UNGA में ट्रंप की ईरान को चेतावनी: या तो डील करो या नरक में जाओ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ईरान पर कड़ा प्रहार किया और रूस-यूक्रेन युद्ध सहित वैश्विक शांति पर अपनी उपलब्धियां गिनाईं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित किया। ट्रंप का यह संबोधन किसी चुनावी अभियान के भाषण की तरह प्रतीत हुआ, जिसमें उन्होंने वैश्विक कूटनीति के बजाय घरेलू उपलब्धियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने अपने प्रशासन द्वारा अर्थव्यवस्था, आप्रवासन और अपराध नियंत्रण के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर जोर दिया और ट्रंप ने गर्व के साथ घोषणा की कि अमेरिका की वापसी हो चुकी है और आज उनका देश पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली स्थिति में है।

घरेलू मोर्चे पर सफलता और तकनीकी नेतृत्व

अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की टेक्नोलॉजी दुनिया में सबसे बेहतरीन है और देश लगभग हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने अमेरिकी शेयर बाजार के शानदार प्रदर्शन का उल्लेख किया और वर्ष 2025 तक अमेरिका में गरीबी दर में भारी कमी लाने के अपने लक्ष्य को साझा किया। दक्षिणी सीमा पर अवैध घुसपैठ को रोकने के प्रयासों और अमेरिकी शहरों में हिंसक अपराधों की दर में आई गिरावट को भी उन्होंने अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।

ईरान को सख्त चेतावनी: डील या तबाही

ट्रंप ने एक बार फिर ईरान पर तीखा हमला बोला और उसे अरब क्षेत्र में अशांति का मुख्य कारण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके रहते ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान के आंतरिक हालातों पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां अब तक 10000 प्रदर्शनकारियों की हत्या की जा चुकी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के 159 विमानों को नष्ट कर दिया गया है। " उन्होंने स्पष्ट किया कि अब फैसला ईरान को लेना है और साथ ही दुनिया के अन्य देशों से ईरान का बहिष्कार करने की अपील की।

गाजा का पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय शांति

गाजा की स्थिति पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि गाजा पीस बोर्ड में 30 से ज्यादा देश शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गाजा के पुनर्निर्माण के कार्यों में अरब के देश भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। मिड टर्म चुनावों के संदर्भ में ट्रंप ने कहा कि ईरान मामले का इन चुनावों पर कोई असर नहीं होगा, लेकिन चुनाव के बाद उनसे डील की जा सकती है।

यूरोप को ईरानी हमले से बचाने का दावा

अपने संबोधन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान यूरोप पर हमला करने की योजना बना रहा था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ही यूरोप को इस ईरानी हमले से बचाया है। उनके अनुसार, यदि वे समय पर कदम नहीं उठाते तो ईरान यूरोप पर हमला कर देता जिससे भारी जान-माल का नुकसान होता। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने समय रहते पूरी ताकत के साथ ईरान पर हमला किया और उन्हें काफी हद तक बर्बाद कर दिया।

रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक शांति के प्रयास

UNGA में ट्रंप ने रूस-यूक्रेन जंग का भी विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस युद्ध में हर रोज करीब 25000 लोग मारे जा रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इस जंग को रोकने के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बात की है और उनसे जल्द ही युद्ध समाप्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन के राष्ट्रपति से भी उनकी बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि यह जंग जल्द ही खत्म हो जाएगी।

टैरिफ का उपयोग और 8 युद्धों का अंत

ट्रंप ने अपने पुराने बयानों को दोहराते हुए कहा कि उनके लिए 8 युद्धों को सुलझाना और उन देशों के नेताओं के साथ मित्रता करना बड़े सम्मान की बात रही है। उन्होंने कहा कि इनमें से कई युद्ध दशकों से चल रहे थे। ट्रंप ने इन समझौतों का श्रेय अपने व्यक्तिगत संबंधों, व्यापारिक नीतियों और टैरिफ के इस्तेमाल या उसकी धमकी को दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास टैरिफ लगाने की असीम शक्तियां हैं और जरूरत पड़ने पर वे इसका इस्तेमाल करेंगे।

विश्व नेताओं का आभार और भारत की भूमिका

ट्रंप ने दावा किया कि उनके प्रयासों के कारण लगभग हर संबंधित देश ने उन्हें धन्यवाद का पत्र लिखा है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का उदाहरण देते हुए उन्हें एक बेहतरीन इंसान बताया और कहा कि उनके अनुसार ट्रंप ने 3 करोड़ लोगों की जान बचाई है। उन्होंने भारत-पाकिस्तान और आर्मेनिया-अजरबैजान जैसे विवादों को सुलझाने में अपनी भूमिका का जिक्र किया। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कर रहे हैं, जो 26 सितंबर 2026 को महासभा को संबोधित करेंगे।