अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वीं सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने वैश्विक मंच पर अमेरिका की बढ़ती ताकत और दुनिया में बदलाव लाने के लिए उसके इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया। महासभा हॉल में 193 देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका पहले की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली हुआ है। उनके भाषण का मुख्य केंद्र ईरान रहा, जिसे उन्होंने सीधे तौर पर खत्म करने की धमकी दी और दुनिया से उसे अलग-थलग करने का आह्वान किया।
ईरान को सीधी धमकी: समझौता या खात्मा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को लेकर अपने रुख को बेहद कड़ा रखा। उन्होंने कहा कि उनके सामने एक बहुत बड़ा फैसला है और अमेरिका के पास वर्तमान में केवल दो ही रास्ते बचे हैं। पहला रास्ता यह है कि ईरान के साथ एक नया समझौता किया जाए और दूसरा रास्ता उसे पूरी तरह से खत्म कर देना है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उन्हें यह काम जल्दी करना होगा ताकि ईरान को फिर से अन्य देशों और लोगों को नुकसान पहुंचाने का मौका न मिल सके और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान शायद अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों का इंतजार कर रहा है, लेकिन वह अपना फैसला इन चुनावों के बाद ले सकते हैं।
आर्थिक बहिष्कार और तेल की कीमतों पर असर
ईरान को सैन्य रूप से धमकाने के साथ-साथ ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से एक विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि सभी देशों को मिलकर ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग कर देना चाहिए। ट्रंप का तर्क था कि यदि दुनिया के देश ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने में अमेरिका का साथ देते हैं और यह रणनीति सफल होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। उन्होंने सदस्य देशों से ईरान पर आर्थिक दबाव को और अधिक तीव्र करने का आग्रह किया।
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का विदाई संबोधन
ट्रंप के भाषण से पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अपना विदाई भाषण दिया और महासचिव के रूप में यह उनका आखिरी संबोधन था। गुटेरेस ने वैश्विक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी दुनिया में खाई लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने महाशक्तियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें यह समझना होगा कि उनकी ताकत उतनी भी सुपर नहीं है जितनी वे समझते हैं। गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि केवल सैन्य ताकत के बल पर दुनिया में शांति कायम नहीं की जा सकती। उनके इस भाषण के साथ ही जनरल डिबेट की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने अपनी बात रखी।
पुतिन को संदेश और क्षेत्रीय घटनाक्रम
जब डोनाल्ड ट्रंप न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचे, तो उन्होंने पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत की। " यह संदेश रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अपने मुख्य भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की ताकत को काफी हद तक कम कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले जैसा ताकतवर नहीं रहा है और मिडिल ईस्ट में उसका दबदबा खत्म हो चुका है। इसी दौरान उन्होंने क्यूबा का भी जिक्र किया और भविष्यवाणी की कि क्यूबा की सरकार जल्द ही गिर जाएगी। ट्रंप की इस टिप्पणी के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल में मौजूद क्यूबा का डेलिगेशन विरोध स्वरूप वहां से उठकर बाहर चला गया।
परमाणु कार्यक्रम और यूरोप की सुरक्षा
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका ने ईरान को बैलिस्टिक मिसाइल शील्ड की आड़ में परमाणु बम बनाने की कोशिशों से सफलतापूर्वक रोका है और उन्होंने तर्क दिया कि यदि ईरान अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता, तो वह शासन हमेशा के लिए आतंक और मौत फैलाने के लिए स्वतंत्र हो जाता। ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान को आतंक फैलाने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि उन्होंने यूरोप को ईरानी हमले से बचाया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान यूरोप पर हमला करने की योजना बना रहा था, लेकिन उनके हस्तक्षेप के कारण ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने ईरान को कमजोर और बेचैन बताते हुए कहा कि वह जल्द ही इस संघर्ष को खत्म करेंगे।
कार्रवाई बनाम केवल बातें
अपने नेतृत्व की तुलना अन्य नेताओं से करते हुए ट्रंप ने कहा कि जब दूसरे नेता केवल शांति की बातें कर रहे थे, तब उन्होंने वास्तव में शांति कायम करने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा, "दूसरे बात करते रहे, मैंने कार्रवाई की। दूसरे शांति की बात करते रहे, मैंने शांति कायम की। " ट्रंप ने अपने भाषण के अंत में अमेरिका की शक्ति और वैश्विक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
