आरबीआई एमपीसी की बैठक शुरू: क्या महंगा होगा आपका लोन? बुधवार को आएगा फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगाई के जोखिमों के बीच, विशेषज्ञ रेपो रेट में 0 प्रतिशत 25 पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं, जिससे लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को शुरू हो गई है। यह बैठक देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें ब्याज दरों के भविष्य का फैसला होना है। इस बैठक का आयोजन एक ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर जोखिम भी बढ़ गए हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई की एमपीसी इस बार रेपो रेट में 0 प्रतिशत 25 पॉइंट की बढ़ोतरी का कड़ा फैसला ले सकती है। इस बैठक में लिए गए सभी फैसलों की आधिकारिक घोषणा 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे की जाएगी।

महंगाई का दबाव और वैश्विक तनाव

मौद्रिक नीति की इस समीक्षा के दौरान नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी का फैसला न केवल महंगाई को नियंत्रित करने के लिए होगा, बल्कि यह आरबीआई के नीतिगत रुख में बदलाव को भी दर्शाएगा। पीटीआई द्वारा अर्थशास्त्रियों और बैंकरों के बीच कराए गए एक सर्वे के अनुसार, पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात ने कच्चे तेल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर दी है। इसका सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ सकता है। सर्वे में शामिल अधिकांश विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई इस बार रेपो रेट को बढ़ाने का विकल्प चुन सकता है ताकि महंगाई को काबू में रखा जा सके। केंद्रीय बैंक ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए संकेत दिया है कि इस बैठक के अंतर्दृष्टि, आकलन और आगे की दिशा जल्द ही सबके सामने होगी।

रेपो रेट का ऐतिहासिक सफर और वर्तमान स्थिति

अगर हम पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भारतीय रिजर्व बैंक ने आखिरी बार फरवरी 2023 में रेपो दर में 0 प्रतिशत 25 पॉइंट की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद यह दर 6 प्रतिशत 50 पॉइंट पर पहुंच गई थी। इसके बाद पूरे वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया और इसे स्थिर रखा गया। हालांकि, साल 2025 में आरबीआई ने दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया था, जिसके परिणामस्वरूप मौजूदा रेपो रेट 5 प्रतिशत 25 पॉइंट पर है। अब, पीटीआई के सर्वे में शामिल ज्यादातर जानकारों को लगता है कि आरबीआई एमपीसी इस बार फिर से रेपो रेट में बढ़ोतरी की राह पर लौट सकती है। हालांकि, नीतिगत रुख में बदलाव को लेकर अभी भी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है कि क्या इसे तटस्थ रखा जाएगा या इसमें सख्ती बरती जाएगी।

विशेषज्ञों की अलग-अलग राय

इस बीच, बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने एक अलग दृष्टिकोण साझा किया है और उनका मानना है कि रिजर्व बैंक रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकता है। सबनवीस के अनुसार, हालांकि अगला ब्याज दर चक्र 0 प्रतिशत 50 पॉइंट से 0 प्रतिशत 75 पॉइंट की बढ़ोतरी वाला हो सकता है, लेकिन अक्टूबर की इस समीक्षा बैठक में रेपो रेट पर विराम लगने की संभावना अधिक है। इसके विपरीत, निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है और गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगस्त की एमपीसी बैठक का ब्योरा काफी सख्त था। समिति के सदस्यों ने माना है कि खाद्य और ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई के दूसरे दौर के प्रभाव सामने आ सकते हैं, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं।

भविष्य की रणनीति और नीतिगत रुख

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि आरबीआई केवल अक्टूबर ही नहीं, बल्कि दिसंबर में भी रेपो रेट में 0 प्रतिशत 25 पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो एमपीसी अपने रुख को 'तटस्थ' से बदलकर 'संतुलित सख्ती' या 'समायोजन वापस लेने' वाला कर सकती है। इसका मतलब यह होगा कि आने वाले समय में बाजार में नकदी की उपलब्धता कम हो सकती है और लोन लेना महंगा हो सकता है। आरबीआई की इस तीन दिवसीय बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर होम लोन, कार लोन और अन्य व्यक्तिगत ऋणों की ईएमआई पर पड़ेगा और बुधवार सुबह 10 बजे जब गवर्नर फैसलों की घोषणा करेंगे, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि आरबीआई महंगाई को प्राथमिकता देता है या आर्थिक विकास की गति को बनाए रखने के लिए दरों को स्थिर रखता है।