मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है क्योंकि सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के भीषण हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इन हमलों ने न केवल देश की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सऊदी अरब के नेतृत्व को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है और हूती विद्रोहियों द्वारा किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की सुरक्षा को अत्यंत कड़ा कर दिया गया है। उन्हें लगातार अज्ञात और सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। सऊदी अरब के आसमान में इस समय इमरजेंसी जैसे हालात बने हुए हैं क्योंकि हूती के हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और गुप्त ठिकाने
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, क्राउन प्रिंस की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं और शेख खालिद आखिरी बार पिछले मंगलवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में देखे गए थे, जहां उन्होंने एक राष्ट्रीय डोनेशन कैंपेन के तहत रक्तदान किया था। उस दिन के बाद से वे सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं। उनके आने-जाने की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने खुलासा किया है कि उन्हें ऐसे महलों के बीच स्थानांतरित किया जा रहा है जो न केवल सुरक्षा के लिहाज से अभेद्य हैं, बल्कि वहां अत्याधुनिक बंकर भी बने हुए हैं। एक विशेष सुरक्षा टीम चौबीसों घंटे उनकी सुरक्षा में तैनात है। यह कदम सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ती जंग और सुरक्षा खतरों को देखते हुए उठाया गया है। हैरानी की बात यह है कि सऊदी अरब में मौजूद अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम भी इन हमलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
पिछले 10 सालों का सबसे भयानक हमला
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरपोर्ट पर हुआ यह हमला अमेरिका या उसके खाड़ी सहयोगियों पर अब तक का सबसे घातक हमला था। इस हमले में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि मिस्र की एक 28 वर्षीय फ्लाइट अटेंडेंट की मौत अत्यधिक खून बहने की वजह से हो गई क्योंकि धमाके में उसका हाथ कटकर शरीर से अलग हो गया था। वह उन कई पीड़ितों में से एक थी जिनके अंग इन हमलों में कट गए थे। किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पिछले वीकेंड पर हुए मिसाइल हमले के बाद से पूरी तरह बंद है। पिछले 5 दिनों के भीतर इस एयरपोर्ट पर 4 बार हमले किए जा चुके हैं। शनिवार को हुआ हमला पिछले 10 सालों का सबसे भयानक हमला माना जा रहा है, जब राजधानी के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती मिसाइल गिरी। इस हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक लोग घायल हुए, जिनमें से कई की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
लगातार होते हमले और बढ़ता मौत का आंकड़ा
हूती विद्रोहियों ने रियाद एयरपोर्ट पर अपने हमले न सिर्फ तेज कर दिए हैं, बल्कि वे अब अधिक सटीक और सफल भी हो रहे हैं। पिछले 6 दिनों से रियाद एयरपोर्ट को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। हमलों का सिलसिला 7 अक्टूबर को शुरू हुआ जब हूती ने रियाद एयरपोर्ट पर हमला किया और 3 लोगों की जान ले ली। इसके अगले दिन 8 अक्टूबर को हुए हमले में भी 3 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए। हूती ने 10 अक्टूबर को अब तक का सबसे बड़ा हमला किया, जिसमें मिसाइल विस्फोट के कारण 12 लोगों की मौत हो गई और 309 लोग जख्मी हो गए। हमलों का यह दौर यहीं नहीं रुका और 11 अक्टूबर को फिर से रियाद एयरपोर्ट पर धमाका किया गया, जिसमें 1 व्यक्ति की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। इन चार प्रमुख हमलों में अब तक कुल 19 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 350 लोग घायल हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विमान सेवाओं पर संकट और अन्य शहरों में तबाही
हूती के इन हमलों ने सऊदी अरब के विमानन क्षेत्र को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। रियाद एयरपोर्ट बंद होने के कारण अब तक 362 फ्लाइट्स रद्द की जा चुकी हैं। दुनिया के तमाम देशों ने सुरक्षा कारणों से सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानें बंद कर दी हैं। हूती विद्रोही केवल रियाद को ही निशाना नहीं बना रहे हैं, बल्कि उन्होंने सऊदी अरब के अन्य महत्वपूर्ण शहरों और एयरपोर्ट्स पर भी हमले किए हैं। दम्माम में स्थित किंग फहद एयरपोर्ट के पास कई धमाके किए गए हैं। इसके अलावा, हूती के ड्रोन और मिसाइलों ने अबहा और खमीस मुशैत जैसे शहरों में भी भारी तबाही मचाई है। सऊदी अरब की सेना और वहां तैनात अमेरिकी सुरक्षा प्रणालियां इन मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में विफल रही हैं, जिससे पूरे देश में असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है।
