खरगे की थरूर को नसीहत: गांधी जयंती पर सिर्फ अंग्रेजी लेख न लिखें, धरने में भी आएं

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने शशि थरूर पर तंज कसते हुए कहा कि वे केवल अंग्रेजी अखबारों में लेख न लिखें, बल्कि जमीन पर उतरकर पार्टी के धरने और प्रदर्शनों में भी शामिल हों।

मंगलवार को आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर के बीच एक बेहद दिलचस्प और चर्चा का विषय बना राजनीतिक संवाद देखने को मिला। इस बातचीत ने बैठक के गंभीर माहौल में हंसी के पल पैदा कर दिए और यह संवाद उस समय हुआ जब पार्टी के वरिष्ठ नेता भविष्य की रणनीतियों और आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा कर रहे थे। खरगे के जवाब ने न केवल थरूर को बल्कि बैठक में मौजूद अन्य नेताओं को भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया।

गांधी जयंती पर थरूर का सुझाव

बैठक की कार्यवाही के दौरान केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस पार्टी को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर एक विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित करना चाहिए और थरूर ने अपने सुझाव के पीछे यह तर्क दिया कि यदि कांग्रेस इस अवसर पर कोई बड़ा और प्रभावी कार्यक्रम नहीं करती है, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मौके का पूरा फायदा उठा सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा इस दिन का उपयोग अपनी छवि को बेहतर बनाने और गांधीवादी विरासत पर अपना दावा ठोकने के लिए कर सकती है।

खरगे की चुटकी और तीखा तंज

थरूर के इस सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तुरंत मोर्चा संभाला और मजाकिया लहजे में उन पर तंज कसा। " खरगे यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे यह भी पूछा कि क्या पार्टी द्वारा आयोजित ऐसे किसी कार्यक्रम में थरूर वास्तव में शारीरिक रूप से उपस्थित होंगे या फिर उन्हें केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय देखा जाएगा और अंग्रेजी अखबारों में उनके लेख ही पढ़ने को मिलेंगे। खरगे की यह बात सुनते ही पूरी बैठक में हंसी के फव्वारे छूट पड़े और कई नेताओं के चेहरे पर मुस्कान आ गई।

सीडब्ल्यूसी बैठक की मुख्य बातें

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की यह महत्वपूर्ण बैठक लगभग 2 घंटे 30 मिनट तक चली। इस दौरान पार्टी के भविष्य के रोडमैप और कार्ययोजना पर गहन विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मौजूद कई नेताओं ने राहुल गांधी के नेतृत्व और उनकी सक्रियता की जमकर प्रशंसा की। हालांकि बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनौतियों का सामना करना था, लेकिन बीच-बीच में हुई इस तरह की हल्की-फुल्की बातचीत ने नेताओं के बीच के आपसी संबंधों की एक झलक भी पेश की।

पुराने वाकयों का संदर्भ

यह पहली बार नहीं है जब मल्लिकार्जुन खरगे ने शशि थरूर की कार्यशैली पर इस तरह का तंज कसा है। इससे पहले भी एक सीडब्ल्यूसी बैठक में खरगे ने बिना किसी का नाम लिए उन नेताओं की आलोचना की थी जो सूट पहनते हैं और अंग्रेजी अखबारों में लेख लिखते हैं और वह संदर्भ हरिद्वार में हुए खरगे के एक कथित अपमान से जुड़ा था।

पिछले मतभेद और थरूर का रुख

शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच पहले भी कुछ मुद्दों पर असहमति देखी गई है। पिछले साल थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए एक लेख लिखा था, जिसे लेकर कांग्रेस के भीतर काफी चर्चा हुई थी और कुछ नेताओं ने इस पर आपत्ति भी जताई थी। उस समय भी मल्लिकार्जुन खरगे ने थरूर के इस रुख पर चुटकी ली थी और मंगलवार की घटना ने एक बार फिर यह दर्शाया कि खरगे चाहते हैं कि पार्टी के बौद्धिक चेहरे केवल लेखनी और सोशल मीडिया तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर होने वाले संघर्षों में भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।