शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 72000 के नीचे फिसला, निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण सेंसेक्स 72,000 के नीचे बंद हुआ। यह 2001 के बाद पहली बार है जब बाजार लगातार आठ हफ्तों से गिर रहा है।

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली का दौर देखा गया, जिससे दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया और सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल से नीचे गिर गए। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की गई भारी बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में अचानक आई तेजी ने बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह बिगाड़ दिया। कारोबार के अंत में, बीएसई सेंसेक्स 570 अंक टूटकर 72,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई निफ्टी 199 अंक गिरकर 22,421 के स्तर पर आ गया। इस तेज गिरावट के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 465 लाख करोड़ रुपये के नीचे पहुंच गया। इसका सीधा मतलब यह है कि निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति एक ही झटके में स्वाहा हो गई।

कारोबार के दौरान भारी उतार-चढ़ाव

गुरुवार को बाजार में उतार-चढ़ाव का आलम यह था कि एक समय सेंसेक्स 1200 अंक तक गिरकर अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर 71,292 पर पहुंच गया था। उस दौरान निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये दांव पर लगे हुए थे। बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) काफी नकारात्मक रही, जहां एनएसई पर 2789 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 594 शेयर ही बढ़त बनाने में कामयाब रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे और उनमें लगभग 2 प्रतिशत की कमी आई। बाजार में डर को मापने वाला सूचकांक इंडिया विक्स (India VIX) 12 प्रतिशत से ज्यादा उछल गया, जो निवेशकों की घबराहट को दर्शाता है। इस भारी बिकवाली के बीच केवल एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक जैसे कुछ ही शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन वे गिरावट को रोकने में नाकाम रहे।

बाजार में गिरावट के मुख्य कारण

बाजार को सबसे बड़ा झटका विदेशी निवेशकों की ओर से लगा है। बुधवार को विदेशी निवेशकों ने 10,148 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे और इस हफ्ते अब तक यह आंकड़ा 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। विदेशी पूंजी के बाहर जाने से बाजार का माहौल खराब हो गया है और दूसरी ओर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने वैश्विक बाजारों को चिंता में डाल दिया है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5 दशमलव 31 प्रतिशत हो गई है, जो साल 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशक अक्सर शेयर बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखी गई और रुपया गिरकर 95 रुपये 98 पैसे प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

ऑटो सेक्टर में मची तबाही

बाजार की इस गिरावट में ऑटो सेक्टर का बड़ा योगदान रहा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4 प्रतिशत से ज्यादा क्रैश हो गया, जिसमें महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयरों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। सितंबर महीने के ऑटो बिक्री के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे, जिसका सीधा असर इन कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी ने अपने 22,500 के अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ दिया है। डेरिवेटिव रिसर्च के विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि 22,500 का स्तर टूटता है, तो निफ्टी 22,400 तक फिसल सकता है। एक्सिस सिक्योरिटीज का भी मानना है कि इस सपोर्ट लेवल के टूटने से बाजार में बिकवाली और अधिक तेज हो गई है।

25 साल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूटा

बाजार के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि शेयरों में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट दर्ज की जा रही है। साल 2001 में आए डॉट-कॉम क्रैश के बाद यह पहला मौका है जब भारतीय बाजार लगातार इतने लंबे समय तक गिरता रहा है। इस गिरावट ने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 के कोविड क्रैश के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, एक दिलचस्प ट्रेंड यह है कि विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट से पैसा निकाल रहे हैं, लेकिन वे प्राइमरी मार्केट (आईपीओ) में निवेश जारी रखे हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बाजार का एक अल्पकालिक दौर है। ब्रेंट क्रूड के दाम 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने से भविष्य में सुधार की उम्मीद है। जानकारों की सलाह है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों को कम कीमत पर खरीदने का एक बेहतरीन अवसर हो सकता है।