिकोण को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। इस पूरी कूटनीतिक हलचल से यह साफ जाहिर होता है कि भारत और अमेरिका अपने आपसी व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।