यूपी पुलिस भर्ती में बड़ा फैसला, ऊंचाई और सीने की होगी दोबारा नाप, हाईकोर्ट का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस सिपाही भर्ती 2025 के अभ्यर्थियों की ऊंचाई और सीने की दोबारा नाप के आदेश दिए हैं। लखनऊ की केजीएमयू को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया गया है और रिपोर्ट 4 नवंबर को सील बंद लिफाफे में पेश होगी।

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली पुलिस भर्ती प्रक्रिया को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण कानूनी फैसला सामने आया है। इस फैसले से उन हजारों उम्मीदवारों के चेहरे पर एक बार फिर से उम्मीद की किरण जग गई है, जिन्हें शारीरिक मानक परीक्षा के दौरान उनकी ऊंचाई या फिर सीने का माप निर्धारित मानक से कम होने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने इस महत्वपूर्ण आदेश में साफ तौर पर कहा है कि सिपाही भर्ती के अभ्यर्थियों की लंबाई और सीने की नाप अब दोबारा की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए अदालत ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी केजीएमयू को एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन करने का कड़ा निर्देश जारी किया है।

अनुज कुमार और 60 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर हुई सुनवाई

न्यायालय का यह आदेश किसी एक व्यक्ति की याचिका पर नहीं, बल्कि कुल 47 याचिकाओं पर एक साथ विस्तृत सुनवाई के बाद आया है। यह पूरा मामला मुख्य रूप से सिपाही अभ्यर्थियों की ऊंचाई और सीने की दोबारा नाप से जुड़ा हुआ है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही भर्ती 2025 की प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं। इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत मुख्य रूप से अभ्यर्थी अनुज कुमार और उनके साथ 60 अन्य लोगों की तरफ से दायर की गई याचिकाओं के माध्यम से हुई थी। इन सभी याचिकाकर्ताओं ने शारीरिक मानक परीक्षण के दौरान उनके साथ हुए मूल्यांकन पर गंभीर सवाल उठाए थे और अदालत का दरवाजा खटखटाया था। माननीय उच्च न्यायालय ने इन सभी मामलों की गंभीरता को समझते हुए और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर एक नया आयाम जुड़ गया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की अदालत में क्या-क्या हुई दलीलें और आदेश

इस पूरे मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर बहुत ही महत्वपूर्ण तार्किक टिप्पणी की कि सामान्य तौर पर किसी भी वयस्क व्यक्ति की लंबाई या फिर छाती का माप एक या दो साल के अंतराल में प्राकृतिक रूप से बदलने की कोई संभावना नहीं होती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शारीरिक माप के दौरान मानवीय त्रुटियों या अन्य तकनीकी कारणों की संभावना से बिल्कुल भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इसी तार्किक आधार को पुख्ता करते हुए अदालत ने माना कि अयोग्य घोषित किए गए उम्मीदवारों को अपनी बात साबित करने का एक और निष्पक्ष अवसर मिलना पूरी तरह से न्यायसंगत है। इसी उद्देश्य के तहत कोर्ट ने लखनऊ के केजीएमयू के प्रिंसिपल को तुरंत एक सक्षम मेडिकल बोर्ड का गठन करने का आदेश दिया है, जो इन सभी संबंधित अभ्यर्थियों के शारीरिक मानकों की दोबारा से निष्पक्ष जांच करेगा।

47 याचिकाओं पर सुनवाई और अन्य याचिकाओं का वर्गीकरण

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी कुल 47 याचिकाओं पर एक साथ गहन सुनवाई पूरी करने के बाद यह आदेश पारित किया है। हालांकि, कोर्ट ने इस लंबी न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सभी याचिकाओं पर एक जैसा फैसला नहीं सुनाया, बल्कि परिस्थितियों के आधार पर उनका वर्गीकरण भी किया और अदालत ने एक विशेष कैटेगरी में की गई मांग को खारिज करते हुए कुल छह याचिकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया। इसके अलावा, अदालत ने प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए तीन अन्य याचिकाओं को मुख्य मामले से अलग कर दिया और इन तीनों मामलों को अब से ठीक दो हफ्ते बाद दोबारा सुनवाई के लिए लिस्ट करने का कड़ा निर्देश दिया है और इतना ही नहीं, न्यायालय ने पांच अन्य रिट याचिकाओं को भी इस मुख्य मामले से अलग करने का काम किया। कोर्ट ने इन पांच रिट याचिकाओं के संदर्भ में यह विशेष स्पष्टीकरण दिया कि इनमें कई अलग-अलग याचिकाकर्ता शामिल हैं, और इन सभी रिट याचिकाओं में अलग-अलग और विशिष्ट आदेश पारित किए जाएंगे, जिससे हर एक अभ्यर्थी के अधिकारों की पूरी रक्षा हो सके।

31 अक्टूबर को केजीएमयू द्वारा गठित बोर्ड करेगा जांच

न्यायालय के निर्देशानुसार, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी यानी केजीएमयू द्वारा गठित किया जाने वाला यह विशेष मेडिकल बोर्ड आगामी 31 अक्टूबर को अभ्यर्थियों की दोबारा से जांच करेगा। इस जांच प्रक्रिया के तहत उन सभी उम्मीदवारों को बुलाया जाएगा जिन्हें शारीरिक परीक्षा में फेल कर दिया गया था। मेडिकल बोर्ड उनकी ऊंचाई और सीने के माप की नए सिरे से अत्याधुनिक और सटीक उपकरणों के माध्यम से नाप करेगा ताकि किसी भी प्रकार की गलती या विवाद की कोई गुंजाइश बाकी न रहे। केजीएमयू के विशेषज्ञ डॉक्टरों और चिकित्सा अधिकारियों की देखरेख में होने वाली इस जांच पर पूरे प्रदेश के हजारों युवाओं की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस मेडिकल परीक्षण के परिणाम ही उनके भविष्य की दिशा तय करेंगे।

4 नवंबर को सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश होगी रिपोर्ट

अदालत ने जिन-जिन रिट याचिकाओं में अभ्यर्थियों की दोबारा माप करने के सख्त निर्देश दिए हैं, उन सभी मामलों की अगली सुनवाई की तारीख भी तय कर दी है। इस पूरे प्रकरण पर अगली सुनवाई अब आगामी 4 नवंबर को होगी। सबसे खास बात यह है कि 4 नवंबर को होने वाली इस सुनवाई के दौरान केजीएमयू के मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई दोबारा जांच की पूरी रिपोर्ट एक सील बंद लिफाफे में सीधे अदालत के समक्ष पेश की जाएगी। अदालत इस सील बंद लिफाफे में मौजूद रिपोर्ट का बारीकी से अध्ययन करेगी और उसके आधार पर आगे के आवश्यक और अंतिम कानूनी निर्देश जारी करेगी। न्याय के इस चरण से यह साफ हो गया है कि न्यायालय इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से गोपनीय, पारदर्शी और निष्पक्ष रखना चाहता है ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ किसी भी स्तर पर कोई अन्याय न हो सके।

यूपी पुलिस भर्ती 2025 का विस्तृत विवरण और आंकड़े

यहाँ यह जानना भी बेहद आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश पुलिस की यह बंपर भर्ती प्रक्रिया कुल 32 हजार से अधिक पदों के लिए आयोजित की जा रही है, जो राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण भर्तियों में से एक मानी जा रही है। इस बहुप्रतीक्षित भर्ती का बहुप्रतीक्षित रिजल्ट हाल ही में यानी 14 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से घोषित किया गया था, जिसके बाद से ही सफल और असफल उम्मीदवारों के बीच विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं चल रही हैं। इस पूरी भर्ती के लिए राज्य स्तर पर लिखित परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बहुत ही कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच संपन्न हुआ था। लिखित परीक्षा की तिथियां 8 जून, 9 जून और 10 जून थीं, जिनमें लाखों की संख्या में युवाओं ने अपनी किस्मत आजमाई थी। उत्तर प्रदेश पुलिस की इस प्रतिष्ठित भर्ती परीक्षा के लिए कुल 28 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, जो इस बात का प्रमाण है कि देश के सबसे बड़े राज्य में सरकारी नौकरियों को लेकर युवाओं के बीच कितना भारी क्रेज और प्रतिस्पर्धा है।

लाखों आवेदकों में पुरुष और महिलाओं की संख्या

उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती 2025 के लिए कुल 28 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने जो आवेदन किए थे, उनमें पुरुष और महिला दोनों वर्गों के अभ्यर्थी शामिल थे। आंकड़ों के मुताबिक, इन 28 लाख से अधिक कुल आवेदकों में से लगभग 19 लाख उम्मीदवारों ने पुरुष वर्ग के अंतर्गत आवेदन किया था, जो शारीरिक और लिखित परीक्षा की विभिन्न चरणों से गुजरे हैं। वहीं दूसरी ओर, इस विशाल भर्ती प्रक्रिया में महिला वर्ग की भागीदारी भी बेहद उल्लेखनीय रही, जिसमें करीब 9 लाख महिलाओं ने पुलिस सेवा में जाने के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत किया था। इतनी भारी-भरकम संख्या में महिला और पुरुष अभ्यर्थियों के शामिल होने के कारण ही इस भर्ती प्रक्रिया के हर एक चरण, विशेषकर शारीरिक मानक परीक्षा, को बहुत ही बारीकी और कड़ाई से आयोजित किया गया था, जिसके परिणाम स्वरूप ऊंचाई और सीने की नाप में फेल हुए उम्मीदवारों को अब अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा है और अब हाईकोर्ट के इस नए आदेश से उन्हें न्याय की एक बड़ी उम्मीद बंध गई है।