कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर एक बहुत ही तीखा और सीधा हमला बोला है। राहुल गांधी ने बेहद कड़े शब्दों में सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि विपक्ष उन्हें चारों तरफ से घेर रहा है और वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने प्रशासन को ललकारते हुए कहा कि जितनी पुलिस बुलानी हो, चाहे वह 10000 हो, 20000 हो या 50000 हो, बुला लीजिए और गिरफ्तार कर लीजिए, लेकिन यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे हिंदुस्तान की जनता की आवाज की हर हाल में हिफाजत करेंगे।
एक दशक का संघर्ष और विरोधियों की पहचान
राहुल गांधी ने वर्तमान शासन और आरएसएस के खिलाफ अपने लंबे संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह इन ताकतों के खिलाफ 1 दशक से भी ज्यादा समय से लड़ रहे हैं। इस लंबे राजनीतिक संघर्ष के दौरान उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को बहुत करीब से समझा है। राहुल गांधी ने दावा किया कि वह उन्हें उतनी ही अच्छी तरह समझते हैं जितना कोई भी अपने विरोधी को समझ सकता है और उन्होंने कहा कि वह उन्हें अंदर तक जानते हैं और उनकी हर चाल से पूरी तरह वाकिफ हैं। राहुल गांधी के अनुसार, इन लोगों की सबसे बड़ी पहचान कायरता है। उन्होंने संकेत दिया कि उनकी कार्रवाई डर से प्रेरित है और अब उनका दायरा धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है।
विशिष्ट व्यक्तियों पर निशाना और सिमटता दायरा
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने सरकार और उससे जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तियों का नाम लेने में कोई संकोच नहीं किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने दावा किया कि ये लोग अब धीरे-धीरे घिरते जा रहे हैं और उनके चारों तरफ से घेरा छोटा होता जा रहा है। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया कि वे चाहे सभी नेताओं और युवाओं को गिरफ्तार कर लें, लेकिन विपक्ष के पास वह जानकारी पहले से मौजूद है जिसकी उन्हें जरूरत है और वे इस बल प्रयोग से डरने वाले नहीं हैं।
युवाओं का आह्वान और संविधान की रक्षा का संकल्प
देश की युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने उनके साहस पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने भारत के युवाओं से अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखने का आह्वान किया और उन्हें आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी और पूरा विपक्ष उनके साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने भारत के संविधान की रक्षा करने का संकल्प लिया और यह सुनिश्चित करने की बात कही कि पिछले 10 से 15 सालों में देश के साथ जो कुछ भी हुआ है, वह दोबारा कभी न हो। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार और संविधान पर हमला करने वालों को करारी शिकस्त मिले।
प्रियंका गांधी का तानाशाही और धांधली का आरोप
राहुल गांधी के साथ सुर मिलाते हुए प्रियंका गांधी ने भी सांसदों की हिरासत को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले तो 254 सांसदों के साथ बदसलूकी की और फिर उन्हें पूरी तरह से गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया। प्रियंका गांधी ने इसे मौलिक संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया। प्रियंका गांधी ने सरकार द्वारा उठाए गए कड़े कदमों की आलोचना की, जिसमें दिल्ली की घेराबंदी, बैरिकेडिंग, सीमाओं को सील करना, ट्रेन और मेट्रो सेवाओं को रोकना, इंटरनेट बंद करना और जगह-जगह चेक पोस्ट बनाना शामिल है। उन्होंने उन युवाओं की पिटाई और हिरासत की निंदा की जो अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग कर रहे थे।
जवाबदेही और लोकतंत्र पर सवाल
प्रियंका गांधी ने आगे आरोप लगाया कि ये सभी कार्रवाइयां इस बात का सबूत हैं कि चुनाव आयोग की मिलीभगत से चुनावों में धांधली की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार डरी हुई है क्योंकि उसकी गैर-कानूनी सच्चाई सामने आ रही है और उससे जवाबदेही मांगी जा रही है। उन्होंने घोषणा की कि भारत अब लोकतंत्र नहीं रहा, बल्कि यह मिस्टर नरेंद्र मोदी और मिस्टर अमित शाह द्वारा चलाई जा रही एक तानाशाही बन गया है। उन्होंने अंत में कहा कि जो कोई भी लोकतंत्र को खत्म करने में उनका साथ दे रहा है, वह देश के साथ गद्दारी कर रहा है और नेताओं ने स्पष्ट किया कि देश के लोकतांत्रिक स्वरूप को बचाने का यह संघर्ष सरकारी मशीनरी के दबाव के बावजूद जारी रहेगा।
