फेसबुक कमेंट पर मौत की सजा रद्द: सऊदी सुप्रीम कोर्ट ने श्रीलंकाई मजदूर को दी बड़ी राहत

सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक पर ईशनिंदा के आरोप में श्रीलंकाई प्रवासी मजदूर अनोजन शिवराजा को दी गई मौत की सजा को रद्द कर दिया है। श्रीलंका सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के बाद यह फैसला आया है।

सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में फेसबुक पर एक टिप्पणी के लिए ईशनिंदा के दोषी ठहराए गए 27 वर्षीय श्रीलंकाई प्रवासी मजदूर अनोजन शिवराजा की मौत की सजा को रद्द कर दिया है। यह फैसला श्रीलंका सरकार द्वारा किए गए गहन कूटनीतिक और कानूनी प्रयासों के बाद आया है। श्रीलंका के उपविदेश मंत्री अरुण हेमचंद्र ने बुधवार को इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम की जानकारी साझा की, जिससे न केवल अनोजन के परिवार को बल्कि पूरे श्रीलंका को बड़ी राहत मिली है।

मामले की पृष्ठभूमि और शुरुआती सजा

अनोजन शिवराजा सऊदी अरब में एक प्रवासी मजदूर के रूप में कार्यरत थे। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने फेसबुक पर एक बहस के दौरान एक टिप्पणी की थी और इस टिप्पणी को इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ ईशनिंदा माना गया। हालांकि अनोजन ने अपनी गलती का एहसास होने पर जल्द ही उस कमेंट को हटा दिया था और माफी मांगते हुए एक वीडियो भी जारी किया था, लेकिन तब तक उस कमेंट का स्क्रीनशॉट उनके नियोक्ता और सऊदी अधिकारियों तक पहुंच चुका था और इसके परिणामस्वरूप जुलाई 2024 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

शुरुआत में अल अहसा की आपराधिक अदालत ने इस मामले की सुनवाई की थी। अदालत ने अनोजन को 5 साल की जेल और 30 लाख सऊदी रियाल के भारी जुर्माने की सजा सुनाई थी। लेकिन मामला तब और गंभीर हो गया जब सितंबर में यह खबर आई कि उनकी सजा को बढ़ाकर मौत की सजा में बदल दिया गया है और इस खबर ने श्रीलंका में हड़कंप मचा दिया और सरकार ने तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया।

श्रीलंका सरकार के कूटनीतिक प्रयास

उपविदेश मंत्री अरुण हेमचंद्र ने बताया कि सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शिवराजा की मौत की सजा को रद्द करने का आदेश दिया। उन्होंने इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया और मंत्री ने कहा कि श्रीलंका सरकार के निरंतर प्रयासों और दोनों देशों की कानूनी टीमों के बीच समन्वय के कारण यह संभव हो सका है। उन्होंने इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए सऊदी अरब सरकार, श्रीलंका के राजदूत, विदेश मंत्रालय के सचिव और श्रीलंका के विदेशी रोजगार ब्यूरो के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

राष्ट्रपति का बयान और भविष्य की सहायता

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह फैसला धैर्यपूर्ण कूटनीति और अपने नागरिकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह उन सभी श्रीलंकाई नागरिकों के लिए राहत की बात है जो इस मामले पर चिंता जता रहे थे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अनोजन और उनके परिवार को आगे की कानूनी प्रक्रियाओं के दौरान भी हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

राष्ट्रपति दिसानायके ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश में काम करने वाले किसी भी श्रीलंकाई नागरिक को खुद को अकेला नहीं समझना चाहिए। सरकार अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर है। हालांकि मौत की सजा रद्द कर दी गई है, लेकिन अभी कुछ कानूनी औपचारिकताएं बाकी हैं जिन्हें पूरा किया जाना है।

पुराने मामलों की याद और वर्तमान राहत

अनोजन शिवराजा का मामला श्रीलंका में इसलिए भी अधिक चर्चा में था क्योंकि इससे पहले रिजाना नफीक नाम की एक श्रीलंकाई महिला मजदूर को सऊदी अरब में मौत की सजा दी गई थी। उस समय तमाम कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद रिजाना को बचाया नहीं जा सका था और उन्हें फांसी दे दी गई थी। उस पुरानी घटना के कारण अनोजन के मामले को लेकर श्रीलंका में काफी डर का माहौल था। डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार सरकार की सक्रियता और कानूनी पैरवी ने एक बड़ा अंतर पैदा किया है। फिलहाल अनोजन की जान बच गई है और अब उनके सुरक्षित स्वदेश वापसी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।