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अक्षय तृतीया 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त केवल 1 घंटा 32 मिनट, जानें सटीक समय

अक्षय तृतीया 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त केवल 1 घंटा 32 मिनट, जानें सटीक समय
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अक्षय तृतीया का पावन पर्व 19 अप्रैल 2026, रविवार को बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है क्योंकि इस दिन किए गए किसी भी काम का फल कभी समाप्त नहीं होता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस पावन तिथि को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस वर्ष पूजा का सबसे उत्तम समय सुबह से ही आरंभ हो जाएगा, जो साधकों को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करेगा। यह पावन पर्व हमें सिखाती है कि यदि हम सही समय पर और पवित्र मन से ईश्वर की शरण में जाते हैं, तो हमारे जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

अक्षय तृतीया 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त का विवरण

वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया की तिथि 19 अप्रैल को पड़ रही है। इस दिन पूजा के लिए भक्तों को केवल 01 घंटा 32 मिनट का विशेष समय प्राप्त होगा। धार्मिक गणना के अनुसार, तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे से होगा और इसका समापन अगले दिन यानी 20 अप्रैल 2026 को सुबह 07:27 बजे होगा। पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक निर्धारित किया गया है।

मुहूर्त के दौरान सावधानी और सात्विक आराधना

शुभ मुहूर्त के दौरान पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, जिससे पूजा का पूरा फल मिल सके। इस समय घर में किसी भी तरह की अशांति न होने दें और मन में केवल अच्छे विचारों को ही आने दें। पूजा की सामग्री पहले से ही तैयार कर लें ताकि मुख्य मुहूर्त में आपका ध्यान केवल भगवान के नाम का जाप करने में रहे। ताजे पीले फूलों और शुद्ध घी के दीपक का उपयोग करना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है। अपनी मधुर वाणी से सबका सम्मान करें और कड़वी बातों से पूरी तरह दूर रहें, जिससे घर की शांति बनी रहे। जब हम पवित्रता और संयम के साथ इन नियमों का पालन करते हैं, तो हमारे जीवन में सुख-शांति का स्थाई वास होता है।

‘अक्षय’ की शक्ति: पुण्य फल जो कभी समाप्त नहीं होता

‘अक्षय’ शब्द का वास्तविक अर्थ है जिसका कभी ‘क्षय’ यानी नाश न हो। इस पावन तिथि की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य, दान या मंत्र जाप कभी व्यर्थ नहीं जाता है। इस दिन हम जो भी नेक कर्म करते हैं, उनका पुण्य फल जीवनभर हमारे साथ रहता है और हमारी आत्मा के लिए एक स्थाई पूंजी बन जाता है। यह पवित्र दिन हमें सिखाता है कि सच्ची प्रार्थना और निस्वार्थ सेवा से मिलने वाली मानसिक शांति और समृद्धि का प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता है। जब हम इस भाव के साथ पूजा करते हैं, तो हमारा आने वाला समय और भी बेहतर और सुखद बनता है। यह तिथि हमें अनंत खुशियों और कभी न खत्म होने वाले आशीर्वाद का मार्ग दिखाती है।

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