ट्रंप का भारत को बड़ा तोहफा! रूसी तेल पर 25% टैरिफ हटने के संकेत, होगा 50,000 करोड़ का फायदा

अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि भारत पर रूसी तेल खरीद के लिए लगा 25% टैरिफ जल्द हट सकता है। इस फैसले से भारत को करीब 5 बिलियन डॉलर यानी 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत होने की उम्मीद है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली नई सरकार भारत को एक बड़ा आर्थिक 'गिफ्ट' देने की तैयारी में है। अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25 फीसदी का टैरिफ जल्द ही हटाया जा सकता है। यह कदम न केवल भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्तों का प्रतीक है, बल्कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा फायदा होने की उम्मीद है।

स्कॉट बेसेंट का बड़ा बयान और टैरिफ की सफलता

दावोस में मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर लगाया गया टैरिफ एक सफल कदम रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस टैरिफ के लागू होने के बाद भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी तेल की खरीद में उल्लेखनीय कमी आई है और बेसेंट ने कहा, 'यह एक बड़ी सफलता है। रूसी तेल पर 25 फीसदी टैरिफ अभी भी लागू है, लेकिन मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का रास्ता खुल गया है। ' उनके इस बयान को भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

भारत को होगा 50,000 करोड़ का भारी मुनाफा

अगर अमेरिका आधिकारिक तौर पर इस 25 फीसदी टैरिफ को हटा देता है, तो भारत को करीब 5 बिलियन डॉलर यानी 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का फायदा होगा। वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से आयात करता है और टैरिफ हटने से भारतीय रिफाइनरियों की लागत कम होगी और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब भारत और यूरोप। के बीच एक बड़ी ट्रेड डील की चर्चाएं भी तेज हैं।

ट्रंप और मोदी की दोस्ती का व्यापारिक असर

डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना 'करीबी दोस्त' बताया है और ट्रंप ने विश्वास जताया है कि टैरिफ को लेकर जारी तनाव के बावजूद दोनों देश एक बेहतर व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे। ट्रंप ने कहा, 'मैं आपके प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूं, वे एक शानदार व्यक्ति और मेरे मित्र हैं। ' हालांकि, ट्रंप ने पहले रूसी तेल खरीद पर नाराजगी जताई थी, लेकिन अब अमेरिकी प्रशासन का रुख नरम होता दिख रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि भारत ने अमेरिकी दबाव के जवाब में आयात में जो बदलाव किए हैं, उससे वे संतुष्ट हैं।

भारतीय रिफाइनरियों की बदली रणनीति

अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के डर से भारतीय रिफाइनरियों ने अपनी रणनीति में बदलाव करना शुरू कर दिया था। केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर 929,000 बैरल प्रति दिन रह गया, जो पिछले दो वर्षों में सबसे कम है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियों ने जनवरी में रूसी तेल का आयात रोक दिया था और मिडिल ईस्ट व अफ्रीका जैसे वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया था। अब टैरिफ हटने की संभावना से इन कंपनियों को फिर से सस्ती ऊर्जा प्राप्त करने का मौका मिल सकता है।

'इंडिया फर्स्ट' एनर्जी पॉलिसी पर अडिग नई दिल्ली

अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत अपनी 'इंडिया फर्स्ट' ऊर्जा नीति पर कायम है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी 1. 4 अरब आबादी के लिए किफायती ऊर्जा सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देता है। भारत ने बार-बार कहा है कि उसके ऊर्जा संबंधी निर्णय राष्ट्रीय हित और मूल्य स्थिरता को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। वाशिंगटन में विधायी दबाव के बावजूद भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने में सफल रहा है।