सोने की चमक फीकी या खरीदारी का शानदार मौका? जानिए दशहरा और दिवाली पर कैसे बदल रहा है कंज्यूमर्स का मूड

भारतीय परिवार सोने की ऊंची कीमतों के कारण अब हल्के गहने, सिक्के, बार और गोल्ड ईटीएफ की ओर रुख कर रहे हैं। जानिए दशहरा और दिवाली पर सोने की खरीदारी के बदलते ट्रेंड और ग्लोबल मार्केट का हाल।

भारतीय परिवारों के लिए सोना निवेश और त्योहारों पर खरीदारी के लिए हमेशा से एक अत्यंत पसंदीदा माध्यम रहा है। दशहरा, दिवाली और शादी-ब्याह के सीजन में इसकी मांग आमतौर पर काफी बढ़ जाती है। हालांकि, सोने की ऊंची कीमतें अब लोगों के खरीदारी के तरीके और तौर-तरीकों को तेजी से बदल रही हैं। कुछ परिवार अब भारी गहनों के बजाय हल्के गहने चुन रहे हैं, जबकि कुछ अन्य लोग सोने के सिक्के, बार या फिर गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) की ओर मजबूती से रुख कर रहे हैं। चूंकि सोने की कीमत अपने रिकॉर्ड स्तर से नीचे आई है, इसलिए खरीदार यह भली-भांति देख रहे हैं कि क्या यह खरीदारी का बिल्कुल सही मौका है या फिर आने वाले दिनों में कीमतों में और अधिक गिरावट आ सकती है।

मंगलवार को सोने की कीमतों में आई मामूली तेजी

हाल ही में मंगलवार के कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी दर्ज की गई और इसके पीछे एक मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना रहा है। इस समय निवेशक 27-28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण पॉलिसी मीटिंग पर पैनी नजर रखे हुए हैं, जिससे ब्याज दरों की भविष्य की दिशा और रुख के बारे में स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं। 1 फीसदी बढ़कर 4,164 रुपये 70 पैसे के स्तर पर पहुंच गया। बाजार के तमाम जानकारों और निवेशकों की निगाहें इन अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों पर टिकी हुई हैं ताकि भविष्य की रणनीति बनाई जा सके।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां और वैश्विक प्रभाव

सोने की कीमतों में यह सुधार जनवरी 2026 के रिकॉर्ड स्तर से 26 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट के बाद देखने को मिला है। सीएमई (CME) के फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स को 82 प्रतिशत की यह उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अपनी अक्टूबर की आगामी बैठक में ब्याज दरों में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं करेगा। वहीं दूसरी ओर, दिसंबर के महीने में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 89 प्रतिशत तक बनी हुई है। आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि ऊंची ब्याज दरें हमेशा सोने की कीमतों पर भारी दबाव डालती हैं क्योंकि सोने पर किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष ब्याज नहीं मिलता है, जिससे इसे अपने पास सुरक्षित रखने की अवसर लागत यानी अपॉर्चुनिटी कॉस्ट काफी बढ़ जाती है। इसके विपरीत, डॉलर के कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए सोना अपेक्षाकृत काफी सस्ता हो जाता है।

विशेषज्ञों की राय और कमोडिटी बाजार का हाल

पीएल कैपिटल में कमोडिटीज के हेड आशीष राजोदिया ने मिंट को दिए गए अपने बयान में कहा कि हाल के तमाम उतार-चढ़ाव के बाद, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और ट्रेजरी यील्ड यानी सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाले रिटर्न में आई कमी ने सोने को एक मजबूत सहारा प्रदान किया है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि फेड का पॉलिसी स्टेटमेंट और आने वाले समय में सामने आने वाले महंगाई के आंकड़े बेहद अहम और निर्णायक साबित होंगे। वहीं दूसरी ओर, अगर कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी लौटती है या फेड की ओर से कोई भी सख्त रुख यानी हॉकिश सिग्नल देखने को मिलता है, तो सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों पर भी भारी दबाव पड़ सकता है और कीमतें नीचे आ सकती हैं।

गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड में लगातार जोरदार तेजी

अगस्त के महीने में गोल्ड ईटीएफ में 2,596 रुपये 70 पैसे करोड़ रुपये का भारी-भरकम नेट इनफ्लो यानी निवेश दर्ज किया गया, जो कि जुलाई महीने के 1,559 करोड़ रुपये के आंकड़े से काफी अधिक है। यह लगातार तीसरा ऐसा महीना रहा है जब इसमें लगातार पॉजिटिव इनफ्लो देखा गया है। लगभग 121 रुपये 3 टन सोने के साथ, इसके तहत मैनेज की जाने वाली कुल संपत्ति यानी एयूएम (AUM) बढ़कर लगभग 1 लाख 91 हजार करोड़ रुपये हो गई है, जबकि साल की शुरुआत से लेकर अब तक कुल इनफ्लो का यह आंकड़ा बढ़कर 4 अरब 22 करोड़ डॉलर तक जा पहुंचा है। यह निवेशकों का सोने के प्रति बदलते और मजबूत होते रुझान को साफ तौर पर दर्शाता है।

डिजिटल गोल्ड और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के आंकड़े

जून से लेकर अगस्त महीने के बीच डिजिटल गोल्ड की कुल खरीदारी औसतन 2,500 करोड़ रुपये प्रति माह के स्तर पर बनी रही। विशेष रूप से अगस्त के महीने में इसमें पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले पूरे 110 प्रतिशत की भारी-भरकम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, गोल्ड फ्यूचर्स ट्रेडिंग में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली है और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स (MCX) पर औसत दैनिक टर्नओवर पिछले महीने के मुकाबले 38 प्रतिशत की जोरदार तेजी के साथ लगभग 29,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो कि पिछले पांच महीनों में दर्ज किया गया सबसे अधिक और उच्चतम स्तर है। डिजिटल माध्यमों और फ्यूचर्स बाजार में यह उछाल निवेशकों की गहरी दिलचस्पी को रेखांकित करता है।

फिजिकल डिमांड और आयात में भारी कमजोरी

एक तरफ जहां डिजिटल और ईटीएफ निवेश में तेजी आई है, वहीं दूसरी तरफ फिजिकल डिमांड यानी भौतिक सोने की मांग में खासी कमजोरी दर्ज की गई है। 3 अरब डॉलर पर सिमट गया, जो कि जुलाई महीने के मुकाबले पूरे 45 प्रतिशत और पिछले साल के ठीक इसी महीने की तुलना में 58 प्रतिशत तक कम है। घरेलू कीमतें पूरी तरह से इंपोर्ट पैरिटी यानी आयात लागत से नीचे बनी रहीं। इसके अलावा, 11 सितंबर तक सोने पर मिलने वाला डिस्काउंट बढ़कर 78 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जिसका एक प्रमुख कारण यह भी रहा कि ग्राहकों और उपभोक्ताओं ने बिल्कुल नए गहने खरीदने के बजाय अपने पुराने गहनों के बदले नए गहने खरीदने को प्राथमिकता दी।

इस दशहरा और दिवाली पर भारतीय परिवारों का रुख

कीमतों में हालिया करेक्शन के बावजूद, भारत में त्योहारों के इस खास मौके पर सोना खरीदना अभी भी एक बेहद अहम और अटूट परंपरा बनी हुई है। हालांकि, सोने की इन ऊंची कीमतों का सीधा और गहरा असर आम भारतीय परिवारों के घरेलू बजट पर साफ तौर पर पड़ रहा है और यही वजह है कि कुछ लोग अब भारी-भरकम गहनों के बजाय हल्के गहने खरीद रहे हैं, जबकि अन्य लोग सोने के सिक्कों, बार और ईटीएफ की तरफ अपना रुख कर रहे हैं। त्योहारों की इस रौनक के बीच लोगों की प्राथमिकताएं बदली हैं लेकिन सोने के प्रति उनका पारंपरिक लगाव आज भी पूरी तरह से कायम है और वे अपनी क्षमता के अनुसार लगातार खरीदारी में जुटे हुए हैं।

विशेषज्ञ राजीव शरण की महत्वपूर्ण राय

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड, राजीव शरण ने मिंट की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताते हुए कहा कि त्योहारों की इस शानदार शुरुआत के समय 24 कैरेट शुद्ध सोना बाजार में लगभग 1 लाख 48 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के भाव पर कारोबार कर रहा था। उन्होंने आगे यह भी कहा कि भारतीय परिवारों ने अपना कुल बजट तो लगभग उतना ही रखा है, लेकिन वे अब सोने के वजन के हिसाब से पहले की तुलना में कम गहने खरीद रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, विशुद्ध रूप से निवेश के मकसद से सोना खरीदने का चलन समाज में तेजी से बढ़ रहा है। शरण के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में जो बड़ा बदलाव देखने को मिला है, वह सोने के प्रति भारतीयों के प्रेम और लगाव में नहीं, बल्कि उसे खरीदने के तौर-तरीकों और माध्यमों में आया है।

संपत्ति की सुरक्षा और भविष्य की कीमतें

राजीव शरण के अनुसार, यह पूरा बदलाव यह साफ तौर पर दिखाता है कि लोग अब पारंपरिक गहनों की खरीद के साथ-साथ अपनी कुल संपत्ति को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने पर भी बहुत ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि अमेरिका में चल रही ऊंची ब्याज दरों की वजह से आने वाले समय में सोने की कीमतों में बहुत अधिक और तेज उछाल आने की संभावना काफी कम है, और कीमतें लगभग 5 प्रतिशत के एक सीमित दायरे में ही ऊपर-नीचे होती रहेंगी। उन्होंने यह भी विशेष रूप से बताया कि कुछ समझदार खरीदार हाल ही में कीमतों में आई इस गिरावट को सोने की खरीदारी करने का एक बहुत ही सुनहरा और अच्छा मौका मानकर चल रहे हैं।

क्या दिवाली तक सोने के दाम में फिर से आएगी तेजी?

सोने की कीमतों का आने वाला भविष्य पूरी तरह से भारत के स्थानीय त्योहारों और शादियों के सीजन की मांग, तथा वैश्विक कारकों यानी ग्लोबल फैक्टर्स के बीच एक बेहतरीन संतुलन पर पूरी तरह से निर्भर करेगा। इन वैश्विक कारकों में मुख्य रूप से अमेरिका की मॉनेटरी पॉलिसी, महंगाई का आगामी अनुमान, ट्रेजरी यील्ड और दुनिया भर के भू-राजनीतिक घटनाक्रम शामिल हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन सभी घटकों का मिला-जुला असर आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों पर देखने को मिलेगा, जिससे यह तय होगा कि त्योहारी सीजन में ग्राहकों को और कितनी राहत मिलती है या फिर उन्हें अधिक कीमतें चुकानी पड़ती हैं।

विकास गुप्ता का दृष्टिकोण और बाजार का आउटलुक

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ, विकास गुप्ता ने मिंट की रिपोर्ट में अपने विचार रखते हुए कहा कि बाजार की आम और सर्वमान्य राय के अनुसार, लंबे समय के लिहाज से सोने का ओवरऑल आउटलुक पूरी तरह से पॉजिटिव बना हुआ है। हालांकि, लगातार बढ़ती हुई महंगाई और ब्याज दरों को लेकर लगाई जा रही उम्मीदें इस पूरे आउटलुक को थोड़ा जटिल जरूर बना सकती हैं और उन्हें यह पूरी उम्मीद है कि दुनिया भर के विभिन्न केंद्रीय बैंकों द्वारा की जाने वाली लगातार खरीदारी सोने की मांग को एक मजबूत सहारा प्रदान करेगी, जबकि अन्य सामान्य निवेशकों द्वारा समय-समय पर की जाने वाली बिकवाली कीमतों में होने वाली तेज बढ़ोतरी को काफी हद तक सीमित कर सकती है।

लंबी अवधि में सोने का प्रदर्शन और महंगाई का असर

विकास गुप्ता ने आगे यह भी बताया कि अगले 2 से 3 वर्षों की लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर बाजार की आम राय यही है कि इसकी कीमतें ऊपर की ओर ही जाएंगी। ठीक इसी निर्धारित अवधि के दौरान देश और दुनिया में महंगाई तथा ब्याज दरों के भी बढ़ने का पूरा अनुमान लगाया जा रहा है और हालांकि, व्यावहारिक रूप से यह दोनों चीजें हमेशा एक साथ सहज रूप से नहीं हो सकती हैं। गुप्ता को यह मजबूत उम्मीद है कि भारत में इस समय चल रहा त्योहारों और शादियों का सीजन घरेलू स्तर पर सोने की कीमतों को कुछ हद तक जरूरी सहारा प्रदान करेगा, जबकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों पर भारी दबाव डाल सकती है।

त्योहारी सीजन में भारतीय बाजार का रुख

विकास गुप्ता के पेशेवर आकलन के अनुसार, इस त्योहारी सीजन के दौरान भारतीय घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में थोड़ी सी तेजी देखने को मिल सकती है, जिसके बाद इनके कुछ समय के लिए स्थिर हो जाने की पूरी संभावना है। दूसरी ओर, पीएल कैपिटल के कमोडिटीज हेड आशीष राजोदिया ने एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतों और ट्रेजरी यील्ड को बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक कारक बताया है। उन्होंने मिंट की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से भविष्य की महंगाई से जुड़ी तमाम चिंताएं काफी हद तक कम हो सकती हैं, जबकि यील्ड में गिरावट आने से सोने जैसी उन तमाम संपत्तियों को बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है जिन पर किसी भी प्रकार का ब्याज नहीं मिलता है।

निष्कर्ष और निवेशकों के लिए मुख्य बातें

इसके विपरीत, यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में बहुत तेजी से उछाल आता है या फिर अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख पहले से ज्यादा सख्त यानी हॉकिश हो जाता है, तो सोने की रिकवरी की यह पूरी प्रक्रिया बिल्कुल उलट सकती है। भारतीय खरीदारों और निवेशकों के लिए, सोने की रिकॉर्ड तेजी के बाद हाल ही में आई इस मामूली गिरावट से मानसिक और आर्थिक रूप से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं निकाला जाना चाहिए कि भविष्य में भी लगातार ऐसी ही तेजी बनी रहेगी। त्योहारी सीजन की मजबूत मांग से निकट भविष्य में घरेलू कीमतों को अच्छा सहारा मिल सकता है, जबकि ब्याज दरों को लेकर उठने वाली उम्मीदें, विदेशी मुद्रा यानी करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर की तमाम घटनाएं ऐसे मुख्य और अनिवार्य कारक हैं जिन पर हर निवेशक और खरीदार को पैनी नजर बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।